'सिर्फ व्यापार नहीं, भविष्य की रणनीति', पीयूष गोयल ने India US Trade Deal को बताया गेमचेंजर; किन उत्पादों पर घटेगा टैरिफ?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार डील केवल टैरिफ या बाज़ार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रक्षा, टेक्नोलॉजी और भू-राजनीतिक सहयोग को मज़बूत करती है. यह समझौता दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को संतुलित करता है.;

( Image Source:  ANI )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 8 Feb 2026 9:10 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच हुआ अंतरिम व्यापार समझौता सिर्फ टैरिफ घटाने या बाजार खोलने भर की कवायद नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच दोनों देशों की रणनीतिक नजदीकियों का बड़ा संकेत है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे साफ शब्दों में “सिर्फ ट्रेड नहीं, बल्कि लंबे समय की रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने वाला कदम” बताया है. रक्षा सहयोग, क्वाड साझेदारी, महत्वपूर्ण खनिज, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन के बीच यह डील एक व्यापक फ्रेमवर्क की तरह उभर रही है, जिसमें व्यापार माध्यम है और रणनीतिक तालमेल असली लक्ष्य. ऐसे समय में जब दुनिया संरक्षणवाद और टैरिफ वॉर की ओर बढ़ रही है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक भारत-अमेरिका समझौता एक संतुलित, पारस्परिक और दीर्घकालिक साझेदारी का मॉडल पेश करता दिख रहा है.

भारत-अमेरिका इंटरिम ट्रेड डील क्या है?

भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Framework) पर सहमति जताई है, जो 13 फरवरी 2025 को शुरू व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में अहम कदम है. यह सिर्फ टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक तालमेल का हिस्सा है.

पीयूष गोयल का बड़ा बयान: 'व्यापार जरिया है, रणनीति मंजिल'

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया कि यह समझौता महज कमर्शियल डील नहीं है. इसमें रक्षा साझेदारी, टेक्नोलॉजी सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और क्वाड सहयोग जैसे आयाम जुड़े हैं. उनके अनुसार, भारत और अमेरिका एक-दूसरे की अर्थव्यवस्थाओं के पूरक (Complementary) हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं.

किन उत्पादों पर घटेगा या खत्म होगा टैरिफ?

भारत की ओर से

भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ घटाएगा या समाप्त करेगा. इनमें शामिल हैं DDGS (Dry Distillers Grains), लाल ज्वार (Animal Feed), पेड़ के मेवे, ताजे व प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल हैं.

अमेरिका की ओर से

अमेरिका भारत से आयातित कई वस्तुओं पर 18% पारस्परिक टैरिफ लगाएगा. इनमें शामिल हैं, कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, ऑर्गेनिक रसायन, प्लास्टिक व रबर उत्पाद और हस्तशिल्प शामिल हैं. हालांकि, बाद के चरण में अमेरिका जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरे और विमान पुर्जों पर टैरिफ हटाने पर विचार करेगा.

DDGS और कृषि आयात क्यों महत्वपूर्ण?

DDGS जैसे उत्पादों को लेकर भारत में पहले भी किसान संगठनों ने चिंता जताई है. यह पशु आहार उद्योग से जुड़ा अहम घटक है. ऐसे में यह डील घरेलू कृषि और पशुपालन सेक्टर पर प्रभाव डाल सकती है.

क्या यह भारत की नई कूटनीतिक रणनीति है?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि भारत अब पश्चिमी देशों के लिए सिर्फ बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक हाई-टेक और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर रहा है. भारत ने जिन विकसित देशों से FTA किए हैं, वे सीधे प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं. अमेरिका भी इसी श्रेणी में आता है.

रक्षा और टेक्नोलॉजी में कैसे बदलेगा समीकरण?

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पहले से मजबूत है. दोनों देश क्वाड के सदस्य हैं. महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में साझेदारी आने वाले वर्षों में इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत कर सकती है.

क्या यह डील भू-राजनीतिक संतुलन की तरफ इशारा करती है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ संतुलन नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इंडो-पैसिफिक रणनीतिक संतुलन का हिस्सा है. भारत-अमेरिका संबंध अब “ट्रेड पार्टनर” से आगे 'स्ट्रेटेजिक एलाइनमेंट' की दिशा में बढ़ रहे हैं.

समझौता व्यापार से आगे की कहानी

भारत-अमेरिका इंटरिम ट्रेड डील 2025 सिर्फ आयात-निर्यात का फ्रेमवर्क नहीं है। यह रक्षा, टेक्नोलॉजी, खनिज सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति के बड़े समीकरण का हिस्सा है. जैसा कि पीयूष गोयल ने कहा, “व्यापार माध्यम है, लेकिन रणनीतिक साझेदारी असली लक्ष्य है.”

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