कांग्रेस को कोसने वाली BJP ने खुद किया CPC का रेड कार्पेट वेलकम, क्या हैं इसके मायने, विपक्ष की दोस्ती गुनाह कैसे?

बीजेपी जो वर्षों से कांग्रेस और गांधी परिवार को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) से रिश्तों को लेकर घेरती रही है, उसी BJP ने अब CPC प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली में औपचारिक स्वागत किया. इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में भूचाल मचा हुआ है. माना जा रहा है कि कांग्रेस सहित विपक्ष को अब बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है.;

( Image Source:  BJP Facebook )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 13 Jan 2026 11:31 AM IST

जिस चीन को लेकर बीजेपी सालों से कांग्रेस, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को देशद्रोह, चीन प्रेम और गुप्त समझौते के ताने मारती रही… आज उसी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का दिल्ली में रेड कार्पेट वेलकम क्यों हुआ? सवाल बड़ा है. क्या बीजेपी कांग्रेस पर लगाए गए अपने ही पुराने आरोप भूल गई? क्या यह राजनीति की मजबूरी है या कूटनीति की चाल? और क्या अब CPC से दोस्ती ठीक है, लेकिन कांग्रेस की थी तो गुनाह? BJP–CPC मुलाकात के असली मायने. कांग्रेस पर आरोपों का पूरा इतिहास. और वो सच्चाई जो राजनीतिक शोर में दबा दी गई है!

गलवान झड़प के बाद पार्टी-टू-पार्टी पहली बैठक

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट (IDCPC) की वाइस मिनिस्टर सुन हैयान ने 12 जनवरी को BJP हेड ऑफिस का दौरा किया. मीटिंग के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि BJP और CPC के बीच कम्युनिकेशन और बातचीत को कैसे आगे बढ़ाया जाए. साल 2020 की गलवान घाटी की घातक झड़प के बाद दोनों पक्षों के बीच पहली औपचारिक पार्टी-टू-पार्टी बातचीत थी.

BJP के विदेश मामलों के विभाग के इंचार्ज विजय चौथाईवाले ने X पर एक पोस्ट में कहा कि CPC का डेलीगेशन जिसका नेतृत्व CPC के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट (IDCPC) की वाइस मिनिस्टर सुन हैयान कर रही थीं, ने BJP हेडक्वार्टर का दौरा किया.

क्या हुआ दिल्ली में?

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बीजेपी के दिल्ली मुख्यालय में बैठक की। इसमें CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हयान और BJP के नेता शामिल रहे. इसका मकसद था दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और बातचीत बढ़ाना. इसी बैठक को कई जगह रेड कार्पेट वेलकम जैसा बताया जा रहा है, क्योंकि BJP नेताओं ने चीनी प्रतिनिधियों का औपचारिक स्वागत किया.

BJP के लिए इसके मायने

भारत-चीन रिश्तों में बातचीत का संकेत. हाल के समय में भारत और चीन के बीच सीमा पर तनातनी और राजनीतिक तनाव कम हुआ है और दोनों देशों ने बातचीत के रास्ते खोलने की कोशिश की है. इस बैठक को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है. राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद बढ़ाने की दिशा में एक कदम.

यह बैठक राजनीतिक दलों के बीच सीधे संवाद का प्रयास है. यानी सरकार स्तर के अलावा राजनीतिक पार्टियों के बीच भी विचारों का आदान-प्रदान हो. ऐसे इंटर-पार्टी संवाद CPC जैसे बड़े वैश्विक दलों के साथ कई देशों में आयोजित होते रहे हैं.

यह मुलाकात BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों, चीन-भारत के बीच भरोसा-निर्माण उपायों और वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में तालमेल के संदर्भ में भी देखी जा सकती है. कई विश्लेषक इसे इसी तरह के व्यापक कूटनीतिक ढांचे का हिस्सा मान रहे हैं.

विपक्ष के लिए यह मुद्दा क्यों?

बीजेपी पहले अक्सर कम्युनिस्ट विचारधारा और विशेष रूप से चीन के प्रति वाम-पक्षी दलों की नजदीकी पर हमला करती रही है. ऐसे में जब BJP खुद CPC प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करती है, तो विपक्ष और कुछ मीडिया इसे लेकर सवाल उठा सकती हैं कि क्या यह BJP की पूर्व भाषाओं से मेल खाता है? क्या देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वार्थ को ध्यान में रखा जा रहा है? क्या यह कांग्रेस और अन्य दलों पर लगाए गए पुराने आरोपों के विपरीत है?

कांग्रेस की दोस्ती से अलग कैसे?

यह बैठक कांग्रेस या भारत के घरेलू मुद्दों से अलग एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संवाद पहल है. BJP इसे दो बड़े राजनीतिक दलों के बीच सहयोग और समझ को मजबूत करने वाला कदम बता रही है. विपक्ष इसे वैचारिक विरोधाभास और राजनीतिक मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है.

क्या है CPC?

CPC का मतलब है (Chinese Communist Party) यानी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी, जो चीन की सत्ताधारी पार्टी है. सीपीसी का चीन शासन-प्रशासन और विदेश मामलों में अहम भूमिका निभाती है. पार्टी लाइन से अलग हटकर चीन की सत्ताधारी पार्टी के लिए कुछ करना मुश्किल होता है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुद्दे पर कांग्रेस, राहुल गांधी सोनिया गांधी को क्यों कोसती आई है बीजेपी.

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