जमींदोज होने के बाद उठ नहीं पाया मुरीदके! ऑपरेशन सिंदूर के साइलेंट स्ट्राइक का लश्कर कमांडर ने दिया लाउड कन्फेशन | Video

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारतीय सेना ने मुरिदके स्थित लश्कर के मुख्यालय को पूरी तरह तबाह कर दिया. वायरल वीडियो में रऊफ ने कहा कि 6–7 मई 2025 की रात हुआ हमला इतना भीषण था कि अब उस जगह पर बैठना भी संभव नहीं है. यह बयान आतंकी ढांचे पर भारत की निर्णायक कार्रवाई की पुष्टि करता है.;

( Image Source:  X/OsintTV )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On :

भारत की सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पहली बार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के भीतर से खुली स्वीकारोक्ति सामने आई है. लश्कर के वरिष्ठ कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ ने सार्वजनिक मंच से माना कि भारतीय हमले ने मुरिदके स्थित संगठन के सबसे अहम ठिकाने को बुरी तरह तबाह कर दिया. यह वही परिसर है, जिसे लश्कर का नर्व सेंटर और मुख्यालय माना जाता था. रऊफ के बयान ने महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है.

एक वायरल वीडियो में हाफिज अब्दुल रऊफ यह स्वीकार करते दिख रहा है कि 6–7 मई 2025 की रात हुआ हमला बेहद भीषण था. उसने कहा कि जिस जगह को मस्जिद और धार्मिक परिसर बताया जाता था, वह अब पूरी तरह ढह चुका है. रऊफ के शब्दों में, “अब वहां बैठने तक की जगह नहीं बची, सब कुछ मलबे में बदल गया है.” यह बयान सीधे तौर पर भारत के सटीक और निर्णायक प्रहार की पुष्टि करता है.

कहां और किस मंच से बोला लश्कर कमांडर?

बताया जा रहा है कि रऊफ यह भाषण मुरिदके में आयोजित एक समारोह के दौरान दे रहा था, जहां भविष्य के लश्कर कमांडरों को संबोधित किया जा रहा था. उसी मंच से उसने यह भी कबूला कि हमले से ठीक पहले प्रशिक्षुओं को कैंप से बाहर निकाल लिया गया था. इस स्वीकारोक्ति से साफ होता है कि लश्कर को भारतीय कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा था, लेकिन तबाही की तीव्रता उम्मीद से कहीं ज्यादा निकली.

लश्कर की रणनीति पर गहरा वार

हाफिज अब्दुल रऊफ लश्कर का वही ऑपरेशनल कमांडर है, जो आतंकियों की ट्रेनिंग और उन्हें लॉन्च पैड्स तक भेजने की जिम्मेदारी संभालता रहा है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी गतिविधियों की योजना और क्रियान्वयन में उसकी भूमिका अहम मानी जाती है. ऐसे में उसके द्वारा मुरिदके के तबाह होने की बात स्वीकार करना, लश्कर की रणनीतिक क्षमता पर पड़े गहरे असर को दिखाता है.

पहले जनाज़ा, अब सच का इक़रार

ऑपरेशन सिंदूर के बाद रऊफ उन आतंकियों की जनाज़ा नमाज़ पढ़ाते हुए भी देखा गया था, जिनकी मौत इस कार्रवाई में हुई थी. उस समय तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे, लेकिन संगठन की ओर से नुकसान को कम करके दिखाने की कोशिश की गई. अब महीनों बाद, खुद उसी चेहरे का सामने आकर यह कहना कि सब कुछ उजड़ गया—लश्कर और पाकिस्तान के दावों की पोल खोल देता है.

चीनी हथियारों का जिक्र और बढ़ती बेचैनी

इससे पहले भी हाफिज रऊफ यह मान चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई झड़पों में पाकिस्तान और लश्कर ने चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया था. अब मुरिदके पर हमले की सच्चाई स्वीकार कर उसने बची-खुची ‘प्लॉज़िबल डिनायबिलिटी’ भी खत्म कर दी है. कुल मिलाकर, रऊफ का यह बयान सिर्फ एक कबूलनामा नहीं, बल्कि इस बात का सबूत है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी ढांचे की रीढ़ तोड़ दी है.

Similar News