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गोभी मंचूरियन और तंदूरी चिकन पर बैन, गोवा के बोडगेश्वर जत्रा में नहीं ले पाएंगे इनका स्वाद, जानें क्यों

उत्तरी गोवा के मापुसा में हर साल लगने वाली बोडगेश्वर मंदिर की जत्रा सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि स्वाद और रौनक का भी बड़ा केंद्र मानी जाती है. दूर-दराज़ से आए श्रद्धालु पूजा के साथ-साथ मेले के चटपटे खानों का मजा लेते हैं. लेकिन इस बार जत्रा में खाने-पीने की तस्वीर कुछ अलग नजर आई, क्योंकि मंदिर समिति ने गोभी मंचूरियन और तंदूरी चिकन के स्टॉल पर रोक लगा दी है.

गोभी मंचूरियन और तंदूरी चिकन पर बैन, गोवा के बोडगेश्वर जत्रा में नहीं ले पाएंगे इनका स्वाद, जानें क्यों
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 3 Jan 2026 9:19 AM IST

गोवा के मापुसा में लगने वाली प्रसिद्ध बोडगेश्वर मंदिर जत्रा इस बार अपने खाने-पीने के अंदाज़ को लेकर चर्चा में है. हर साल श्रद्धालुओं की भीड़ और चटपटे स्ट्रीट फूड की खुशबू से गुलज़ार रहने वाला यह मेला इस बार कुछ अलग नज़र आ रहा है. गोभी मंचूरियन और तंदूरी चिकन जैसे टेस्टी खाने पर रोक लगा दी गई है, जिसके बाद मेले में आने वाले लोग इनका स्वाद नहीं ले पाएंगे.

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हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बैन लगा हो. पिछले साल भी जत्रा में कुछ खाने की चीजों पर रोक लगाई गई थी. आखिर मंदिर समिति ने ऐसा सख्त फैसला क्यों लिया और इसके पीछे क्या वजह है.

गोभी मंचूरियन और तंदूरी चिकन पर बैन

इस बार मंदिर समिति ने बड़ा कदम उठाते हुए गोभी मंचूरियन और तंदूरी चिकन बेचने वाले स्टॉलों को मंज़ूरी नहीं दी है. समिति के मुताबिक, पिछले कुछ सालों से लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि ये खाने की चीज़ें गंदे और असाफ हालात में तैयार की जाती हैं. ऐसे में इन्हें खाने से लोगों की सेहत खराब होने का खतरा बढ़ जाता है, इसी वजह से यह फैसला लिया गया.

इन चीजों पर नहीं लगी रोक

हालांकि, मेले में सभी नॉन-वेज या स्ट्रीट फूड पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाई गई है. जो स्थानीय दुकानदार पारंपरिक गोअन खाने जैसे चिकन ज़ाकूती और ऑमलेट पाव बेचते हैं, उन्हें स्टॉल लगाने की इजाज़त दी गई है. लेकिन इसके लिए जरूरी शर्त रखी गई है कि हर स्टॉल के पास FDA का वैध लाइसेंस और संबंधित विभागों से एनओसी होना चाहिए.

इस कारण से लगाया है बैन

मंदिर समिति का कहना है कि गोभी मंचूरियन जैसे खाने में अक्सर नकली रंग, अजीनोमोटो (MSG) और खराब क्वालिटी की सॉस मिलाई जाती है. इसी वजह से पिछले कुछ सालों में कई श्रद्धालुओं ने खाना खाने के बाद पेट खराब होने और खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की थीं.

पहले भी लग चुकी है रोक

यह पहली बार नहीं है जब इस मशहूर डिश को लेकर आपत्ति उठी हो. साल 2024 में मापुसा नगर परिषद ने बोडगेश्वर जत्रा के दौरान गोबी मंचूरियन की बिक्री पर सर्वसम्मति से रोक लगा दी थी. इससे पहले साल 2022 में राज्य के FDA ने दक्षिण गोवा के वास्को में श्री दामोदर मंदिर मेले के दौरान ऐसे स्टॉलों की संख्या कम करने के आदेश दिए थे.

परंपरा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन

बोडगेश्वर जत्रा में लिया गया यह फैसला एक साफ संदेश देता है कि मेले की रौनक जरूरी है, लेकिन श्रद्धालुओं की सेहत उससे कहीं ज्यादा जरूरी है. परंपरा, स्वाद और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए समिति ने यह दिखा दिया कि आस्था के उत्सव में भी जिम्मेदारी सबसे ऊपर रखी जा सकती है.

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