पांच साल से क्यों अटकी जनरल नरवणे की किताब? RTI से खुलासा- 35 में अकेली Four Stars of Destiny पेंडिंग

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा Four Stars of Destiny पांच साल बाद भी रक्षा मंत्रालय से मंजूरी नहीं पा सकी है. RTI दस्तावेजों के मुताबिक, 35 किताबों में यह इकलौती किताब है जो अब भी पेंडिंग है.;

MM Naravane 

(Image Source:  @iamsatyam01- X )
By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 7 Feb 2026 8:15 AM IST

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा Four Stars of Destiny एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक बहस के केंद्र में है. विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सरकार की आलोचना में इस किताब का हवाला दिए जाने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर पांच साल बाद भी यह किताब रक्षा मंत्रालय (MoD) से मंजूरी क्यों नहीं पा सकी?

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों की दर्जनों किताबों को रक्षा मंत्रालय से हरी झंडी मिल चुकी है, लेकिन जनरल नरवणे की आत्मकथा अब भी 'पेंडिंग' बनी हुई है. सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेज बताते हैं कि यह मामला मंत्रालय के रिकॉर्ड में एक अपवाद बन चुका है.

RTI से खुलासा: 35 में सिर्फ नरवणे की किताब अधर में

जनवरी 2024 में द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दाखिल RTI के जवाब में, 17 सितंबर 2024 को रक्षा मंत्रालय की सेना शाखा ने बताया कि 2020 के बाद से कुल 35 किताबें मंजूरी के लिए भेजी गईं. इनमें से सिर्फ तीन किताबें ऐसी थीं जिन्हें अब तक क्लियरेंस नहीं मिला. इन तीन में एक नाम जनरल एमएम नरवणे की Four Stars of Destiny का है. इस किताब की समीक्षा प्रक्रिया की जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस ने पहली बार 5 जनवरी 2024 को प्रकाशित की थी.

मंत्रालय और पब्लिशर की चुप्पी

इस पूरे मामले पर न तो रक्षा मंत्रालय और न ही किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस की ओर से मौजूदा स्थिति पर कोई जवाब दिया गया है. इससे यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि आखिर देरी की असल वजह क्या है.

RTI में क्या-क्या सामने आया?

RTI के मुताबिक, ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित (सेवानिवृत्त) की किताब Leadership Beyond Barracks को “under process” बताया गया था. वहीं दो अन्य पांडुलिपियां रक्षा मंत्रालय को फॉरवर्ड की गई थीं-

  • Four Stars of Destiny - जनरल एमएम नरवणे
  • Alone in the Ring - जनरल एनसी विज (सेवानिवृत्त)

जनरल एनसी विज की किताब रिलीज, नरवणे अकेले बचे

जनरल एनसी विज, जो करगिल युद्ध के दौरान DGMO और सेना प्रमुख रह चुके हैं, उनकी किताब Alone in the Ring मई 2025 में रिलीज हो चुकी है. वहीं ब्रिगेडियर राजपुरोहित की किताब को भी मंजूरी मिल चुकी है और लेखक के मुताबिक वह “प्रकाशन की प्रतीक्षा” में है. इस तरह पांच साल बाद भी सिर्फ जनरल नरवणे की आत्मकथा ही ऐसी किताब है, जो अब तक मंजूरी के इंतजार में फंसी हुई है.

वित्त मंत्री का बयान: 'सरकार को पूरा सम्मान'

गुरुवार को द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार को पूर्व सेना प्रमुख के प्रति “पूरा सम्मान” है. उन्होंने आरोप लगाया कि जनरल नरवणे को लेकर “मजाक उड़ाने की कोशिश विपक्ष कर रहा है.” रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों की किताबों में तेज़ी से बढ़ोतरी, RTI डेटा से यह भी साफ होता है कि रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों की ओर से किताबें प्रकाशित कराने के अनुरोधों में बीते वर्षों में तेज़ उछाल आया है.

2020: सिर्फ 1 पांडुलिपि

2021: कोई नहीं

2022: 4 पांडुलिपियां

2023: 16 पांडुलिपियां (जिसमें नरवणे की किताब भी शामिल)

2024 (सितंबर तक): 14 पांडुलिपियां

किन-किन अधिकारियों की किताबों को मिली मंजूरी?

हाल के वर्षों में जिन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की किताबों को रक्षा मंत्रालय से क्लियरेंस मिल चुका है, उनमें शामिल हैं- लेफ्टिनेंट जनरल एसए हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल एसके गडॉक, लेफ्टिनेंट जनरल एसआरआर अय्यंगार, मेजर जनरल (डॉ.) अशोक कुमार, मेजर जनरल शशिकांत पित्रे, मेजर जनरल आरके शर्मा, मेजर जनरल जीडी बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी.

LAC तनाव और नरवणे की किताब का संवेदनशील संदर्भ

जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे. इसी दौरान चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव चरम पर पहुंच गया था. PTI द्वारा दिसंबर 2023 में प्रकाशित अंशों में जनरल नरवणे ने 31 अगस्त 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हुई बातचीत का जिक्र किया है.

वह लिखते हैं कि पूर्वी लद्दाख के रेचिन ला इलाके की ओर चीनी टैंकों की बढ़त के बीच उन्हें एक “hot potato” सौंपा गया- यानी ऐसा फैसला, जिसके परिणाम दूरगामी हो सकते थे. इसके बाद अगस्त 2020 से जनवरी 2021 तक LAC पर तनाव बना रहा और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत चलती रही.

सवाल अब भी कायम

पांच साल बाद भी यह सवाल अनुत्तरित है कि जब दर्जनों किताबों को मंजूरी मिल चुकी है, तो जनरल नरवणे की आत्मकथा अब तक क्यों अटकी हुई है. RTI से सामने आए तथ्य इस मामले को और रहस्यमय बना रहे हैं.

Similar News