बढ़ता अकेलापन और कडल थेरेपी ट्रेंड, 4 घंटे के ₹5,000 की फीस में पूरी हो रही है 'इमोशनल भूख'; जानिए फायदे और नुकसान

भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी से बात करने की न तो फुर्सत है न गले लगाने की. ऐसे में कडल थेरेपी अकेलेपन को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है. लेकिन इसके कुछ नियम भी है.;

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Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 17 Feb 2026 9:00 AM IST

Cuddle Therapy: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां लोग दिन-रात काम में डूबे रहते हैं, सोशल मीडिया पर तो हजारों 'फ्रेंड्स' दिखते हैं, लेकिन असल में दिल की बात करने वाला, गले लगाने वाला कोई नहीं होता. शहरों में अकेलापन इतना बढ़ गया है कि कई लोग चुपचाप रोते हैं, तनाव से परेशान रहते हैं, और इमोशनली रूप से खाली महसूस करते हैं. कल्पना कीजिए एक ऐसा दिन हो ऑफिस से थककर घर लौटते हैं. फोन स्क्रॉल करते-करते नींद आ जाती है. लेकिन मन में एक खालीपन रह जाता है.

कोई ऐसा इंसान चाहिए जो बिना किसी शर्त के, बिना जजमेंट के, बस गले लगा ले, बात सुने, साथ बैठे और थोड़ी देर के लिए वो अकेलापन दूर कर दे. लेकिन रिश्तों में आजकल इतनी कॉम्प्लीकेशन्स हैं अपेक्षाएं, झगड़े, ब्रेकअप का डर कि लोग सोचते हैं, 'क्या कोई आसान, सुरक्षित तरीका नहीं जहां बस इंसानी स्पर्श और साथ मिले?. यहीं से शुरू होती है कडल थेरेपी (Cuddle Therapy) की कहानी. एक ऐसी सर्विस जो कहती है, 'आपको स्पर्श की जरूरत है, और वो जरूरत पूरी हो सकती है बिना किसी रोमांटिक या सेक्सुअल रिलेशन के.

कडल थेरेपी क्या है?

सरल शब्दों में समझे तो कडल थेरेपी एक तरह की प्लेटोनिक टच थेरेपी है, यानी पूरी तरह नॉन-सेक्सुअल, फ्रेंडली टच वाली थेरेपी. इसमें एक ट्रेंड प्रोफेशनल 'कडलर' (cuddler) या थेरेपिस्ट क्लाइंट के साथ समय बिताता है.

  • गले लगाता है, हाथ पकड़ता है, साथ लेटकर बात करता है.
  • आंखों में आंखें डालकर सुनता है या बस कंधे पर सिर रखने देता है.
  • सब कुछ कपड़ों के साथ, पूरी तरह सहमति से और सख्त नियमों के तहत.
  • कोई किसिंग, कोई सेक्सुअल टच, कोई नंगापन ये सब सख्ती से मना है. 
  • सेशन आमतौर पर 1-4 घंटे के होते हैं.

भारत में दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में ये धीरे-धीरे पॉपुलर हो रही है. कुछ जगहों पर 3-4 घंटे के सेशन के लिए ₹5,000 तक चार्ज होता है, जबकि कुछ स्टूडियो में ज्यादा भी. ग्लोबल प्लेटफॉर्म जैसे Cuddlist.com पर सर्टिफाइड थेरेपिस्ट मिलते हैं, जो बैकग्राउंड चेक और ट्रेनिंग पास करते हैं. 

ये कैसे काम करती है?

1. सहमति और नियम पहले: दोनों पक्ष (क्लाइंट और थेरेपिस्ट) पहले ही सारे नियम पढ़ते और मानते हैं. कोई भी समय पर सेशन रोक सकता है. 

2. सुरक्षा: अच्छे प्लेटफॉर्म पर बैकग्राउंड चेक, प्राइवेसी, और क्लियर बॉउंड्रीज होती हैं. दोनों को नशे में नहीं होना चाहिए, उम्र 18+ होनी चाहिए. 

3. क्या होता है सेशन में? बातचीत, हग्स, स्पूनिंग (एक-दूसरे के साथ लेटना), हैंड होल्डिंग, या बस साथ बैठना. कई लोग कहते हैं कि इससे तनाव कम होता है, नींद अच्छी आती है, और मन हल्का हो जाता है क्योंकि इंसानी स्पर्श से बॉडी में ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन निकलता है, जो 'फील गुड' हॉर्मोन है. 

4. भारत में स्थिति: यहां ये अभी नई है कुछ लोग इसे डेटिंग समझ लेते हैं, इसलिए प्लेटफॉर्म जैसे Ko-Partner (जो प्लेटोनिक साथ देता है—फिल्म देखने, शॉपिंग, बात करने के लिए) साफ-साफ कहते हैं कि ये डेटिंग नहीं, प्रोफेशनल सर्विस है. Ko-Partner पर रोज 2000 लोग रजिस्टर होते हैं, ज्यादातर 32-35 साल के. कडल थेरेपी कुछ जगहों पर अलग से मिलती है, जैसे कुछ टैन्ट्रा स्टूडियो या छोटे प्लेटफॉर्म. 

फायदे क्या हैं?

  • अकेलेपन से राहत
  • तनाव, चिंता और भावनात्मक थकान कम होना
  • बिना किसी एक्सपेक्टेशन के इमोशनल सपोर्ट
  • कई लोगों को लगता है कि ये 'इमोशनल हंगर' मिटाने का सुरक्षित तरीका है
  • लेकिन सावधानियां जरूरी हैं

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, डॉ. पवित्रा शंकर जैसी एक्सपर्ट कहती हैं कि ये अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन असली रिश्तों की जगह नहीं ले सकती. अगर आदत पड़ जाए तो असल में और ज्यादा अकेला महसूस कर सकते हैं. सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की है:

  • भारत में कई फेक या फेक वेबसाइट्स हैं जहां बॉउंड्रीज क्लियर नहीं
  • कुछ लोग इसे 'हैप्पी एंडिंग' वाली सर्विस समझ लेते हैं, जो असली कडल थेरेपी नहीं
  • खासकर महिलाओं के लिए रिस्क ज्यादा फिजिकल और इमोशनल दोनों
  • इसलिए सिर्फ सर्टिफाइड, रिव्यू वाले, क्लियर रूल्स वाले प्लेटफॉर्म चुनें

कडल थेरेपी एक नई जरूरत को पूरा करने की कोशिश है ह्यूमन टच की. लेकिन ये कोई जादू नहीं, बस एक टूल है. असली खुशी तो उन रिश्तों में है जहां प्यार, विश्वास और मेहनत हो. अगर आप अकेले महसूस कर रहे हैं, तो पहले दोस्तों-परिवार से बात करें, थेरेपी लें, या ऐसी सर्विस ट्राई करें लेकिन आंख खोलकर क्योंकि स्पर्श तो ठीक है, लेकिन दिल का साथ बिना पैसे के ज्यादा गहरा होता है. 

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