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बांग्लादेश से तनाव के बीच भारत अलर्ट, सीमा पर खड़ी की 12 फीट ऊंची नई डिजाइन फेंसिंग; क्या है खासियत?

भारत बांग्लादेश सीमा के कुछ हिस्सों पर तस्करी और ट्रैफिकिंग जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने नए डिजाइन की मजबूत, 12-फुट ऊंची एंटी-कट, एंटी-क्लाइंब बाड़ लगा रहा है. यह पुरानी रुकावटों की जगह एक मजबूत डिजाइन वाली वेल्ड मेश वाली बाड़ है. साथ ही निगरानी और मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट टेक्नोलॉजी और बॉर्डर लाइटिंग का भी इस्तेमाल कर रहा है.

बांग्लादेश से तनाव के बीच भारत अलर्ट, सीमा पर खड़ी की 12 फीट ऊंची नई डिजाइन फेंसिंग; क्या है खासियत?
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( Image Source:  https://imrmedia.in/ )

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बदलते सुरक्षा हालात और बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है. सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अब 12 फीट ऊंची नई डिजाइन की फेंसिंग लगाई जा रही है. यह फेंसिंग पहले से मौजूद बाड़ की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और घुसपैठ रोकने में सक्षम मानी जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नई फेंसिंग को काटना या नुकसान पहुंचना आसान नहीं होगा. इसमें काफी समय लगेगा, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सकेगा.

नई बाड़ की मुख्य विशेषताएं

  • नई डिजाइन की फेंसिंग यानी बाड़ 12 फीट ऊंची है, जिससे इसे काटना या चढ़ना मुश्किल होगा. इससे सुरक्षा में काफी सुधार होगा.
  • फेंसिंग को बनाने में वेल्ड मेश के साथ एक नए डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे टिकाऊ और छेड़छाड़ प्रतिरोधी बनाता है.
  • फेंसिंग खास तौर पर अपराधियों द्वारा काटे जाने या चढ़ने से रोकने के लिए डिजाइन किया गया है.
  • इससे बेहतर निगरानी के लिए मौजूदा बॉर्डर लाइटिंग और तकनीकी उपकरणों का पूरक है.
  • नई डिजाइन की फेंसिंग सिर्फ ऊंचाई में ही नहीं, बल्कि मजबूती और संरचना के मामले में भी अलग है. इसमें हेवी-ड्यूटी मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है, जो सामान्य औजारों से जल्दी क्षतिग्रस्त नहीं होता. फेंसिंग का डिजाइन ऐसा है कि उसे पार करना या काटना बेहद मुश्किल है.

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क्या है इसका मकसद?

अपराध से लड़ना: सीमावर्ती इलाकों के घुसपैठ, मवेशियों की तस्करी, ड्रग्स की तस्करी, मानव तस्करी और अवैध आवाजाही को रोकना है.

मैनेजमेंट को बेहतर बनाना: आवाजाही को नियंत्रित करना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए सीमा को अधिक सुरक्षित बनाना.

आर्थिक लाभ: नए डिजाइन को लंबे समय में अधिक लागत प्रभावी माना जाता है.

ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीते वर्षों में घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों की चुनौतियां सामने आती रही हैं. पहले लगी फेंसिंग को लेकर यह देखा गया कि कुछ इलाकों में ऊंचाई और मजबूती सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं रह गई थी. इसी वजह से फेंसिंग की ऊंचाई बढ़ाकर 12 फीट की गई, ताकि सीमा पार से आने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगे. सुरक्षा बलों को प्रतिक्रिया देने के लिए ज्यादा समय मिले. संवेदनशील इलाकों में निगरानी और नियंत्रण मजबूत हो. यह कदम सीमा सुरक्षा को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में देखा जा रहा है.

सुरक्षा रणनीति और चुनौतियां

टीओआई के मुताबिक यह परियोजना 4,096 किलोमीटर सीमा का एक बड़ा हिस्सा (80 फीसद) पर बाड़ लगाई जा चुकी है. बाकी बचे हिस्सों में भी फेंसिंग का काम चल रहा है और नए डिजाइनों के प्रस्ताव है. भारत की ओर से उठाए गए इस कदम को बांग्लादेश बेहतर बाड़, खासकर स्मार्ट टेक्नोलॉजी वाली बाड़ को संभावित सुरक्षा चिंता के रूप में देखता है, कभी-कभी आपत्तियां और काम में अस्थायी रोक लगती है. भारत हिमालय की चोटियों से लेकर थार और कच्छ के धूल भरे इलाकों तक अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए कदम बढ़ा रहा है.

नई डिजाइन की फेंसिंग को केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि भारत की व्यापक सीमा-सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इससे न सिर्फ बॉर्डर पर नियंत्रण मजबूत होगा, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहा है.

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