क्या है भारत की डीजल डिप्लोमेसी? ईरान संकट के बीच आंख दिखाने वाले बांग्लादेश का ऐसे पकड़ा हाथ

मिडिल ईस्ट में युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच बांग्लादेश में ईंधन की कमी बढ़ गई है. भारत ने 5,000 टन डीजल भेजकर तत्काल राहत दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल 'डीजल डिप्लोमेसी' से भारत-बांग्लादेश संबंध पूरी तरह बेहतर नहीं हो सकते. चीन की संभावित भूमिका और क्षेत्रीय कूटनीति भी इस समीकरण को प्रभावित कर सकती है.

ईंधन संकट में बांग्लादेश की मदद को आगे आया भारत

(Image Source:  X/@bdbnp78/@ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 17 March 2026 12:31 AM IST

Bangladesh fuel crisis, India Bangladesh energy relations: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश में ईंधन की कमी ने नई चिंता पैदा कर दी है. ऐसे समय में भारत ने बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीज़ल भेजकर तत्काल राहत देने की कोशिश की है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह 'डीज़ल डिप्लोमेसी' भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को फिर से बेहतर बना सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन अकेले इससे दोनों देशों के संबंध पूरी तरह नहीं सुधर सकते.

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है, जिसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा है. इसका सीधा असर बांग्लादेश पर भी पड़ा है, क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है. देश के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. लोग शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें जरूरत के मुताबिक पेट्रोल या डीज़ल नहीं मिल पा रहा है. स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों से संपर्क शुरू कर दिया है. इसी संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीज़ल की आपूर्ति की है.

चीन से भी मदद मांग रहा बांग्लादेश

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश सिर्फ भारत पर निर्भर नहीं रहना चाहता. उसने चीन से भी दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मदद मांगी है. बताया जा रहा है कि बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री ने हाल ही में ढाका में चीन के राजदूत याओ वेन से इस मुद्दे पर चर्चा की है. इससे साफ है कि बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कई विकल्प तलाश रहा है.

भारत से 5000 टन डीजल कब तक पहुंचेगा बांग्लादेश? 

  • भारत ने बांग्लादेश को 5,000 मीट्रिक टन डीज़ल की आपूर्ति  नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के बीच पहले से हुए समझौते के तहत की है.
  • बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPC) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर रहमान के अनुसार, यह डीजल मंगलवार तक बांग्लादेश के उत्तरी जिले दिनाजपुर स्थित पारबतिपुर डिपो पहुंच जाएगा. यह आपूर्ति भारत-बांग्लादेश के बीच पहले से हुए वार्षिक समझौते के तहत की जा रही है.
  •  इस मुद्दे पर 11 मार्च को ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणॉय कुमार वर्मा ने बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू से मुलाकात की थी. बैठक के बाद टुकू ने कहा कि भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन फिलहाल वह खुद भी ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है.
  • बांग्लादेश सरकार ने भारत से अतिरिक्त 50,000 मीट्रिक टन डीज़ल देने की भी मांग की है. हालांकि इस मांग पर भारत की ओर से अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

भारत से बांग्लादेश कैसे पहुंच रहा ईंधन?

  • भारत से  डीजल भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए भेजा जा रहा है, जो असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी को बांग्लादेश के पारबतिपुर डिपो से जोड़ती है. इस परियोजना की शुरुआत 2017-18 में हुई थी और 2023 में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया था.
  • पहले ईंधन की आपूर्ति रेलवे टैंकरों के जरिए होती थी, लेकिन पाइपलाइन शुरू होने के बाद लागत और समय दोनों में काफी कमी आई है.
  • बीपीसी के अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार दोपहर लगभग 3:20 बजे पंपिंग शुरू हुई और हर घंटे करीब 113 टन तेल पाइपलाइन के जरिए भेजा जा रहा है. लगभग 44 घंटे में 5,000 टन डीजल की यह खेप पूरी तरह बांग्लादेश पहुंच जाएगी.
  • भारत और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के मुताबिक, भारत हर साल करीब 1,80,000 टन डीजल पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को देगा. मौजूदा 5,000 टन की खेप इसी समझौते का पहला हिस्सा है.
  • बीपीसी चेयरमैन के अनुसार, अगले छह महीनों में लगभग 90,000 टन डीजल और भेजा जाएगा ताकि बांग्लादेश में ईंधन की कमी को तुरंत दूर किया जा सके. सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो महीनों में छह महीने के लिए तय डीजल की पूरी मात्रा मंगा ली जाए.

क्यों गहरा गया बांग्लादेश में ईंधन संकट?

बांग्लादेश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत ईंधन आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, लेकिन अमेरिका-इज़रायल-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते जोखिम के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसका असर बांग्लादेश में भी देखने को मिला है. कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं और सरकार को कुछ जगहों पर ईंधन की बिक्री पर सीमा तय करनी पड़ी है. मोटरसाइकिल के लिए 10 लीटर और कारों के लिए 40 लीटर तक की बिक्री सीमित की गई है.

शेख हसीना सरकार के बाद तनाव में आए थे ऊर्जा संबंध

भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ समय से राजनीतिक कारणों से भी प्रभावित रहा है. अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद बनी अंतरिम सरकार ने भारत के साथ हुए कई ऊर्जा समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी थी. इनमें झारखंड स्थित अडानी के बिजली संयंत्र से 1,320 मेगावाट बिजली आयात का समझौता भी शामिल था, जिस पर बांग्लादेश में कीमतों को लेकर विवाद हुआ था. नवंबर 2024 में बकाया भुगतान न होने पर अडानी ने बिजली आपूर्ति आधी कर दी थी, हालांकि मार्च 2025 में भुगतान शुरू होने के बाद सप्लाई फिर सामान्य हो गई. राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में कई गैस, एलएनजी और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं भी धीमी पड़ गई थीं.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

  • भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि भारत की नीति हमेशा से 'नेबरहुड फर्स्ट' रही है. पड़ोसी देशों की मदद करना उसकी प्राथमिकता है. हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को अपने हितों और जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला करना होगा. उनके मुताबिक, “अभी यह साफ नहीं है कि युद्ध कितने समय तक चलेगा. भारत में भी गैस की कमी और ऊर्जा को लेकर चिंता है. इसलिए सरकार को सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा.”
  • कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की विशेषज्ञ डॉ. कनिका राखरा का मानना है कि 'डीजल डिप्लोमेसी' एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन इससे ही भारत-बांग्लादेश संबंध पूरी तरह बेहतर नहीं हो जाएंगे.
  • कनिका राखरा के अनुसार, शेख हसीना सरकार के पतन और उन्हें भारत में शरण दिए जाने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं. ऐसे में डीज़ल आपूर्ति तनाव कम करने का एक तरीका जरूर हो सकता है, लेकिन कूटनीति के कई अन्य पहलू भी होते हैं.
  • डॉ. राखरा का कहना है कि दोनों देशों के बीच बैक-चैनल बातचीत भी जारी है. हाल ही में बांग्लादेश के सैन्य खुफिया अधिकारियों का भारत दौरा हुआ और दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की भी बैठक हुई है.
  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर चीन बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में ईंधन या आर्थिक मदद देता है, तो ढाका का झुकाव उसकी ओर बढ़ सकता है. इसलिए भारत को स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बांग्लादेश एक संप्रभु देश है और वह अपने हितों के आधार पर फैसले करेगा. 

विश्लेषकों के मुताबिक भारत को एक संतुलित रणनीति अपनानी होगी. एक तरफ उसे पड़ोसी देश की मदद करनी है, वहीं दूसरी तरफ अपने ऊर्जा हितों और घरेलू जरूरतों को भी सुरक्षित रखना है. यही वजह है कि फिलहाल भारत बांग्लादेश की अतिरिक्त डीज़ल मांग पर विचार कर रहा है. अगर भारत संकट के समय बांग्लादेश की मदद करता है तो इससे दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संदेश जरूर जाएगा, लेकिन लंबे समय तक संबंध मजबूत रखने के लिए सिर्फ 'डीजल डिप्लोमेसी' ही काफी नहीं होगी. 

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