गणतंत्र दिवस 2026: भारत को रिपब्लिक बनाने वाला असली हीरो कौन? गांधी, नेहरू और अंबेडकर से लेकर शामिल हैं ये नाम

भारत को गणराज्य (Republic) बनाने का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता, बल्कि यह संविधान सभा (Constituent Assembly) के सामूहिक प्रयास का नतीजा था, जिसमें डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (अध्यक्ष) और सर बेनेगल नरसिंह राव (संवैधानिक सलाहकार) जैसे कई महान नेताओं और विशेषज्ञों का योगदान था, जिन्होंने भारत को एक लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने की नींव रखी और संविधान को अंतिम रूप दिया.;

Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 10 Jan 2026 3:52 PM IST

भारत हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाता है. जब हमारा देश 1950 में संविधान के तहत पूरी तरह से एक सार्वभौम गणराज्य (Republic) बन गया. इस महान उपलब्धि के पीछे कई नेताओं का योगदान है. इनमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर को संविधान का मुख्य शिल्पकार कहा जाता है, लेकिन इसके साथ ही जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और कई अन्य नेताओं ने भी भारत को गणराज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जानें, उनके योगदान और संघर्ष की कहानी.

दरअसल, गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है. इसका मकसद भारत का गणराज्य (Republic) बनने की वर्षगांठ की अहमियत का याद करना और 140 करोड़ लोगों के दिलों में देश के संविधान की गरिमा करने का भाव भरना है. साथ ही उन महान विभूतियों को याद करना भी है, जिन्होंने भारत को रिपब्लिक बनाने में अहम भूमिका निभाई. महात्मा गांधी जैसे नेताओं के आदर्शों और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों का भी गहरा प्रभाव था. 

रिपब्लिक बनाने में योगदान देने वाले प्रमुख शख्सियत

1. महात्मा गांधी

महात्मा गांधी सीधे संविधान सभा के सदस्य नहीं थे, लेकिन उनकी राजनीतिक विचारधारा जैसे सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, अहिंसा और नैतिक दृष्टिकोण ने संविधान के आदर्शों पर गहरा प्रभाव डाला. उनका संघर्ष और अहिंसा का संदेश संविधान में नागरिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यकों के संरक्षण की नीति के रूप में परिलक्षित हुआ. भारत के गणतांत्रिक स्वरूप के असली 'हीरो' वे सभी लोग थे,  जिसमें डॉ. अम्बेडकर और बी. एन. राव जैसे दूरदर्शी व्यक्तियों का योगदान महत्वपूर्ण था, साथ ही गांधीजी जैसे नेताओं के नैतिक मार्गदर्शन का भी प्रभाव था. गांधी ने अपने सियासी सोच से अंग्रेजों को मजबूर किया कि वो भारत को आजाद मुल्क घोषित कर यहां से चले जाएं.

2. जवाहरलाल नेहरू

जवाहरलाल नेहरू संविधान सभा में स्वतंत्र भारत के भविष्य की दृष्टि पेश करने वाले प्रमुख नेता थे. वे लोकतंत्र, विज्ञान, शिक्षा और आर्थिक प्रगति पर जोर देते हुए आधुनिक और समावेशी भारत की नींव रखना चाहते थे. उनका योगदान विशेष रूप से नागरिक स्वतंत्रताओं और शासन तंत्र को मजबूत बनाने में दिखाई देता है. साथ ही सबको साथ लेकर चलने की उनकी सोच आज भी प्रासंगिक है.

3. डॉ. बी.आर. अंबेडकर

डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार (Chief Architect) कहा जाता है. उन्होंने संविधान के लेखन में अनुसूचित जातियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया. उनके नेतृत्व में संविधान सभा में संविधान का मसौदा तैयार किया गया और उन्होंने समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय के सिद्धांतों को संविधान में स्थापित किया.

4. सर बेनेगल नरसिंह राव

सर बेनेगल नरसिंह राव ने संविधान सभा में राज्य और संघीय ढांचे (Federal Structure) के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया. वे राज्यों के अधिकारों और केंद्र की शक्तियों के बीच संतुलन बनाने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे. उनके प्रयासों से भारत के संघीय ढांचे में राज्यों और केंद्र के बीच स्पष्ट जिम्मेदारियों और अधिकारों का संतुलन स्थापित हुआ.राव ने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन कर एक मसौदा तैयार किया, जो भारतीय संविधान की आधारशिला बनी.

5. सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार पटेल ने संविधान सभा में एकता और अखंडता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे राज्यों के एकीकरण और संघीय ढांचे के सुदृढ़ीकरण में अग्रणी थे. उनकी दूरदर्शिता से संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का संतुलन और भारत की राजनीतिक अखंडता सुनिश्चित हुई.

6. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

मौलाना अबुल कलाम आजाद ने संविधान सभा में शिक्षा, धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों के अधिकार पर जोर दिया. वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि भारत का संविधान सभी धार्मिक समुदायों के लिए समान और न्यायपूर्ण हो. उनका योगदान नागरिक अधिकारों और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण में अहम रहा.

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