Siddh Nath Gupta बने पश्चिम बंगाल के नए DGP, कितना जानते हैं आप?

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं. पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सिद्धनाथ गुप्ता को नया DGP अपॉइंट किया है.

( Image Source:  Facebook-Baruipur District Police post )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 16 March 2026 12:46 PM IST

पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. राज्य में पुलिस नेतृत्व को लेकर नया फैसला लिया गया है और सीनियर आईपीएस अधिकारी सिद्धनाथ गुप्ता को डीजीप बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. लंबे अनुभव और कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके गुप्ता अब एक ऐसे पद पर पहुंचे हैं, जो सीधे तौर पर राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ा हुआ है.

पुलिस महकमे में हुए इस बदलाव के बाद सिद्धनाथ गुप्ता एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं.उनके करियर, अनुभव और नई जिम्मेदारी को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है. ऐसे में चलिए जानते हैं आखिर कौन हैं सिद्धनाथ गुप्ता.

कौन हैं सिद्धनाथ गुप्ता

सिद्धनाथ गुप्ता साल 1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं. उन्हें लंबे प्रशासनिक अनुभव और पुलिस विभाग में उनकी कार्यशैली के लिए जाना जाता है. उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली है.

रह चुके हैं आईबी के डीजीपी

IPS कैडर में फेरबदल करते हुए पिछले साल तीन सीनियर अधिकारियों की पोस्टिंग बदल दी गई थी. राज्य के गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग के पुलिस सेवा सेल द्वारा सोमवार को जारी एक आदेश के अनुसार, 1992 बैच के IPS अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता, जो अभी तक स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) थे, उन्हें अब इंटेलिजेंस ब्रांच (IB) का DGP बनाया गया था.

चुनाव से पहले क्यों अहम है यह फैसला

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होती है. इसी वजह से अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में चुनावी माहौल को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर ऐसे और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

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