Propose Day 2026: एक खाली पेज, एक धड़कता दिल और हां में छुपा प्यार

कभी-कभी एक खाली पेज, धड़कता हुआ दिल और सच्चे एहसास ही प्यार के इजहार के लिए काफी होते हैं, जहां शब्द कम पड़ जाते हैं और “हां” सब कुछ कह जाती है.;

( Image Source:  AI SORA )
By :  हेमा पंत
Updated On : 8 Feb 2026 7:00 AM IST

फरवरी की हल्की ठंड थी. धूप बालकनी में ऐसे उतर रही थी जैसे किसी ने पीले रंग का पर्दा टांग दिया हो. मैं चाय का कप हाथ में लिए बैठा था, लेकिन दिमाग कहीं और था. आज प्रपोज डे था- और मैं पिछले तीन सालों से अपने ही डर से लड़ रहा था. उसे सब पता था, सिवाय उस एक बात के जो मैंने कभी कही ही नहीं.

हमारी मुलाकात ऑफिस की कैंटीन में हुई थी. वह हमेशा खिड़की के पास वाली सीट पर बैठती, और मैं बहाने से वहीं जाकर चाय लेता. बातचीत “शुगर कितनी?” से शुरू हुई और “आज लंच साथ?” तक पहुंच गई. धीरे-धीरे दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि दिन की शुरुआत और अंत उसी से बात किए बिना अधूरा लगता. उस दिन मैंने तय कर लिया था- अब नहीं तो कभी नहीं.

मैंने उसे शाम को उसी पुराने पार्क में बुलाया, जहां हम कई बार यूं ही घूमने आए थे. दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि लग रहा था आसपास के लोग भी सुन लेंगे. वह आई, हमेशा की तरह मुस्कुराती हुई. बोली, “आज बड़े सीरियस लग रहे हो!”

मैंने जेब से कोई रिंग नहीं निकाली, कोई घुटनों पर बैठने वाला फिल्मी सीन भी नहीं था. बस हाथ में एक छोटी-सी डायरी थी. उसमें हमारी पहली कॉफी की तारीख, पहली मूवी, पहली लड़ाई और हर छोटी याद लिखी थी.

मैंने डायरी उसे दी और कहा, “ये हमारी कहानी है… बस एक पेज खाली है. सोचा, वो पेज तुम्हारे साथ मिलकर भरना है.”

वह कुछ सेकंड चुप रही. मेरी सांस अटकी हुई थी. फिर उसने डायरी बंद की, मेरी तरफ देखा और हल्के से कहा, “मुझे लगा था तुम ये बात कभी कहोगे ही नहीं.” उसकी आंखों में हल्की नमी थी, लेकिन मुस्कान पहले से ज्यादा बड़ी.

उस दिन मुझे समझ आया कि प्यार जताने के लिए बड़े शब्द या महंगे तोहफे नहीं चाहिए. बस सच्चाई और सही वक्त चाहिए. प्रपोज डे मेरे लिए कोई खास तारीख नहीं था, लेकिन उस दिन वह मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन बन गया- क्योंकि मैंने अपने दिल की बात कह दी, और उसने सुन ली.

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