हर वक्त ‘अच्छी लड़की’ बनना पड़ सकता है भारी! Good Girl Syndrome से बढ़ सकती हैं ये परेशानियां

बचपन से कई लड़कियों को सिखाया जाता है कि विनम्र रहो, ज्यादा सवाल मत पूछो, सबको खुश रखो. धीरे-धीरे यह आदत उनकी पहचान बन जाती है और वे हर परिस्थिति में खुद से पहले दूसरों को रखने लगती हैं.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 12 Feb 2026 2:03 PM IST

बचपन से लड़कियों को एक खास तरह की सीख दी जाती है, धीरे बोलो, पलटकर जवाब मत दो, सबको खुश रखो, घर की इज्जत बनो. सुनने में ये बातें संस्कार जैसी लगती हैं, लेकिन कई बार यही आदतें भीतर दबे तनाव का पहाड़ खड़ा कर देती हैं. बाहर से शांति दिखती है, मगर अंदर भावनाओं का दबाव जमा होता रहता है. यही पैटर्न आगे चलकर ‘गुड गर्ल सिंड्रोम’ की शक्ल ले सकता है.

इस सोच में लड़की हर हाल में विनम्र, सहयोगी और दूसरों की जरूरतों को खुद से ऊपर रखने वाली बन जाती है. वह ‘ना’ कहने से डरती है, गुस्सा दबा लेती है और अपनी तकलीफों को छोटा मान लेती है. नतीजा यह कि मन की बात बाहर नहीं आती, तो इससे कई तरह के नुकसान होते हैं. 

लड़कियों पर ही ज्यादा दबाव क्यों?

पारंपरिक भूमिकाओं ने लंबे समय तक महिलाओं को परिवार जोड़कर रखने की जिम्मेदारी दी. इसलिए उन्हें शांति बनाए रखने वाली, समायोजन करने वाली छवि में ढाला गया. लड़कों को अक्सर अपनी बात रखने और दबंग होने की छूट मिलती है, जबकि लड़कियों को विनम्रता का सिंबल बनाया जाता है.

गुड गर्ल बनने से होने वाले हेल्थ नुकसान

भावनाओं को लगातार दबाने से शरीर स्ट्रेस मोड में रहने लगता है. जब किसी को अपनी बात कहने की जगह नहीं मिलती, तो दिमाग खतरे जैसा रिस्पॉन्स देता है. इससे तनाव हार्मोन बढ़ सकते हैं, नींद प्रभावित होती है और थकान लगातार बनी रहती है. कई महिलाओं को बिना साफ वजह के पाचन संबंधी दिक्कतें, सिरदर्द, पीठ दर्द या हार्मोनल गड़बड़ियां महसूस होती हैं. लंबे समय तक अपनी जरूरतों को नजरअंदाज करने से एंग्जायटी और इमोशनल बर्नआउट भी बढ़ सकता है. यानी शांत दिखने की कोशिश अंदर की उथल-पुथल को खत्म नहीं करती, बस उसे गहरा कर देती है.

क्या इसके कोई फायदे भी हैं?

समाज के नजरिए से देखें तो ‘अच्छी लड़की’ की इमेज को सराहा जाता है. ऐसे बिहेवियर से रिश्तों में टकराव कम दिख सकता है, लोग भरोसा भी करने लगते हैं. प्रोफेशनल लाइफ में भी मदद करने और सॉफ्ट होना पॉजिटिव माना जाता है. लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह अच्छाई मजबूरी बन जाए. अगर हर बार दूसरों को प्राथमिकता देने के लिए खुद को मिटाना पड़े, तो यह बैलेंस बिगाड़ देता है.

क्या हैं गुड गर्ल सिंड्रोम के नुकसान?

गुड गर्ल सिंड्रोम का सबसे बड़ा नुकसान सेल्फ- एक्सप्रेशन का दब जाना है. धीरे-धीरे व्यक्ति को समझ ही नहीं आता कि उसे खुद क्या चाहिए. फैसले लेने में डर लगता है, अपराधबोध बढ़ता है और कॉन्फिडेंस कम हो सकता है. रिश्तों में भी अनकही नाराजगी जमा होती रहती है, जो किसी दिन अचानक फूट सकती है.

क्या है सॉल्यूशन?

अच्छा होना गलत नहीं, पर खुद के लिए ईमानदार रहना भी उतना ही जरूरी है. सीमाएं तय करना, ‘ना’ कहना सीखना और भावनाओं को हेल्दी तरीके से एक्सप्रेस करना मेंटल और फिजिकल हेल्थ दोनों के लिए जरूरी कदम हैं. जब लड़की ‘गुड’ होने के साथ-साथ ‘रियल’ भी रह पाती है, तभी असली संतुलन बनता है.

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