वोट डाले बिना जीत! महाराष्ट्र में महायुति ने 68 लोकल बॉडी की सीटों पर कैसे मार ली बाजी, समझिए स्ट्रेटजी

महाराष्ट्र की स्थानीय निकाय राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है. महायुति ने बिना चुनाव लड़े ही 68 सीटें जीत ली. 68 सीटों की यह जीत सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि राजनीतिक मनोवैज्ञानिक बढ़त है. बिना वोट के जीत ने विपक्ष की कमजोरी उजागर कर दी है.यह कैसे संभव हुआ, विपक्ष क्यों चूका और इसका 2026 की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा. जानें पूरी कहानी.;

( Image Source:  ANI )
Edited By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 3 Jan 2026 11:07 AM IST

महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे विपक्ष लोकतंत्र की हार बता रहा है और सत्ता पक्ष राजनीतिक जीत. स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति (बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी गुट) ने बिना एक भी वोट पड़े ही 68 सीटों पर जीत दर्ज कर ली. यह सवाल अब हर जगह गूंज रहा है. चुनाव हुए ही नहीं, फिर जीत कैसे?

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अहम सवाल यह है कि क्या विपक्ष ने मैदान छोड़ दिया? या फिर यह 2026 के बड़े चुनावों का ट्रेलर है? बिना चुनाव लड़े जीत कैसे मिली?

दरअसल, इन 68 सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं. विपक्ष की ओर से कोई नामांकन दाखिल ही नहीं हुआ. चुनाव आयोग को मतदान कराने की जरूरत ही नहीं पड़ी. कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब किसी सीट पर सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है, तो उसे स्वतः विजेता घोषित कर दिया जाता है.

महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के अहम चुनावों में महायुति गठबंधन की तीन प्रमुख सत्तारूढ़ पार्टियों के 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं. मालेगांव में इस्लाम पार्टी का एक उम्मीदवार भी निर्विरोध निर्वाचित होने के करीब है. अगर ऐसा हुआ तो निर्विरोध जीतने वालों की कुल संख्या 69 हो सकती है. नगर निगमों की 2,869 सीटों पर चुनाव हो रहा है. इनमें 44 बीजेपी उम्मीदवार, 22 शिवसेना उम्मीदवार, 2 एनसीपी उम्मीदवार और मालेगांव में इस्लाम पार्टी का 1 उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं.यानी इनके खिलाफ कोई प्रतिद्वंद्वी मैदान में नहीं है.

विपक्ष मैदान से बाहर क्यों हुआ?

महाराष्ट्र के सियासी जानकारों का कहना है कि इसके कई कारण हैं. कांग्रेस और उद्धव गुट जमीन पर उम्मीदवार खड़ा नहीं कर सके. आखिरी समय तक नाम तय नहीं हो पाए. कई सीटों पर हार तय मानकर विपक्ष ने मुकाबला ही नहीं किया.

महायुति की रणनीति क्या थी?

वहीं, महायुति ने पहले ही स्थानीय स्तर पर समीकरण साध लिए थे. प्रभावशाली नेताओं और स्थानीय गुटों को साथ जोड़ लिया था. विपक्ष के संभावित उम्मीदवारों को मैनेज या न्यूट्रलाइज कर दिया. यही वजह है कि 68 सीटों पर मुकाबले की नौबत ही नहीं आई.

लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश - प्रियंका चतुर्वेदी

शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों की 'धमकियों' या विपक्षी उम्मीदवारों को 'रिश्वत' देकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है. उद्धव सेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मुंबई में पत्रकारों से कहा, "यह लोकतंत्र को खत्म करने का एक बिना रोक-टोक वाला तरीका है, जिसमें वे विपक्षी उम्मीदवारों को ED, CBI की धमकियों से डराकर या रिश्वत देकर समझौता कर लेते हैं. वे अपनी जीत खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और यह शर्म की बात है कि चुनाव आयोग इस पर चुप है."

29 नगर निगमों के लिए मतदान 15 जनवरी को

महाराष्ट्र की 29 नगर पालिकाओं, जिसमें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) भी शामिल है, के चुनाव 15 जनवरी को होंगे, और वोटों की गिनती अगले दिन होगी.

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