फैशन के ये Smart Tricks जान लिए तो हर किसी की टिक जाएंगी आप पर नजरें
ज्यादातर लोगों को लगता है कि स्टाइलिश और अलग लुक के लिए बहुत सारे कपड़ों की जरूरत होती है, लेकिन यह मिथ है. आप फैशन के कुछ ट्रिक्स आजमाकर रोजाना नया लुक पा सकते हैं.;
ऑफिस की मीटिंग हो या रात की पार्टी, हर जगह इम्प्रेस करने का दबाव अलग होता है. दिन में प्रोफेशनल दिखना है, शाम को ग्लैमरस और अक्सर हम इसी स्विच में अटक जाते हैं. इतना ही नहीं, हम में से ज़्यादातर लोग अलमारी खोलते ही यही सोचते हैं कि पहनने के लिए कुछ है ही नहीं!
लेकिन सच यह है कि स्टाइल बदलने के लिए पूरी अलमारी बदलना जरूरी नहीं है. कुछ स्मार्ट ट्रिक्स ऐसे होते हैं जो एक ही लुक को मिनटों में अपग्रेड कर देते हैं. ऑफिस से पार्टी तक स्ले करने का गेम असल में स्टाइलिंग की छोटी-छोटी टिप्स को फॉलो करना है.
बेसिक्स कपड़े स्टाइल करना
“बेसिक्स” का मतलब ऐसे कपड़े जिनको कई तरीकों से पहना जा सके. लेकिन दिक्कत तब होती है जब हमारे सारे बेसिक्स दिखने में लगभग एक जैसे होते हैं. जैसे अलमारी खोलो और पांचों टॉप काले, सेम कट, सेम स्टाइल. अब भले ही नंबर ज्यादा हो, पर आउटफिट वही लगेगा. वर्सेटिलिटी यानी एक ही कपड़े को अलग-अलग तरीके से नया लुक देना. अगर हर पीस एक जैसा है, तो मिक्स-मैच का मौका ही नहीं मिलता. ऐसे में कपड़े बढ़ते हैं, लेकिन ऑप्शन नहीं.
इसलिए जरूरत और खरीदने की नहीं, सोच बदलने की है. वही काला टॉप कभी जींस के साथ कैज़ुअल, कभी ट्राउज़र और जैकेट के साथ फॉर्मल, तो कभी स्कर्ट और एक्सेसरीज़ के साथ पार्टी लुक दे सकता है. खेल कपड़े का कम, उसे स्टाइल करने के तरीके का ज्यादा है.
कैप्सूल वॉर्डरोब
कम कपड़े होना गलत नहीं है. अलमारी हल्की हो तो तैयार होना आसान भी हो जाता है. लेकिन अगर सारे कपड़े इतने सिंपल हों कि आप भीड़ में अलग ही न दिखें, तो फिर स्टाइल का मज़ा कहां रहा? मिनिमल का मतलब यह नहीं कि बस सफेद, काला, बेज पहन लो और कहानी खत्म. इन रंगों में भी आपका अपना अंदाज़ दिख सकता है. फर्क पड़ता है कि आप उन्हें किस तरह पहनते हैं- किस फिट में, किन जूतों के साथ, कौन-सी घड़ी, बैग या ज्वेलरी जोड़ते हैं. यानी न्यूट्रल रंग बैकग्राउंड की तरह हैं. असली पर्सनैलिटी आप उसमें डालते हैं. थोड़ा सा स्टाइलिंग का ट्विस्ट, और सिंपल कपड़े भी “आप” जैसे लगने लगते हैं, किसी और जैसे नहीं.
महंगा खरीद लिया तो सब सेट
क्वालिटी जरूरी है, पर इरादा उससे भी जरूरी. बिना प्लान के खरीदे गए शानदार पीस भी अलमारी में लटके रह सकते हैं. महंगा मतलब हमेशा यूजफूल नहीं होता.
कॉपी करना गलत
किसी सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर या दोस्त पर कोई ड्रेस बहुत अच्छी लग रही हो, तो उससे आइडिया लेना बिल्कुल ठीक है. आप सोच सकते हैं कि आपको भी वैसा कलर, वैसा वाइब या वैसी स्टाइल पसंद है. लेकिन ठीक वैसी ही ड्रेस, वैसा ही फिट, वैसा ही कॉम्बिनेशन उठाकर पहन लेना हर बार काम नहीं करता है, क्योंकि हर शरीर अलग होता है. हाइट, शेप, कंधे, कमर, सबकी बनावट अलग होती है. जो कपड़ा किसी एक पर परफेक्ट लग रहा है, वही दूसरे पर वैसा नहीं बैठेगा. इसलिए रेडीमेड फॉर्मूला ढूंढने की बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि आप पर क्या सूट करता है.
स्टाइल बदलता है
हम अक्सर सोचते हैं कि बस एक दिन अपना “पर्सनल स्टाइल” मिल जाए, फिर कपड़े चुनना हमेशा आसान हो जाएगा. लेकिन असल जिंदगी इतनी सीधी नहीं है. समय के साथ हमारा शरीर बदलता है, काम का माहौल बदलता है, रोज़ की भागदौड़ बदलती है. जो आउटफिट कॉलेज में बढ़िया लगता था, जरूरी नहीं ऑफिस या किसी और लाइफ फेज में भी वैसा ही काम करे. इसीलिए स्टाइल को फिक्स करके नहीं रखा जा सकता. जैसे-जैसे जिंदगी आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे पहनावे की जरूरतें भी बदलती हैं. समझदारी यही है कि हम अपने कपड़ों और लुक को समय-समय पर अपडेट करते रहें, ताकि वे हमारी आज की लाइफ से मैच करें, कल वाली से नहीं.