LPG संकट पर अब बदलेगा गेम! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मारो गोली, इस अफ्रीकी देश से फ्यूल लेगा भारत, होगा बड़ा फायदा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज़ संकट के बीच भारत अब ऊर्जा सप्लाई के नए विकल्प तलाश रहा है. ऐसे में अंगोला भारत के लिए LPG का एक अहम और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहा है. इस देश से ईंधन लेने पर भारत को काफी फायदा होने वाला है.

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Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 31 March 2026 2:37 PM IST

India Taking Fuel From Angola: ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है. इसी चुनौती को देखते हुए देश की सरकारी तेल कंपनियां- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और गेल अब नए देशों से LPG खरीदने के विकल्प तलाश रही हैं.

इस दिशा में अफ्रीकी देश अंगोला एक अहम विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है. पूरी दुनिया में ईंधन को लेकर भारी संकट है, ये संकट ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की वजह से पैदा हुआ है. हाल ही में पार्लियामेंट में पीएम मोदी ने इस बात को कहा था कि भारत दूसरे देशों से ईंधन लेने के विकल्प पर भी गौर कर रहा है.

क्या पहले भी होता रहा है अंगोला से व्यापार?

अंगोला पहले से ही भारत का ऊर्जा सहयोगी रहा है. यहां गैस का उत्पादन होता है और LPG के लिए जरूरी प्रोपेन व ब्यूटेन आसानी से उपलब्ध हैं. इसके अलावा, अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल के साथ समझौता करना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है, क्योंकि वहां ऊर्जा क्षेत्र पर सरकार का कंट्रोल है. यही वजह है कि भारत अब अंगोला के साथ लंबी अवधि की LPG सप्लाई डील की तैयारी कर रहा है.

भारत अंगोला से LPG क्यों खरीद रहा है?

भारत और अंगोला के बीच तेल और गैस के सेक्टर में पहले से व्यापारिक संबंध रहे हैं. इससे दोनों देशों के बीच भरोसा और सप्लाई सिस्टम पहले से ही बना हुआ है, जिससे नई डील करना आसान हो जाता है. सप्लाई के लिहाज से भी अंगोला एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि समुद्री रास्ते से गैस 12 से 18 दिनों में भारत पहुंच सकती है और वहां निर्यात की बेहतर सुविधाएं भी मौजूद हैं. इसके अलावा, अंगोला का ऊर्जा क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में है, जिससे आधिकारिक स्तर पर समझौता करना और भी आसान हो जाता है.

 

कीमतों के लिहाज से देखा जाए तो अगर सप्लाई सुचारू और नियमित बनी रहती है, तो घरेलू बाजार में LPG की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने की स्थिति में कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी बनी रहेगी. यानी कीमतों का रुख काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगा.

क्या और भी देशों से तेल खरीदने का हो रहा है विचार?

भारत सिर्फ अंगोला तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस आयात के विकल्प तलाश रहा है. इसका मकसद किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को ज्यादा सुरक्षित बनाना है.

कितनी एलपीजी सप्लाई खाड़ी देशों से आती है?

मौजूदा समय में भारत की लगभग 92% LPG सप्लाई खाड़ी देशों- यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से आती है. इन सभी देशों से आने वाली सप्लाई एक ही अहम रास्ते, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज होर्मुज से होकर गुजरती है. यह मार्ग बेहद संवेदनशील है और युद्ध या तनाव की स्थिति में जोखिम काफी बढ़ जाता है. ऐसे में अगर अंगोला के साथ डील होती है, तो जहाज अटलांटिक और अरब सागर के रास्ते सीधे भारत पहुंच सकते हैं, जिससे इस जोखिम में काफी कमी आएगी.

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