लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के! Hormuz और अर्मेनिया में फंसी दुनिया, लेकिन भारत को राहत? कहानी S Jaishankar की जुबानी

ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई देशों के जहाज फंसे हुए हैं, लेकिन भारत के लिए थोड़ी राहत की खबर आई है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि ईरान से सीधी बातचीत की वजह से भारतीय झंडा लगे कुछ जहाज सुरक्षित इस समुद्री रास्ते से गुजर सके हैं.

Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 16 March 2026 2:35 PM IST

Strait of Hormuz: ईरान युद्ध के बीच जहां कई देशों के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं, वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि ईरान के साथ भारत की सीधी बातचीत की वजह से भारतीय झंडा लगे जहाज इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से सुरक्षित गुजर पाए हैं. उधर आर्मेनिया से ईरान में फंसे 550 लोगों को भी भारत ने निकाल लिया है. जहां पूरी दुनिया ईरान के साथ जद्दोजहद में लगी हुई है वहीं भारत बेहद आसानी से अपना नफा निकाल पा रहा है. कई जानकार इसे इंडियन डिप्लोमेसी की बड़ी जीत बता रहे हैं.

एस जयशंकर ने ट्वीट करते हुए आर्मेनिया सरकार का शुक्रिया अदा किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा,"मैं आर्मेनिया की सरकार और वहां के लोगों का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने अब तक ईरान से 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद की है. इन कठिन परिस्थितियों में उनके सहयोग और समर्थन की हम सराहना करते हैं."

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या बोले एस जयशंकर?

फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा कि भारतीय जहाजों की आवाजाही को लेकर भारत और ईरान के बीच कोई 'सामान्य या स्थायी समझौता' नहीं है. उन्होंने बताया कि तेहरान के साथ भारत की लगातार बातचीत की वजह से दो भारतीय गैस वाहक जहाज इस महत्वपूर्ण रास्ते से सुरक्षित गुजर सके. फिलहाल अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के टकराव के कारण यह समुद्री मार्ग आंशिक रूप से प्रभावित है.

जयशंकर ने कहा,"मैं इस समय उनसे बातचीत कर रहा हूं और हमें कुछ नतीजे भी मिले हैं. यह प्रक्रिया अभी जारी है. अगर इससे आगे भी नतीजे मिलते हैं तो स्वाभाविक है कि हम इसे जारी रखेंगे."

उन्होंने यह भी साफ किया कि भारतीय जहाजों के सुरक्षित गुजरने के बदले ईरान को कुछ भी नहीं दिया गया है और कोई स्थायी व्यवस्था भी नहीं की गई है. जिस समय दो भारतीय एलएनजी जहाज सुरक्षित गुजरे, उसी दौरान ईरानी अधिकारियों ने ईरानी तेल ले जा रहे कई टैंकरों को भी इसी रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी.

क्या सभी जहाजों के लिए हुआ है समझौता?

जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी भारतीय जहाजों के लिए बिना रुकावट गुजरने का कोई व्यापक समझौता नहीं है. उनके मुताबिक हर जहाज की आवाजाही को अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है और इसमें किसी तरह का लेन-देन शामिल नहीं है. उन्होंने कहा, "यह किसी सौदे का मामला नहीं है. भारत और ईरान के बीच एक संबंध है और हम इस संघर्ष को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं."

क्या आने वाले दिनों में गुजरेंगे और भी जहाज़?

उन्होंने यह भी माना कि अभी भी कई भारतीय झंडा लगे जहाज उस क्षेत्र में इंतजार कर रहे हैं. जयशंकर ने कहा, "यह अभी शुरुआती दिन हैं. हमारे कई और जहाज वहां मौजूद हैं. इसलिए यह एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन बातचीत अभी जारी है क्योंकि इस पर लगातार काम हो रहा है.”

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