हवा में कैसे पलट गया अजित पवार का विमान? लैंडिंग से पहले बिगड़ा कंट्रोल, CCTV फुटेज ने बढ़ाया सस्पेंस

अजित पवार विमान हादसे से जुड़ा नया CCTV वीडियो सामने आया है, जिसमें लैंडिंग से ठीक पहले Learjet 45 हवा में बाईं ओर झुकता दिख रहा है. जांच से पहले वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.;

Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 29 Jan 2026 8:51 AM IST

अजित पवार को लेकर जा रहा लियरजेट-45 जिस तरह लैंडिंग से ठीक पहले हवा में तिरछा हुआ, उसने हादसे की प्रकृति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. सामने आए ताज़ा CCTV वीडियो में साफ दिखता है कि विमान सामान्य एप्रोच के बजाय अचानक बाईं ओर झुकता है और तेज़ी से नीचे आता है. इसका मतलब है कि विमान अचानक हवा में ही पलट गया. विशेषज्ञ मानते हैं कि लैंडिंग फेज़ में इस तरह का झुकाव सामान्य नहीं होता, जब तक कि कोई तकनीकी या एरोडायनामिक गड़बड़ी न हो.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नए CCTV फुटेज में विमान रनवे के पास आते हुए दिखाई देता है. कुछ ही पलों में उसका नोज़-एंगल असामान्य हो जाता है और बाईं ओर रोल बढ़ता है. जमीन से टकराते ही आग का गुबार उठता है. इससे पहले आए फुटेज में क्रैश का पल कैद था, लेकिन यह नया वीडियो हादसे से ठीक पहले की स्थिति दिखाता है, जहां कंट्रोल बिगड़ता नजर आता है.

लैंडिंग से पहले असामान्य रोल क्यों खतरनाक?

एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक लैंडिंग के दौरान विमान को न्यूनतम रोल और स्थिर डिसेंट के साथ रनवे पर टचडाउन करना होता है. अगर विमान अचानक एक ओर झुकता है, तो इसके पीछे इंजन थ्रस्ट असंतुलन, फ्लाइट-कंट्रोल सरफेस की खराबी, या तेज़ क्रॉसविंड जैसी वजहें हो सकती हैं. वीडियो में दिखा झुकाव बताता है कि पायलट को अंतिम क्षणों में असाधारण दबाव झेलना पड़ा.

पहली कोशिश नाकाम, दूसरी में जोखिम

ATC रिकॉर्ड के मुताबिक पहली लैंडिंग कोशिश में पायलट को रनवे नजर नहीं आया. यह संकेत देता है कि विजिबिलिटी चुनौतीपूर्ण थी. दूसरी कोशिश में रनवे दिखने पर अनुमति दी गई, लेकिन यहीं जोखिम बढ़ गया. विशेषज्ञ मानते हैं कि गो-अराउंड के बाद दोबारा एप्रोच में पायलट पर समय और ईंधन दोनों का दबाव होता है, जो निर्णय-निर्माण को कठिन बना देता है.

आख़िरी छह सेकेंड में क्या हुआ?

जानकारी के अनुसार 8:43 बजे रनवे दिखा, ATC से लैंडिंग क्लियरेंस मिला और महज छह सेकेंड में विमान हादसे का शिकार हो गया. यह समयावधि बताती है कि समस्या अचानक और गंभीर थी. इतने कम समय में पायलट के पास सुधारात्मक कदम उठाने की गुंजाइश बेहद सीमित होती है खासकर जब विमान कम ऊंचाई पर हो.

लो विजिबिलिटी vs तकनीकी खराबी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुरुआती तौर पर लो विजिबिलिटी की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञ इसे अकेला कारण नहीं मानते. कम दृश्यता में भी मानक प्रक्रियाएं और इंस्ट्रूमेंट-लैंडिंग सहारा देती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या किसी तकनीकी सिस्टम में खराबी आई, या क्रॉसविंड/विंड-शियर ने संतुलन बिगाड़ा?

रनवे से खाई तक: टचडाउन क्यों नहीं हुआ?

वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि विमान रनवे के बजाय उससे दूर खाई में गिरा. इसका मतलब है कि टचडाउन से पहले ही लाइन-अप बिगड़ चुका था. असामान्य रोल के साथ यदि साइड-ड्रिफ्ट बढ़े, तो विमान रनवे सेंटरलाइन से भटक सकता है और कम ऊंचाई पर रिकवरी लगभग असंभव हो जाती है.

जांच से ही खुलेगा राज

AAIB की जांच में फ्लाइट-डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट-वॉयस रिकॉर्डर, मौसम डेटा और ATC लॉग्स निर्णायक होंगे. CCTV वीडियो ने संकेत दिए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष तकनीकी विश्लेषण से ही आएगा. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हवा में बिगड़ा संतुलन और आख़िरी सेकेंड्स की जटिलता ने इस त्रासदी को जन्म दिया जिसने महाराष्ट्र को एक बड़े नेता से वंचित कर दिया.

Similar News