Panchkula to Anantapur, पंचकूला में 3 साल की तो अनंतपुर में 15 साल की बच्ची पर क्रूरता का कहर, ईंट के बाद आरी से हुआ हमला
पंचकूला में 6 साल की बच्ची पर पत्थर और गमले से हमला हुआ, वहीं अनंतपुर में 10वीं की छात्रा पर चेनसॉ से वार किया गया. दोनों घटनाओं ने स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल उठाए.
स्कूल... जहां बच्चे किताबों के बीच अपना भविष्य तलाशते हैं, जहां माता-पिता उन्हें सुरक्षित समझकर छोड़ जाते हैं. लेकिन जब इसी जगह से बच्चों की चीखें सुनाई देने लगें, क्लासरूम खून से सन जाएं और मासूमों की जान पर बन आए, तो सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, पूरे स्कूल सिस्टम की सुरक्षा का खड़ा होता है. आंध्र प्रदेश के अनंतपुर और हरियाणा के पंचकूला से सामने आई दो घटनाओं ने इसी डर को और गहरा कर दिया है. एक जगह 10वीं की छात्रा पर क्लासरूम में चेनसॉ से हमला किया गया, तो दूसरी जगह छह साल की बच्ची स्कूल परिसर में गंभीर रूप से घायल मिली. आइए दोनों प्रदेश की घटनाओं पर एक नजर डालते हैं...
अनंतपुर: क्लास चल रही थी, तभी चेनसॉ लेकर क्लासरूम में घुसा हमलावर
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के राप्ताडु स्थित जिला परिषद स्कूल में शुक्रवार को उस वक्त दहशत फैल गई, जब एक युवक कथित तौर पर मशीन से चलने वाली चेनसॉ लेकर क्लासरूम में घुस गया. उस समय कक्षा 10 की छात्राएं पढ़ाई कर रही थीं और शिक्षक भी स्कूल में मौजूद थे. आरोप है कि युवक ने एक 15 वर्षीय छात्रा पर हमला कर दिया. उसे बचाने के लिए आगे आई दूसरी छात्रा भी गंभीर रूप से घायल हो गई. हमले में पहली छात्रा के गले और पेट पर गहरे घाव आए. उसका दाहिना हाथ भी बुरी तरह जख्मी हुआ.
दोनों छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. शुरुआती खबरों में उनकी हालत गंभीर बताई गई थी. पुलिस के मुताबिक, आरोपी घायल छात्राओं में से एक का रिश्तेदार बताया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी युवक की पहचान हेमंत के रूप में हुई है और वह पीड़िता का दूर का रिश्तेदार बताया जा रहा है, जिसने प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने के कारण क्लासरूम में घुसकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.
स्कूल में मरम्मत का काम, इसी बहाने अंदर पहुंचा आरोपी?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि स्कूल में मरम्मत का काम चल रहा था. इसी वजह से आरोपी को कुछ शिक्षकों और सुरक्षा कर्मचारियों ने मजदूर समझकर परिसर में प्रवेश करने दिया. वह चेनसॉ लेकर क्लासरूम तक कैसे पहुंचा और किसी ने उसे रोका क्यों नहीं, यह जांच का अहम सवाल है. हमले के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई. बच्चे और शिक्षक घबराकर इधर-उधर भागने लगे. कुछ छात्र इस घटना को देखकर बेहोश हो गए या रोने लगे. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटना की निंदा करते हुए घायल छात्राओं को बेहतर इलाज देने और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए.
पंचकूला: छह साल की बच्ची को स्कूल की पहली मंजिल पर ले गया छात्र
दूसरी घटना हरियाणा के पंचकूला की है. यहां एक सरकारी स्कूल में छह साल की बच्ची गंभीर रूप से घायल हालत में मिली. परिवार का आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने बच्ची को यह कहकर पहली मंजिल पर बुलाया कि उसके पिता उसे बुला रहे हैं. आरोप है कि वहां पत्थर और फूलों के गमले से उस पर हमला किया गया. परिजनों के मुताबिक, बच्ची को काफी दूर तक घसीटा भी गया और वह स्कूल परिसर में बेहोशी की हालत में पड़ी मिली. उसे पहले पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल ले जाया गया. हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे चंडीगढ़ के PGIMER रेफर कर दिया. बच्ची की हालत नाजुक बताई गई.
परिवार का सवाल: स्कूल में कैमरे और स्टाफ थे, फिर किसी को पता क्यों नहीं चला?
बच्ची के परिवार ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि स्कूल में CCTV कैमरे लगे थे और उनकी निगरानी प्रिंसिपल के कार्यालय से होती थी. इसके बावजूद बच्ची के साथ हुई घटना समय रहते किसी की नजर में क्यों नहीं आई? परिवार का यह भी आरोप है कि जब वे बच्ची को तलाश रहे थे, तो उसी छात्र ने उन्हें उस जगह तक पहुंचाया जहां बच्ची घायल पड़ी थी. बच्ची के परिजनों ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए, क्योंकि माता-पिता अपने बच्चों को भरोसे के साथ पढ़ने भेजते हैं.
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
अनंतपुर और पंचकूला की घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं और दोनों मामलों की जांच अपने-अपने स्तर पर जारी है. लेकिन दोनों ने स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अनंतपुर में हथियार लेकर एक बाहरी व्यक्ति का क्लासरूम तक पहुंच जाना और पंचकूला में स्कूल परिसर के भीतर बच्ची का गंभीर रूप से घायल मिलना बताता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी या CCTV कैमरों तक सीमित नहीं हो सकती.
स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश की जांच, आगंतुकों का रिकॉर्ड, मरम्मत के काम के दौरान निगरानी, क्लासरूम और खाली हिस्सों की सुरक्षा तथा किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने की व्यवस्था जरूरी है. आखिर माता-पिता बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं कि वहां वे सुरक्षित माहौल में सीख सकें, न कि इस डर के साथ कि छुट्टी के बाद उनका बच्चा सही-सलामत घर लौटेगा या नहीं.