बंद करो पिज़्जा बर्गर! 3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे की चपेट में, 2025-26 के इकोनॉमिक सर्वे में बड़ा खुलासा
Economic Survey 2025-26 में भारत में तेजी से बढ़ते मोटापे को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया गया है. सर्वे के मुताबिक, अनहेल्दी खान-पान, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) और बदली हुई लाइफस्टाइल इसके मुख्य कारण हैं. NFHS डेटा के अनुसार, देश में 24% महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि 3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे की चपेट में हैं.;
2025-26 के इकोनॉमिक सर्वे में गुरुवार को एक बहुत बड़ी और चिंताजनक बात कही गई है. सर्वे में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भारत में मोटापा बहुत तेजी से और खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है. यह अब देश के लिए एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यह इकोनॉमिक सर्वे पेश किया. इसमें कहा गया है कि मोटापे का यह बढ़ना कई कारणों से हो रहा है जैसे- अनहेल्दी खान-पान, लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव, जैसे कि लोगों का ज्यादा बैठे रहना, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) यानी बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और पैकेट बंद खाने-पीने की चीजों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ना. पर्यावरण के कुछ फैक्टर भी इसमें भूमिका निभा रहे हैं.
यह समस्या अब हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है बच्चे, युवा, बूढ़े सभी. इससे डायबिटीज, दिल की बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां (NCDs) का खतरा बहुत बढ़ गया है. यह समस्या शहरों और गांवों दोनों में फैल रही है. आंकड़ों की बात करें तो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) 2019-21 के अनुसार, भारत की लगभग 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं. 15 से 49 साल की उम्र की महिलाओं में 6.4 प्रतिशत मोटापे से पीड़ित हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 4.0 प्रतिशत है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन की समस्या 2015-16 में 2.1 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई है.
3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे से ग्रस्त
अनुमान के मुताबिक, 2020 में भारत में 3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे. अगर यही स्थिति बनी रही तो 2035 तक यह संख्या बढ़कर 8.3 करोड़ तक पहुंच सकती है. यह बहुत बड़ी चिंता की बात है. सर्वे में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPF) के बढ़ते बाजार पर खास चिंता जताई गई है. ये पैकेट वाले स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, इंस्टेंट नूडल्स, बिस्किट आदि हैं, जो बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं. इनका पुराने पारंपरिक खाने की जगह लेना शुरू हो गया है. इससे हमारा खान-पान कम पौष्टिक हो रहा है और कई पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है.
कुछ चौंकाने वाले आंकड़े:
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते UPF बाजारों में से एक है
2009 से 2023 के बीच UPF की बिक्री में 150 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई
खुदरा बिक्री 2006 में सिर्फ 0.9 अरब डॉलर थी, जो 2019 में बढ़कर लगभग 38 अरब डॉलर हो गई- यानी करीब 40 गुना बढ़ोतरी!
अर्थव्यवस्था पर क्या है मोटापे का असर
इसी दौरान पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापा लगभग दोगुना हो गया. यह ग्लोबल ट्रेंड से मिलता-जुलता है, जहां खान-पान में बदलाव के साथ मोटापा बढ़ रहा है. UPF के बढ़ते इस्तेमाल से सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है. इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च होता है. लोगों की काम करने की क्षमता (प्रोडक्टिविटी) कम होती है. सरकार पर लंबे समय तक आर्थिक बोझ बढ़ता है. फिर भी, अच्छी बात यह है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है. मोटापे को रोकने, उसका मैनेज करने और कम करने के लिए कई बड़े-बड़े कैंपिंग चलाए जा रहे हैं.
इनमें शामिल हैं:
पोषण अभियान और पोषण 2.0
फिट इंडिया मूवमेंट
खेलो इंडिया
ईट राइट इंडिया
नेशनवाइड अवेयरनेस कैंपेन जैसे 'आज से थोड़ा कम'
आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM)
स्कूल हेल्थ प्रोग्राम
योग को बढ़ावा देना
इन सबका मकसद है कि स्वास्थ्य, गुड नुट्रिशन, फिजिकल एक्सरसाइज, सही खान-पान और हेल्दी लाइफस्टाइल को एक साथ जोड़ा जाए ताकि भारत एक स्वस्थ, मजबूत और मोटापे से मुक्त देश बन सके.