क्‍या है भारत-इजराइल का Iron Alliance जिससे पाकिस्‍तान को मिर्ची लगना तय?

भारत और इजरायल के बीच उभरता Iron Alliance बदल सकता है एशिया का पावर बैलेंस. इसका सबसे बड़ा असर Pakistan, चीन और मिडिल ईस्ट की राजनीति पर दिख सकता है.

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 27 Feb 2026 1:31 PM IST

भारत और इजरायल के बीच उभरता हुआ आयरन अलाएंस “Iron Alliance” सिर्फ एक कूटनीतिक शब्द नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक ताकतों के बीच नई रणनीतिक सोच का संकेत है. पीएम मोदी-बेंजामिन नेतन्याहू की नजदीकियों के साथ यह साझेदारी अब रक्षा, टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस और जियोपॉलिटिक्स के व्यापक फ्रेमवर्क में बदलती दिख रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस उभरते गठबंधन का असर पाकिस्तान पर कितना पड़ेगा और दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन में क्या बदलाव आने की संभावना है.

दरअसल, पीएम मोदी-बेंजामिन नेतन्याहू की मीटिंग औपचारिक डिप्लोमेसी से आगे बढ़ गई और द्विपक्षीय बातचीत के केंद्र में एक नया स्ट्रेटेजिक जियो पॉलिटिक्स सामने आया. इजराय के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक “आयरन अलायंस” का प्रस्ताव रखा, जो शायद भारत-इजराइल सहयोग के अगले चरण को फिर से नया रूप देगा.

Iron Alliance क्या है और क्यों चर्चा में है?

पीएम नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया बैठक ने पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर एक नए रणनीतिक ढांचे आयरन अलाएंस (Iron अलायन्स) को सामने रखा है. इसे सिर्फ द्विपक्षीय समझौता नहीं, बल्कि “सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और जियोपॉलिटिक्स” के संयुक्त मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय और वैश्विक समीकरण बदल सकता है. खासकर पाकिस्तान की फ्यूचर स्ट्रेटजी पूरी तरह से प्रभावित हो सकती है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आयरन अलाएंस में ऐसा क्या है कि यह दुनिया भर में सुर्खियों में है. पाकिस्तान में पिछले तीन दिनों में इसी पर अधिकांश डिबेट केंद्रित है.

यह गठबंधन भारत-इजराइल रिश्तों को कैसे बदल रहा है?

अब तक भारत-इजराइल संबंध मुख्यतः डिफेंस डील्स तक सीमित थे, लेकिन आयरन अलाएंस उन्हें एक इंस्टीट्यूशनल और लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में बदलने का संकेत देता है. इसमें इंटेलिजेंस शेयरिंग, जॉइंट प्लानिंग और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय शामिल है, जिससे यह रिश्ता “ट्रांजैक्शनल” से “ट्रस्ट-बेस्ड अलायंस” की ओर बढ़ता दिखता है.

पाकिस्तान पर इसका सबसे बड़ा असर क्या हो सकता है?

Pakistan के लिए यह गठबंधन सीधे टारगेट नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बढ़ा सकते हैं. भारत और इज़राइल के बीच बढ़ती सुरक्षा साझेदारी, खासकर आतंकवाद के मुद्दे पर, पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है और उसकी क्षेत्रीय स्थिति को प्रभावित कर सकती है.

काउंटर टेररिज्म में यह गठबंधन कितना अहम?

इंडिया और इजरायल दोनों लंबे समय से आतंकवाद का सामना कर रहे हैं. हमास और हिजबुल्लस जैसे संगठनों से निपटने का इजराइल का अनुभव भारत के लिए उपयोगी हो सकता है. ऐसे में इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त रणनीति पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बढ़ा सकती है.

डिफेंस टेक्नोलॉजी में भारत को क्या बढ़त मिल सकती है?

Iron Alliance के तहत भारत को एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी का फायदा मिल सकता है, जिसमें Iron Dome जैसी मिसाइल डिफेंस, ड्रोन वॉरफेयर और AI आधारित सिस्टम शामिल हैं. इससे भारत की सैन्य क्षमता और मजबूत होगी, जिससे क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव आ सकता है.

क्या यह चीन और ईरान के खिलाफ संतुलन बनाने की कोशिश है?

यह गठबंधन अप्रत्यक्ष रूप से चीन और ईरान के बढ़ते प्रभाव को बैलेंस करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. इससे पाकिस्तान, जो पहले से चीन के करीब है, और ज्यादा उसी धुरी की ओर झुक सकता है.

IMEC कॉरिडोर से आयरन अलाएंस का कनेक्शन क्या है?

भारत मध्य पूर्व और यूरोप आर्थिक कॉरिडोर इस पूरे फ्रेमवर्क का आर्थिक पहलू है. आयरन अलाएंस जहां सुरक्षा सुनिश्चित करता है, वहीं IMEC व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देता है. यह “सिक्योरिटी प्लस इकॉनोमी” मॉडल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिला सकता है.

Hexagon Alliance क्या है और इसका बड़ा प्लान क्या है?

आयरन अलाएंस को एक बड़े “Hexagon of Alliances” का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब देशों के शामिल होने की संभावना है. इसका मकसद मिडिल ईस्ट, यूरोप और इंडो-पैसिफिक को जोड़कर एक मजबूत जियोपॉलिटिकल नेटवर्क बनाना है.

मध्य पूर्व में भारत की बैलेंसिंग स्ट्रेटेजी क्या रहेगी?

भारत एक संतुलित नीति पर काम कर रहा है. एक तरफ इज़राइल के साथ रणनीतिक साझेदारी, तो दूसरी तरफ अरब देशों के साथ मजबूत रिश्ते. यही बैलेंसिंग एक्ट उसे क्षेत्र में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है.

आगे क्या संकेत देता है यह पूरा घटनाक्रम?

Iron Alliance अगर औपचारिक रूप लेता है, तो यह भारत को एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच एक स्ट्रेटेजिक कनेक्टर बना सकता है. इससे न सिर्फ भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत होगी, बल्कि दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

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