Vande Mataram New Guidelines: सरकार ने जारी किए नए निर्देश, अब खड़े होकर सुनना होगा; जानें क्या बदला
केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत अब इसके आधिकारिक संस्करण के दौरान सभी को खड़ा रहना होगा. कार्यक्रमों में वंदे मातरम् और जन गण मन के क्रम को भी तय कर दिया गया है.;
राष्ट्री गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केंद्र सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा गाइडलाइंस में कहा गया है कि जब भी वंदे मातरम् का आधिकारिक संस्करण गाया या बजाया जाएगा, तब मौजूद सभी लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना जरूरी होगा. इसका उद्देश्य राष्ट्र गीत के प्रति सम्मान और एकरूपता सुनिश्चित करना बताया गया है.
नए निर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि जिन कार्यक्रमों में राष्ट्र गीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएंगे, वहां सबसे पहले वंदे मातरम् का गाया जाएगा और उसके बाद जन गण मन प्रस्तुत किया जाएगा. इससे दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों की प्रस्तुति का क्रम भी तय कर दिया गया है.
सामूहिक रूप से गाने पर जोर
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि अब पद्म पुरस्कार समारोह जैसे नागरिक सम्मानों से जुड़े कार्यक्रमों में वंदे मातरम् बजाया जाएगा. इसके अलावा राष्ट्रपति की मौजूदगी वाले सभी सरकारी आयोजनों में उनके आगमन और प्रस्थान के समय भी राष्ट्रीय गीत का उपयोग किया जाएगा.
गाइडलाइंस के अनुसार, जहां भी वंदे मातरम् गाया जाएगा, वहां केवल उसका अधिकृत संस्करण ही इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही इसे सामूहिक रूप से गाने की परंपरा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, ताकि कार्यक्रम में मौजूद सभी लोग इसमें भाग ले सकें.
सरकार का कहना है कि इन निर्देशों का मकसद देशभर में एक समान प्रोटोकॉल लागू करना है, जिससे राष्ट्रीय गीत के सम्मान और गरिमा को बनाए रखा जा सके. सरकार ने स्कूल प्रबंधन को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में ऐसे प्रावधान शामिल करें, जिनसे छात्रों के बीच राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान के सामूहिक गायन को बढ़ावा मिले और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जा सके.
‘वंदे मातरम्’ विवाद
इस नए निर्देश और चार अंतरों को शामिल किए जाने से एक बार फिर विवाद खड़ा होने की संभावना है, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले साल इसी मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिली थी. यह विवाद तब और गहरा गया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया था कि उन्होंने यह गीत इसलिए नहीं अपनाया क्योंकि इससे “मुसलमानों की भावनाएं आहत हो सकती थीं” और उन्होंने इस मामले में मोहम्मद अली जिन्ना के रुख का अनुसरण किया. इसके बाद भाजपा ने अपने दावे के समर्थन में नेहरू द्वारा लिखे गए पत्र सार्वजनिक किए थे. यह बहस उस समय और उग्र हो गई जब संसद में इस गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखा टकराव देखने को मिला.
हटाए गए अंतरे
7 नवंबर 1875 को बंगाल के प्रसिद्ध लेखक और 19वीं सदी के सबसे प्रभावशाली चिंतकों में गिने जाने वाले बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने एक कविता लिखी, जो आगे चलकर भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरक नारा बनी. यह गीत पहली बार 1882 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में सामने आया और यही रचना आगे चलकर ‘वंदे मातरम्’ के रूप में प्रसिद्ध हुई. अपने छह अंतरों में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने देवी स्वरूपा नारी शक्ति की आराधना की और भारत को एक उग्र लेकिन स्नेहमयी ‘मां’ के रूप में चित्रित किया, जो बौद्धिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से संतान का सहारा बनती है. हालांकि, शुरुआती अंतरों में मां का स्वरूप अमूर्त रूप में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन बाद के अंतरों, विशेषकर अंतिम दो अंतरों में यह रूप अधिक ठोस और स्पष्ट हो जाता है.