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शर्मनाक! गांव में सड़क न होने पर प्रसव पीड़ा में मीलों पैदल चली गर्भवती, अस्पताल पहुंचते ही चली गई जच्चा-बच्चा की जान

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तालुका में स्थित आलदंडी टोला गांव में सड़क न होने से एक गर्भवती महिला की मौत हो गई. उसके बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका मां के पेट में दम तोड़ दिया। वजह सिर्फ यह थी गांव न तो सड़क थी अन्य सुविधाएं। मृतिक को मीलों प्रसव पीड़ा में पैदल चलना पड़ा जिससे उसकी हालत इतनी खराब हो गई उसे बचाया नहीं जा सका.

शर्मनाक! गांव में सड़क न होने पर प्रसव पीड़ा में मीलों पैदल चली गर्भवती, अस्पताल पहुंचते ही चली गई जच्चा-बच्चा की जान
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( Image Source:  Create By Grok AI )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Updated on: 3 Jan 2026 8:49 AM IST

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक बहुत ही दुखद और दिल दहला देने वाली घटना हुई है. यहां के एक दूरदराज के गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने और प्रसव के लिए कोई अस्पताल या चिकित्सा केंद्र न होने की वजह से एक युवा गर्भवती महिला की जान चली गई. साथ ही गर्भ में पल रहा उनका बच्चा भी नहीं बचा. यह महिला का नाम आशा संतोष किरंगा था. उनकी उम्र सिर्फ 24 साल थी.

वे आशा कार्यकर्ता भी थीं और नौ महीने की गर्भवती थी. वे एटापल्ली तालुका के आलदंडी टोला गांव में रहती थी. यह गांव मुख्य सड़क से पूरी तरह कटा हुआ है. यहां से निकलने के लिए जंगल के रास्ते ही हैं और कोई पक्की सड़क नहीं है. गांव में प्रसव कराने की कोई मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध नहीं है.

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कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा

एक जनवरी को आशा को लगा कि अब प्रसव का समय नजदीक आ गया है. बेहतर इलाज और सहायता की उम्मीद में वे अपने पति के साथ घर से निकली. उन्हें अपनी बहन के घर पेठा जाना था, जहां शायद कुछ मदद मिल सके. लेकिन वहां पहुंचने के लिए उन्हें घने जंगल के कठिन रास्तों से पैदल चलना पड़ा. पूरी छह किलोमीटर की दूरी उन्होंने पैदल तय की. नौ महीने की गर्भवती होने के बावजूद इतनी लंबी और मुश्किल यात्रा करना उनके लिए बहुत जोखिम भरा था.

जच्चा-बच्चा की मौत

अगले दिन यानी दो जनवरी की सुबह आशा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिवार वालों ने जल्दी से एम्बुलेंस बुलाई और उन्हें हेदरी के काली अम्माल अस्पताल में ले जाया गया. डॉक्टरों ने देखा कि स्थिति बहुत गंभीर है. गर्भ में बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी. डॉक्टरों ने सीजेरियन ऑपरेशन करने का फैसला किया, ताकि कम से कम मां को बचाया जा सके. लेकिन अफसोस, बहुत देर हो चुकी थी. आशा का ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ गया था और कुछ समय बाद उनकी भी मौत हो गई.

मौत की वजह मीलों पैदल चलना

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस दुखद हादसे की मुख्य वजह वह लंबी पैदल यात्रा थी. इतनी मेहनत और थकान से शरीर पर बहुत जोर पड़ा, जिससे जटिलताएं पैदा हो गईं. इस इलाके के गांव बहुत दुर्गम हैं. यहां के लोग जब भी कोई आपातकालीन स्थिति आती है, तो इसी तरह की खतरनाक यात्राएं करने को मजबूर होते हैं. सड़क न होने और नजदीकी अस्पताल की कमी की वजह से कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है. हमारे देश के कुछ दूरदराज के इलाकों में बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, अस्पताल और एम्बुलेंस कितनी जरूरी हैं. अगर समय पर मदद मिल जाती, तो शायद आशा और उनका बच्चा दोनों बच जाते. इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए सरकार और प्रशासन को ऐसे गांवों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

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