Explainer: क्या कैबिनेट में होगा फेरबदल, PM मोदी की राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के बाद पंजाब से लेकर बंगाल तक क्यों मच गई हलचल?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद केंद्र सरकार में संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बदलाव के पीछे दल-बदल कर NDA में आए नेताओं को जगह देने, पंजाब की राजनीति मजबूत करने और संसद में दो-तिहाई बहुमत के समीकरण जैसे बड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
(Image Source: ANI )प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है. इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद इस्तीफा दे दिया था. कुरियन केंद्र में अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री थे. BJP ने उन्हें 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था. उनका कार्यकाल 21 जून को खत्म हो गया.
कुरियन के अलावा, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किए गए थे. हालांकि बिट्टू ने अभी औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया है. नियमों के अनुसार कोई व्यक्ति सांसद बने बिना छह महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन उसके बाद दोबारा संसद का सदस्य बनना जरूरी होगा. अब बिट्टू ने संकेत दिया है कि वह पंजाब की राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि वह पंजाब की सेवा करना चाहते हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं. माना जा रहा है कि उन्हें लुधियाना सेंट्रल विधानसभा सीट से मैदान में उतारा जा सकता है.
कैबिनेट में 'एक व्यक्ति, एक पद' का होगा असर?
BJP में एक परंपरा रही है कि संगठन और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी रखने वाले नेताओं को दोनों पदों पर लंबे समय तक नहीं रखा जाता. इसी नियम के चलते दो और मंत्रियों पर असर पड़ सकता है. दिल्ली BJP अध्यक्ष बनाए गए हर्ष मल्होत्रा केंद्र में सड़क परिवहन और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं. वहीं उत्तर प्रदेश BJP अध्यक्ष बने पंकज चौधरी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं. पार्टी की परंपरा के मुताबिक उन्हें संगठन की जिम्मेदारी के चलते मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है.
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक 24 जून को होने वाली है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि फेरबदल की घोषणा तुरंत होगी या चरणों में बदलाव किए जाएंगे. मोदी सरकार अक्सर बड़े फैसले अचानक लेने के लिए जानी जाती है, इसलिए अभी कई नाम केवल चर्चा में हैं.
कैबिनेट फेरबदल के पीछे 3 बड़े राजनीतिक समीकरण
1. दलबदल करके NDA में आए नेताओं को जगह
- हाल के दिनों में कई विपक्षी नेता NDA के साथ आए हैं. माना जा रहा है कि इनमें से कुछ चेहरों को सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है.
- सबसे ज्यादा चर्चा आम आदमी पार्टी (AAP) से आए नेताओं की है. अप्रैल में AAP के सात राज्यसभा सांसद BJP के साथ आए थे. इनमें राघव चड्ढा, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल जैसे नाम शामिल हैं.
- राघव चड्ढा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. वह पंजाब में AAP की 2022 चुनावी जीत के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहे हैं. BJP में आने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की है.
- इसके अलावा पश्चिम बंगाल में TMC के कई सांसदों के NDA समर्थक रुख अपनाने की चर्चा है. TMC में हुए बड़े राजनीतिक विभाजन के बाद कुछ नेताओं के नाम संभावित मंत्री पद के लिए सामने आ रहे हैं.
- वहीं उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) से अलग होकर NDA समर्थक शिवसेना में जाने वाले सांसद भी राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं.
2. परिसीमन और दो-तिहाई बहुमत का गणित
- कैबिनेट बदलाव के पीछे एक बड़ा कारण संसद में संख्या बल भी माना जा रहा है. केंद्र सरकार भविष्य में परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है.
- परिसीमन का मतलब है लोकसभा सीटों की संख्या और क्षेत्रों की सीमाओं का नया निर्धारण. 2023 में महिला आरक्षण कानून पास हुआ था, जिसे लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी माना जा रहा है.
- प्रस्तावित परिसीमन में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक किए जाने की चर्चा रही है... लेकिन संविधान संशोधन के लिए संसद में विशेष बहुमत यानी दो-तिहाई संख्या की जरूरत पड़ती है. अप्रैल में इससे जुड़े प्रयास सफल नहीं हो पाए क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी. हाल के दल-बदल से NDA की संख्या बढ़ी है और माना जा रहा है कि सरकार इस दिशा में अपना गणित मजबूत कर रही है.
3. पंजाब में BJP की पकड़ मजबूत करने की तैयारी
- पंजाब इस पूरे फेरबदल का एक बड़ा केंद्र माना जा रहा है. BJP लंबे समय तक पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन करके राजनीति करती रही थी, लेकिन अब पार्टी अकेले अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है.
- रवनीत सिंह बिट्टू के हटने से पंजाब से केंद्र में प्रतिनिधित्व का सवाल भी उठ रहा है. BJP अब पंजाब में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है.
- पार्टी ने पहले ही जाट सिख चेहरे के तौर पर कवन सिंह ढिल्लों को पंजाब BJP की कमान दी है. अब माना जा रहा है कि हिंदू चेहरों को भी आगे बढ़ाया जा सकता है. राघव चड्ढा का नाम इसी समीकरण में चर्चा में है. इसके अलावा सुनील जाखड़ और तरुण चुग जैसे नेताओं के नाम भी संभावित चेहरों में शामिल हैं.
पंजाब में बढ़ी राजनीतिक हलचल
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पंजाब का दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली वापसी की. इसी दौरान राघव चड्ढा भी पंजाब से दिल्ली लौटे. लुधियाना में एक कार्यक्रम के दौरान चड्ढा पहली बार BJP के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ सार्वजनिक मंच पर नजर आए. इसके बाद उनके भविष्य की भूमिका को लेकर अटकलें और तेज हो गईं. हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. अंतिम फैसला प्रधानमंत्री मोदी और BJP नेतृत्व के स्तर पर होगा.