करते थे बैड टच... नाजुक हालत में हिमाचल की 19 साल की छात्रा का मौत से पहले का Video Viral, रोकर सुनाई आपबीती
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक छात्रा की मौत की नहीं, बल्कि उस डर, अपमान और टूटे हुए भरोसे की है, जिसे वह आख़िरी सांस तक अपने भीतर समेटे रही. 19 साल की यह छात्रा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया उसका एक वीडियो आज भी लोगों की रूह कंपा रहा है. कमजोर आवाज़, बीमार शरीर और आंखों में साफ झलकता डर-उस वीडियो में उसने वो सब बताया, जो शायद किसी से कहने की हिम्मत वह ज़िंदा रहते नहीं जुटा पाई.
हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से सामने आया यह मामला हर किसी को झकझोर देने वाला है. 19 साल की एक छात्रा की रैगिंग और यौन उत्पीड़न के कारण मौत हो गई. अब बच्ची से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह गंभीर हालत में बिस्तर लेटे हुए अपने साथ हुई आपबीती सुनाई. कांपती आवाज़ और कमजोर शरीर के साथ छात्रा ने आरोप लगाया कि सर उसे गलत तरीके से छूते थे और उसे लगातार परेशान किया गया.
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यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने न सिर्फ एक परिवार का दर्द उजागर किया, बल्कि कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
गलत तरीके से छूते थे सर
वीडियो में छात्रा बेहद कमजोर हालत में बिस्तर पर लेटी हुई नजर आ रही है. जहां उसके मुंह पर सांस लेने की पाइप लगी है और उसके साथ एक महिला बैठी हैं. इस दौरान बच्ची अपने साथ हुई सारी घटना बताती है. वह अशोक सर का नाम लेते हुए कहती है कि वह अजीब-अजीब हरकतें करते थे… पीछे पड़ जाते थे.” इसके बाद वह इशारों में बताती है कि प्रोफेसर उसे गलत तरीके से छूता था.
क्या है मामला?
परिवार के मुताबिक, कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रा को सीनियर स्टूडेंट्स की रैगिंग का भी सामना करना पड़ा. पिता का आरोप है कि तीन सीनियर छात्राओं हर्षिता, आकृति और कोमोलिका ने उसके साथ मारपीट की. इस लगातार हो रहे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न ने लड़की को अंदर से तोड़ दिया और वह धीरे-धीरे डिप्रेशन में जाने लगी.
बच्ची की हुई मौत
इस डिप्रेशन का असर बच्ची की सेहत पर होने लगा. हालत बिगड़ने पर उसे पहले हिमाचल के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. जब स्थिति और गंभीर हुई, तो उसे लुधियाना रेफर किया गया, जहां 26 दिसंबर 2025 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
आरोपों से इनकार, सवाल बरकरार
आरोपों में घिरे प्रोफेसर अशोक कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है. उनका कहना है कि छात्रा इस सेशन में उनकी स्टूडेंट नहीं थी और वे निर्दोष हैं. इतना ही नहीं, कुछ टीचर भी उनके सपोर्ट में सामने आए हैं. वहीं, कॉलेज प्रशासन का दावा है कि छात्रा ने कभी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी.
पढ़ाई, असफलता और टूटता हौसला
कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, छात्रा पहली साल की परीक्षा में कुछ सब्जेक्ट में फेल हो गई थी और नियमों के अनुसार उसे दोबारा फर्स्ट ईयर में दाखिला लेना था. इसी बात को लेकर वह मानसिक रूप से परेशान थी और जुलाई के बाद उसने कॉलेज आना बंद कर दिया था. अगस्त में उसका नाम कॉलेज से हटा दिया गया.
पुलिस ने की शिकायत दर्ज
पुलिस ने तीन छात्राओं के खिलाफ रैगिंग, मारपीट और धमकी से जुड़े मामलों में केस दर्ज किया है. जांच इस बात पर केंद्रित है कि रैगिंग, कथित यौन उत्पीड़न और मानसिक दबाव ने कैसे एक होनहार छात्रा की जिंदगी छीन ली.
यह कहानी सिर्फ एक मौत की नहीं, बल्कि सिस्टम, चुप्पी और डर की भी है. वह बच्ची अब बोल नहीं सकती, लेकिन उसका वीडियो आज भी पूछ रहा है कि अगर समय रहते उसकी बात सुनी जाती, तो क्या आज वह ज़िंदा होती?





