बुरा फंसा Youtuber! फोन छिना, दायर हुआ 50 करोड़ मानहानि का मुकदमा, क्या है Mukesh Mohan vs Nitin Gadkari केस?
Youtuber Mukesh Mohan के खिलाफ 50 करोड़ मानहानि का केस दर्ज किया गया है. दरअसल उन्होंने बीफ कंपनी और केद्रीय मंत्री को लेकर एक वीडियो बनाया था. इस वीडियो का टाइटल “@gadkari.nitin is a cow killer?” था.
Mukesh Mohan Case: यूट्यूबर मुकेशन मोहन ने खुद को मुसीबत में फंसा दिया है. यूट्यूबर का कहना है कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने उनके खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है. नागपुर पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया गया है. हालांकि, इस केस को लेकर गडकरी के ऑफिस या खुद उनका कोई बयान नहीं आया है.
यह मामला उस समय सामने आया जब मोहन ने 'The Caravan' की एक रिपोर्ट के आधार पर एक शॉर्ट वीडियो अपने यूट्यूब अकाउंट से शेयर किया. इसके बाद नागपुर पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की, उन्हें थाने बुलाया और उनका फोन भी जब्त कर लिया गया.
वीडियो में क्या था, समझें पूरा केस?
मोहन ने 3 मार्च 2026 को 2 मिनट 27 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसका टाइटल था “@gadkari.nitin is a cow killer?”. यह वीडियो 'The Caravan' मैगज़ीन की 1 मार्च 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट “Nagpur’s Beef: The beef company enmeshed in Gadkari’s business empire” पर आधारित था. यह वीडियो अभी भी यूट्यूब पर उपलब्ध है.
रिपोर्ट में ये बताया गया कि लोनावला ग्रामीण पुलिस ने 28 टन बीफ ले जा रही एक गाड़ी पकड़ी थी. इस मामले में लोकल कोर्ट में एक केस फाइल किया गया. जो मांस पकड़ा गया, उसे भैंस का मांस बताया गया. उसकी अभी तक गाय का मांस होने की पुष्टि नहीं हुई है. जिस कंपनी ने एक्सप्लेनशन फाइल की उसका नाम Rembal Agro कंपनी है, जिसे डीपली लिंक Cian agro से बताया गया. जो गडकरी बिजनेस यूनिवर्स की कंपनी है. जो रेंबेल के इनवस्टर हैं वह सिएन में भी इनवेस्ट करते हैं. रिपोर्ट सवाल उठाया, कनेक्शन बनाने की कोशिश की गई. लेकिन कोई नितिन गडकरी से कोई आधिकारिक लिंक नहीं बताया गया. यानी कोई भी ऐसी जानकारी नहीं है जिससे साबित हो कि नितिन गडकरी कंपनी के ऑनर हैं. ऐस में मुकेश मोहन ने जो दावा किया वह कारवां मैगजीन में नहीं था.
तीन और कंटेंट क्रिएटर्स पर FIR ?
29 मार्च को मुकेशन मोहन ने दावा किया कि अधिकारियों ने औरंगाबाद, गुजरात और दिल्ली के तीन कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है. उन्होंने X पर लिखा कि इन तीनों ने योगिता ठाकरे नाम की एक लड़की के मामले पर वीडियो बनाए थे, जो कथित तौर पर नितिन गडकरी के बेटे की कार में पाई गई थी.
मोहन के मुताबिक, इन वीडियो में वही जानकारी थी जो पहले से सार्वजनिक डोमेन में मौजूद थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि औरंगाबाद के क्रिएटर को पूछताछ के लिए बुलाया गया और उसका फोन जब्त कर जांच के लिए भेजा गया, गुजरात का क्रिएटर जेल में है, जबकि दिल्ली का क्रिएटर अभी पेश नहीं हुआ है.
क्या परमानेंट हटाना पड़ेगा कंटेंट?
मोहन द्वारा X पर साझा किए गए एक दस्तावेज़ के स्क्रीनशॉट में यह भी मांग की गई है कि कथित मानहानिकारक कंटेंट को 24 घंटे के भीतर स्थायी रूप से हटाया जाए. इसमें सभी वर्जन, रीपोस्ट, शेयर, मिरर, स्क्रीनशॉट और अन्य प्लेटफॉर्म जैसे X, फेसबुक, यूट्यूब चैनल, वेबसाइट्स और ऐप्स शामिल हैं.
मोहन ने बताया कि वह दो दिन से नागपुर के पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रहे हैं. उनका एक फोन जब्त कर लिया गया है और दूसरे फोन को भी जमा करने के लिए कहा गया है. उन्होंने X पर लिखा, “तो अभिव्यक्ति की आजादी कहां है? वह शांति से आराम कर रही है.”
क्या है घटना की पूरी टाइमलाइन?
इस मामले का पहला सार्वजनिक जिक्र 6 मार्च को हुआ, जब मोहन ने X पर लिखा कि उन्हें 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस मिला है, हालांकि उस पोस्ट में गडकरी का नाम नहीं था. इसके बाद 26 मार्च को उन्होंने फिर पोस्ट कर बताया कि उन्हें 50 करोड़ का नोटिस मिला है और नागपुर पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
मोहन ने इससे पहले यह भी दावा किया था कि गडकरी की पब्लिक रिलेशन (PR) टीम ने उन्हें एथेनॉल विवाद पर समर्थन में वीडियो बनाने के लिए ईमेल किया था. उन्होंने 27 फरवरी को लिखा कि उन्होंने समर्थन में वीडियो बनाने के बजाय विरोध में वीडियो बनाया.
इस वीडियो को उन्होंने 2.5 से 3 करोड़ व्यूज़ मिलने का दावा किया. 27 मार्च को उन्होंने लिखा कि उनके पास PR टीम का ईमेल मौजूद होने के कारण उस वीडियो पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी, इसलिए “मौका तलाशा जा रहा था.”
संजय सिंह मुकेश मोहन पर क्या बोले?
मुकेश मोहन को लेकर राज्यसभा मेंबर संजय सिंह ने भी सदन में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सरकार काम यूट्यूबर और न्यूज वालों को पकड़ना है. राजीव निगम का अकाउंट बंद करना है, मुकेश मोहन के खिलाफ केस दायर करना है. आपको अपने विरोधियों का गला घोटने के अलावा कोई काम नहीं है. आपको चंद पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना है, देश की जनता भाड़ में जाए.