ठंड, गरीबी और उम्र हारी लेकिन प्यार नहीं; पत्नी के इलाज के लिए 70 साल के बाबू लोहार ने किया 600 KM का सफर

70 वर्षीय बाबू लोहार ने अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए जो किया, वह इंसानियत और प्रेम की मिसाल बन गया है.;

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(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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ओडिशा के संबलपुर जिले के 70 वर्षीय बाबू लोहार ने अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए जो किया, वह इंसानियत और प्रेम की मिसाल बन गया है. बाबू ने अपनी लकवाग्रस्त पत्नी ज्योति को ठेला-रिक्शा पर बैठाकर संबलपुर से कटक तक करीब 300 किलोमीटर का सफर पैडल मारते हुए पूरा किया और अब उसी ठेले पर पत्नी को लेकर घर लौट रहे हैं.

यह सिर्फ इलाज के लिए किया गया सफर नहीं, बल्कि उस अटूट प्रेम की कहानी है, जो उम्र, गरीबी और हालात से बड़ा होता है. बाबू लोहार की यह यात्रा आज हर किसी के दिल को छू रही है और सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है.

लकवा मारने के बाद शुरू हुआ संघर्ष

बाबू लोहार की पत्नी ज्योति को पिछले साल नवंबर में लकवा मार गया था. संबलपुर के मोडीपाड़ा गांव में रहने वाले इस बुजुर्ग दंपति के पास इलाज के सीमित साधन थे. स्थानीय डॉक्टरों ने ज्योति की हालत को देखते हुए उन्हें कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल रेफर कर दिया. लेकिन समस्या यह थी कि बाबू के पास न एंबुलेंस के पैसे थे, न किसी अन्य वाहन का इंतजाम। ऐसे में उन्होंने अपनी रोजी-रोटी का सहारा बने ठेला-रिक्शा को ही पत्नी की जिंदगी बचाने का साधन बना लिया.

ठेले पर गद्दा, जुबां पर भगवान का नाम

बाबू लोहार ने अपने ठेले पर पुराने गद्दे बिछाए, पत्नी को लिटाया और भगवान का नाम जपते हुए कटक की ओर निकल पड़े. वह रोज करीब 30 किलोमीटर का सफर तय करते और रात में सड़क किनारे दुकानों या सुरक्षित जगहों पर रुक जाते. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बाबू लोहार कहते हैं ‘मेरी जिंदगी में दो ही प्यार हैं. एक मेरी पत्नी, जिसे मैं सुरक्षित घर ले जा रहा हूं और दूसरा मेरा ठेला. मैं दोनों को छोड़ नहीं सकता.’ कड़ाके की ठंड, बढ़ती उम्र और थकान कुछ भी उनके हौसले को तोड़ नहीं सका. करीब 9 दिनों की कठिन यात्रा के बाद वह कटक के अस्पताल पहुंचे.

2 महीने चला इलाज

कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ज्योति का इलाज करीब 2 महीने तक चला. इलाज पूरा होने के बाद 19 जनवरी को बाबू लोहार ने उसी ठेले पर पत्नी को बिठाकर घर लौटने का सफर शुरू किया. लेकिन किस्मत ने यहां भी उनकी परीक्षा ली. वापसी के दौरान कटक के टांगी इलाके में एक वाहन ओवरटेक करते समय ठेले से रगड़ खा गयाय इस हादसे में ज्योति ठेले से गिर पड़ीं और उनके सिर में चोट लग गई.

बाबू तुरंत पत्नी को पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां जख्म पर पट्टी की गई. अस्पताल प्रशासन ने उन्हें खाना दिया और ठंड से बचाने के लिए रात वहीं रुकने की व्यवस्था की. अगले दिन 20 जनवरी को वे फिर अपने सफर पर निकल पड़े.

पुलिस की मदद भी ठुकराई

रास्ते में पुलिस ने भी उनकी मदद करने की कोशिश की. टांगी थाने के एसएचओ *बिकाश सेठी ने उनके लिए वाहन की व्यवस्था कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन बाबू लोहार ने विनम्रता से मना कर दिया. बार-बार आग्रह करने पर उन्होंने सिर्फ खाने के लिए थोड़ी मदद स्वीकार की. बाबू की आवाज में भावुकता साफ झलकती है वह कहते हैं ‘मेरी ज्योति मेरी दुनिया है. जब तक सांस है, मैं उसे ठेले पर ही घर ले जाऊंगा.’

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