Dry Eye Syndrome: मोबाइल और लैपटॉप छीन रहे आंखों की नमी? इन चीजों से करें पहचान
मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से युवाओं में ड्राई आई की समस्या तेजी से बढ़ रही है. जानिए इसके लक्षण, कारण और कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह.;
आज की लाइफस्टाइल में मोबाइल और लैपटॉप के बिना दिन की कल्पना करना मुश्किल है. पढ़ाई, ऑफिस का काम, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म हर जरूरत स्क्रीन से जुड़ चुकी है. घंटों लगातार स्क्रीन देखने की आदत अब आम हो गई है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारी आंखें चुका रही हैं. खासतौर पर युवा वर्ग में आंखों की नमी खत्म होने यानी ड्राई आई की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है.
पहले ड्राई आई को उम्र से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप देखने से लोग सामान्य से बहुत कम पलक झपकाते हैं. इससे आंखों की सतह पर मौजूद नमी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. ऊपर से देर रात तक स्क्रीन इस्तेमाल, नींद की कमी और अनियमित लाइफस्टाइल इस समस्या को और बढ़ा रही है.
ड्राई आई क्या है और कैसे शुरू होती है?
ड्राई आई का मतलब सिर्फ आंसुओं की कमी नहीं है, बल्कि कई बार आंसुओं की क्वालिटी खराब हो जाना भी इसकी वजह बनता है. आंखों को स्वस्थ रखने के लिए एक संतुलित आंसू परत जरूरी होती है. ज्यादा स्क्रीन टाइम, धूल-धुआं, प्रदूषण और एसी वाले वातावरण में ज्यादा समय बिताने से यह संतुलन बिगड़ जाता है. समय रहते इसे समझ लिया जाए तो आंखों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
लक्षण जो आंखें दे रही हैं चेतावनी
ड्राई आई के लक्षण शुरुआत में हल्के लग सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदेह हो सकता है. आंखों में जलन, चुभन और खुजली इसका सबसे आम संकेत है. कई लोगों की आंखें लाल हो जाती हैं या बार-बार पानी आने लगता है. कुछ मामलों में ऐसा महसूस होता है जैसे आंखों में रेत या कोई कण फंसा हो, वहीं कई बार अचानक धुंधला दिखना या तेज रोशनी से परेशानी भी होने लगती है.
प्रदूषण, एसी और पानी की कमी भी जिम्मेदार
सिर्फ स्क्रीन ही नहीं, बल्कि आसपास का माहौल भी ड्राई आई को बढ़ाता है. ज्यादा प्रदूषण, धूल और धुआं आंखों की नमी को नुकसान पहुंचाते हैं. लंबे समय तक एसी में रहना, शरीर में पानी की कमी और पूरी नींद न लेना भी आंखों को ड्राई बना सकता है. ये छोटे-छोटे कारण मिलकर आंखों की सेहत पर बड़ा असर डालते हैं.
कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह लेना?
अगर आंखों में सूखापन, जलन या धुंधलापन लंबे समय तक बना हुआ है, तो इसे हल्के में न लें. समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है. सही इलाज, आई ड्रॉप्स और कुछ लाइफस्टाइल बदलाव जैसे स्क्रीन ब्रेक लेना, पलक झपकाने की आदत और पर्याप्त पानी पीना से आंखों की नमी और रोशनी दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है. थोड़ी सावधानी आज, आंखों की बड़ी परेशानी से कल बचा सकती है.