हिंदू वोट, चुनावी माहौल और पड़ोसियों को Message, सोमनाथ मंदिर में PM Modi ने दिए ये संदेश; जानें क्या बोले एक्सपर्ट
इतिहास और आस्था के संगम का प्रतीक सोमनाथ मंदिर एक बार फिर चर्चाओं में है. गुजरात के सोमनाथ में आयोजित चार दिवसीय ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ न केवल धार्मिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इसके राजनीतिक और ऐतिहासिक निहितार्थ भी गहरे माने जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अधिक राष्ट्रीय महत्व दे दिया है.;
सोमनाथ मंदिर एक बार फिर चर्चाओं में है. गुजरात के सोमनाथ में आयोजित चार दिवसीय ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ न केवल धार्मिक दृष्टि से अहम है, बल्कि इसके राजनीतिक और ऐतिहासिक निहितार्थ भी गहरे माने जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस आयोजन को और अधिक राष्ट्रीय महत्व दे दिया है.
यह उत्सव सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार साल पूरे होने की स्मृति में आयोजित किया गया है. वरिष्ठ पत्रकार का मानना है कि सोमनाथ से जुड़े ऐतिहासिक पलों ने समय-समय पर भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को प्रभावित किया है और आज की राजनीति में भी इसकी गूंज साफ सुनाई दे रही है.
राम मंदिर के आंदोलन की शुरुआत
भारत की पॉलिटिक्स को पिछले 20 सालों से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुरेश तिवारी के अनुसार, सोमनाथ से शुरू हुई लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई थी. इस यात्रा ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी पहली बार राजनीतिक चर्चाओं में आया था. दिसंबर 1989 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पहली बार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को शामिल किया. इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ा. साल 1989 में पार्टी 85 सीटें जीतने में सफल रही थी.
उस दौर में बीजेपी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनाया. साल 1991 में जब लाल कृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू की, तब गुजरात चरण की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी को सौंपी गई थी. करीब 35 साल बाद, आज देश में बीजेपी की सरकार है और उसी सोमनाथ में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन हो रहा है, जिसे कई एक्सपर्ट ऐतिहासिक निरंतरता और राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं.
आगामी चुनाव और सोमनाथ का संदेश
इस आयोजन को गुजरात के साथ बाकी 4 राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. सुरेश तिवारी बताते हैं कि "सोमनाथ हिंदू धर्म का एक बहुत बड़ा केंद्र है और मुस्लिम आक्रमणकारियों के हमलों के बारे में बताने के लिए यह आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है. इसके अलावा 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं और यह पूरा मुद्दा बीजेपी की रणनीति के लिए बहुत उपयुक्त है."
सोमनाथ से बांग्लादेश को चेतावनी!
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पहले वहां की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर भारत विरोधी माहौल बनाकर राजनीतिक लाभ उठाने के आरोप लगाए जा रहे हैं. आरोप है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों और अत्याचारों की अनदेखी करते हुए यूनुस और कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने भारत के सनातन और हिंदुत्व की ताकत को कम करके आंका है. इन हिंदू विरोधी ताकतों के लिए सोमनाथ से प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को बांग्लादेश के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.