Valentine आते ही बदली प्यार की लैंग्वेज, नए सर्वे ने बताया Gen Z का लव आखिर चाहता क्या है
वैलेंटाइन वीक आते ही सोशल मीडिया पर हीरे, लग्ज़री डिनर और सरप्राइज़ ट्रिप्स की भरमार दिखने लगती है. लेकिन असल ज़िंदगी में प्यार का मिज़ाज बदल रहा है.;
वैलेंटाइन डे आते ही प्यार का मौसम तो हर साल खिलता है, लेकिन इस बार इसकी भाषा थोड़ी बदल गई है. हाल ही में, पेप्सी UK और थर्सडे ने मिलकर एक नया वैलेंटाइन्स डे कैंपेन लॉन्च किया है, जहां Gen Z प्यार की की पुरानी कहावत को दोहारते हुए दिखे, जिसे रिलेशन-सिपिंग कहा गया.
यह ट्रेंड कहता है कि रिश्तों को दिखाने से ज्यादा जरूरी है उन्हें महसूस करना. प्यार अब स्टेटस अपडेट नहीं, बल्कि दो लोगों के बीच का निजी पल बनना चाहता है. जहां अब Gen Z को महंगे गिफ्ट्स की जरूरत नहीं है.
आखिर है क्या रिलेशन-सिपिंग?
अगर आसान शब्दों में कहें, तो रिलेशन-सिपिंग रिश्ते को पल-पल जीने जैसा है. बिना दिखावे, बिना शोर. पार्टनर की पसंद याद रखना, लंबी बात के बाद एक प्यारा सा मैसेज भेजना, साथ में पुरानी फोटो देखना- यही छोटे काम रिश्ते की असली मिठास बनाते हैं. यह सोच कहती है कि प्यार कोई स्टेज पर किया गया परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की नर्मी है.
क्या कहती है रिसर्च?
हाल में सामने आए सर्वे बताते हैं कि Gen Z अब ग्रैंड, कैमरा-फ्रेंडली जेस्चर से थोड़ा दूर जा रही है. उन्हें पर्सनल टच चाहिए- ऐसा कुछ जो सिर्फ उनके रिश्ते का हो, न कि पूरी दुनिया के लाइक्स के लिए. यानी प्यार की पब्लिसिटी कम, प्राइवेट कनेक्शन ज्यादा. करीब 77% यंगस्टर्स अब बड़े, फिल्मी और ओवर-द-टॉप जेस्चर की जगह छोटे, मीठे और दिल से किए गए इशारों को तरजीह दे रहे हैं. लगभग 31% ने माना कि वे वैलेंटाइन डे के तयशुदा रिवाज जैसे सोशल मीडिया पोस्ट, फूल-टेडी, महंगी डेट या पब्लिक प्रपोज़ल से दूरी बनाना चाहते हैं. 37% को ये जेस्चर जरूरत से ज्यादा इंटेंस लगे, 32% ने उन्हें फेक कहा, 26% ने इनऑथेंटिक और 20% को वे पर्सनल ही नहीं लगे.
क्यों जरूरी है यह बदलाव
बड़े जेस्चर अक्सर उम्मीदों का दबाव बढ़ा देते हैं. जबकि छोटी कोशिशें अपनापन बढ़ाती हैं. जैसे मैं तुम्हें देखती और समझती हूं.इस वैलेंटाइन, शायद सबसे अच्छा गिफ्ट कोई महंगा डिब्बा नहीं, बल्कि वह पल हो सकता है जो आप दोनों चुपचाप साथ बैठकर बांटते हैं. प्यार, आखिरकार, ग्रैंड से नहीं- बारीकियों से बनता है.