अमेरिका से दोस्ती, रूस से दूरी! ट्रेड डील ने बदली रणनीति, 'मेक इन इंडिया' को कमजोर किए बिना कैसे US इम्पोर्ट को करेंगे बैलेंस?

भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ, लेकिन क्या इससे भारत को वाकई फायदा होगा? पढ़िए पूरी एनालिसिस और FAQ.;

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Edited By :  नवनीत कुमार
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भारत और अमेरिका के बीच घोषित ट्रेड डील को लेकर सरकार का पहला बयान कई स्तरों पर अहम संकेत देता है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का यह दावा कि “किसी भी सेक्टर के हितों से समझौता नहीं हुआ”, दरअसल उस आशंका को सीधे संबोधित करता है, जो कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर लंबे समय से जताई जा रही थी. सरकार यह संदेश देना चाहती है कि यह डील सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संतुलित है.

इस डील का सबसे बड़ा ठोस पहलू अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करना है. यह कटौती ऐसे समय में आई है, जब भारत के इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और ज्वेलरी सेक्टर को वैश्विक मंदी और लागत बढ़ने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. विश्लेषकों के मुताबिक, यह फैसला भारतीय निर्यात को कम्पटेटिव बना सकता है, लेकिन साथ ही यह भी सवाल है कि क्या इसके बदले भारत ने ऊर्जा और आयात मोर्चे पर ज्यादा प्रतिबद्धताएं ली हैं.

रूस से दूरी, अमेरिका के करीब?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह दावा कि भारत रूस से तेल खरीद कम करेगा और अमेरिका से ज्यादा तेल लेगा, इस डील को सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि जियो-पॉलिटिकल एंगल देता है. अगर भारत सच में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव करता है, तो इसका असर भारत-रूस संबंधों और तेल आयात की लागत दोनों पर पड़ेगा. यहीं से डील पर सवाल और गहरे हो जाते हैं.

भारत के लिए कैसा चैलेंज?

ट्रम्प द्वारा घोषित 500 अरब डॉलर की ‘बाय अमेरिकन’ पहली नजर में द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करती दिखती है. लेकिन विश्लेषण यह भी कहता है कि भारत के लिए चुनौती यह होगी कि ‘मेक इन इंडिया’ को कमजोर किए बिना अमेरिकी आयात को कैसे संतुलित किया जाए. सरकार का दावा है कि मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश बढ़ेगा, लेकिन इसके वास्तविक आंकड़े आने में वक्त लगेगा.

किसके लिए है फायदेमंद?

पीयूष गोयल का जोर बार-बार इस बात पर रहा कि यह डील किसानों, मछुआरों, महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर लाएगी. यह बयान राजनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि ट्रेड डील्स को अक्सर शहरी और कॉरपोरेट-केंद्रित माना जाता है. सरकार यहां यह संदेश देना चाहती है कि यह समझौता ग्रामीण भारत को नजरअंदाज नहीं करता.

ट्रेड डील पर विपक्ष ने क्या कहा?

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस डील को लेकर सरकार पर ‘देश बेचने’ जैसा गंभीर आरोप लगाया है. उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, अडाणी केस और अमेरिका की राजनीति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझौते के लिए मजबूर किया. यह हमला बताता है कि आने वाले समय में यह डील संसद और चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है.

सरकार ने आरोप को किया ख़ारिज

सरकार ने विपक्ष के आरोपों को “नकारात्मक सोच” बताते हुए खारिज किया है. पीयूष गोयल का कहना है कि देश-विदेश में इस डील की तारीफ हो रही है और भारत ने अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल की हैं. यह बयान बताता है कि सरकार इस डील को अपनी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश करने के मूड में है.

फायदे की उम्मीद, लेकिन निगरानी जरूरी

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील फिलहाल संभावनाओं और दावों पर टिकी है. टैरिफ कटौती और निर्यात बढ़ने की उम्मीद निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन ऊर्जा आयात, घरेलू उद्योगों पर असर और दीर्घकालिक रणनीतिक परिणामों पर नजर रखना जरूरी होगा. असली परीक्षा तब होगी, जब यह डील कागज से निकलकर जमीन पर रोजगार, निवेश और कीमतों के रूप में दिखेगी.

FAQ: भारत–अमेरिका ट्रेड डील से जुड़े अहम सवाल-जवाब

Q1. भारत–अमेरिका ट्रेड डील क्या है?

भारत और अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए की गई है. इसके तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए कुल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

Q2. इस ट्रेड डील पर सरकार का क्या कहना है?

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इस समझौते में किसी भी सेक्टर के हितों से समझौता नहीं किया गया है और यह डील हर भारतीय के लिए गर्व की बात है.

Q3. किन सेक्टर्स को इस डील से सबसे ज्यादा फायदा होगा?

सरकार के अनुसार इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल, मरीन प्रोडक्ट्स, ज्वेलरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. इससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

Q4. क्या कृषि और डेयरी सेक्टर पर इसका असर पड़ेगा?

सरकार ने साफ किया है कि कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति के अनुसार किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया.

Q5. टैरिफ 50% से घटाकर 18% कैसे हुआ?

अमेरिका ने पहले 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से तेल खरीद को लेकर 25% पेनल्टी लगाई थी. अब अमेरिका ने 25% पेनल्टी हटाने का फैसला किया है, जिससे भारत पर कुल टैरिफ घटकर 18% रह गया है.

Q6. रूस से तेल खरीद को लेकर क्या शर्तें हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीद कम करेगा और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा. हालांकि भारत सरकार की ओर से इस पर विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं.

Q7. ‘बाय अमेरिकन’ नीति का भारत पर क्या असर पड़ेगा?

ट्रम्प के मुताबिक भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक का सामान खरीदेगा. इससे द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू उद्योगों का संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी.

Q8. विपक्ष इस ट्रेड डील का विरोध क्यों कर रहा है?

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार ने इस डील में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव और राजनीतिक मजबूरी का नतीजा बताया है.

Q9. सरकार ने विपक्ष के आरोपों पर क्या जवाब दिया है?

पीयूष गोयल ने विपक्ष पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि यह डील देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और निवेश के लिए फायदेमंद है और देश-विदेश में इसकी सराहना हो रही है.

Q10. आम लोगों के लिए इस ट्रेड डील का क्या मतलब है?

सरकार के मुताबिक इस डील से रोजगार के नए अवसर, निर्यात में बढ़ोतरी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिसका सीधा फायदा किसानों, युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्योगों तक पहुंचेगा.

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