Flydubai Hijacking Attempt: दो-तीन दिन पहले ‘फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073’ में आसमान में घटी विस्मयकारी डरावनी-खूनी घटना ने विश्व-विमानन सेवा और उसकी सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव (इजराइल) के आसमानी रास्ते (हवाई सफर) में घटी इस घटना के विलेन और अब तक इस कांड के षडयंत्र के इकलौते चश्मदीद समझे जा रहे ओमान के मूल निवासी को-पायलट (हमलावर-हाईजैकर) हमाम अल-हम्मामी (Hamam al-Hammami) के इर्द-गिर्द ही पूरी पड़ताल झूल रही है. क्या इस नाकाम दुस्साहसिक घटना को अंजाम देने की हैसियत अकेले हम्मामी ने ही कर डाली? या फिर यह किसी बड़े और भारत के खिलाफ गजब के षडयंत्र की अधूरी परिणति है?

इन्हीं तमाम सवालों के जवाब के लिए शनिवार (3 अक्टूबर 2026) के 'स्टेट मिरर हिंदी' के एडिटर इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान ने भारत की राजधानी दिल्ली में मौजूद दुनिया में तीसरी नंबर पर मौजूद भारत की अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारी एन के सूद से खास बातचीत की. इस दौरान पूर्व रॉ अधिकारी ने बेहद उलझे हुए सवालों का जिस तरह विस्तृत रूप से और बिना किसी लाग-लपेट के गहराई-सूझबूझ और तथ्यों के आधार पर जवाब दिए, उसको सुनकर भारत ही क्या दुनिया के किसी भी देश की हुकूमत और उनकी जांच व खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो जाएंगे.


भगवा आतंकवाद और भारत!

'स्टेट मिरर हिंदी' के एक सवाल के जवाब में पूर्व रॉ अफसर नरेश कुमार सूद ने बताया, “आसमान में यह घटना हादसे में नहीं बदल सकी. यह सिर्फ फ्लाईदुबई विमान में उस दिन मौजूद क्रू मेंबर्स और यात्रियों की जान बचा लेने भर तक ही सीमित नहीं रही है. यह सीधे-सीधे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगवा आतंकवाद के चोले में फंसाने की नाकाम कोशिश रही है. दुनिया इस घटना में सिर्फ किसी विमान को हाईजैक करके तबाह कर डालने की एक नाकाम कोशिश के रुप में देख पा रही है. पूर्व रॉ अधिकारी होने के अनुभव से मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह षडयंत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को भगवा आतंकवाद के द़ाग से बदनाम करने की नाकाम कोशिशों में से एक है.”



 

मोदी के दोस्त और दुश्मनों में बढ़ोत्तरी

इस अहम मुद्दे पर बात जारी रखते हुए तार्किक तरीके से समझाते हुए पूर्व रॉ अधिकारी ने कहा, “दरअसल साल 2014 में जब से भारत की हुकूमत भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में आई है, तभी से भारत के अगर 100 दोस्त बने हैं तो हमारे कई नए दुश्मनों की तादाद में भी इजाफा हुआ है. आज बढ़ते भारत की ताकत को देखकर जो तमाम दुश्मन देश सीधे भारत से अड़ने में अपनी नाकामी साफ साफ देख रहे हैं. वे चीन की तरह से भारत की पीठ में छुरा घोंपने का कोई मौका नहीं खो रहे हैं."

समझिए इनसाइड स्टोरी

जिस तरह से फ्लाईदुबई को आसमान में हाईजैक करके उसे तबाह करने की नाकाम कोशिश सामने आई है, उससे मैं क्या भारत के तमाम मित्र देशों की जांच और खुफिया एजेंसियां आसानी से यह साबित कर सकने में सक्षम हैं कि यह सिर्फ इजराइल को नीचा दिखाने भर का खूनी खेल नहीं था. अपितु यह भारत के ऊपर भगवा आतंकवाद की तोहमत लगाने की भयंकर खूनी कोशिश थी. जिसे भगवान ने ब-जरिए फ्लाईदुबई के भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछार के जरिए नाकाम कर डाला गया है.”


‘फ्लाईदुबई’ से कांड अचानक नहीं होते.

इन तर्कों को पुख्ता और सही साबित करने के क्रम में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व अधिकारी एन के सूद ने कहा, "30 सितंबर 2026 को आसमान में, दुबई से तेल अवीव (इजराइल) जाते समय सऊदी अरब के एयरस्पेस (तबुक के करीब) घटी दुस्साहसिक खूनी घटना अचानक ही घटित नहीं कर डाली गई. इसकी प्लानिंग करीब 1-2 साल पहले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही होगी. इस तरह ‘फ्लाईदुबई’ फ्लाइट संख्या FZ1073 (बोइंग 737-8 मैक्स के कॉकपिट में, जब विमान सऊदी अरब के ऊपर आसमान में उड़ रहा था) या फिर 26/11 (मुंबई में हुए आतंकवादी हमले) अथवा 9/11(अमेरिका में ट्विन टॉवर पर आतंकवादी हमला) आतंकवादी हमले अचानक ही अंजाम नहीं दे डाले जाते हैं. इनके लिए कई-कई साल आतंकवादी संगठन मजबूत प्लानिंग करते हैं. मेरे रॉ के लंबे अनुभव से फ्लाईदुबई को हाईजैक करके क्रैश कर डालने की नाकाम रही कोशिश की तैयारियों में कम से कम 1 से 3 साल के बीच का वक्त तो लगा ही होगा.

भगवान और स्मित का शुक्रिया

फ्लाईदुबई जैसे आधे-अधूरे मगर खूनी कांड पर बेबाक बातचीत करते हुए पूर्व रॉ अफसर नरेश कुमार सूद ने स्टेट मिरर हिंदी के एक सवाल के जवाब में कहा, “उड़ान के दौरान ओमान मूल के सह-पायलट (को-पायलट) ने भारतीय मूल के मुख्य कैप्टन स्मित मच्छार की जान लेने में कहीं कोई कोताही या कमजोरी नहीं बरती. यह तो कहिए कि भारत की किस्मत अच्छी थी कि जो भगवान ने हर लम्हा अकाल मौत के मुंह की ओर सरकते हुए विमान के मुख्य पायलट भारतीय मूल के विमान चालक स्मित मच्छार को हिम्मत दी. उसने अपनी जिंदगी दांव पर लगी देखते हुए भी जीवन की अंतिम जो कोशिश की वही कामयाब रही."


बदनामी का अमिट द़ाग...!

रॉ के पूर्व अधिकारी ने कहा, "नतीजा आज जमाने के सामने है कि बेशक खून से सने अकाल मौत के मुहाने पर खड़े फ्लाईदुबई के मुख्य विमान चालक भारतीय मूल के स्मित मच्छार ने अपनी अंतिम कोशिश को कामयाबी में बदल डाला. उन्होंने न केवल अपने साथ बाकी क्रू मेंबर्स सहित पौने दो सौ से ज्यादा बेकसूरों की जिंदगियां भी बचा लीं, अपितु भारत के माथे पर 'भगवा आतंकवाद' के कलंक का पर वह द़ाग भी लगने से बचा लिया, जो शायद हिंदुस्तान की आने वाली तमाम पीढ़ियां भी न मिटा पातीं."


दोस्त और दुश्मन सब शक करते....

एनके सूद ने कहा, "गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद फ्लाईदुबई के मुख्य चालक/ कैप्टन स्मित मच्छार ने सूझबूझ और साहस का परिचय अगर न दिया होता तो शायद आज भारत का इतिहास काला होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाती... क्योंकि तब विमान क्रैश होने के बाद भारत के दुश्मन और दुनिया यही कहती सोचती, भारत के ऊपर लांछन लगाती कि भारतीय मूल के पायलट ने इजराइल के लोगों से भरा विमान जान-बूझकर 'क्रैश' करके 175 से ज्यादा बेगुनाहों की जिंदगी लील ली. चूंकि विमान क्रैश हो चुके होने की स्थिति में भारत किसी भी कीमत पर दुनिया को यह नहीं समझा पाता कि भारत और भारतीय कभी भी किसी भी कीमत पर आतंकवाद के साथ नहीं हैं."


Full View

सूद ने कहा, "प्लेन क्रैश होने के बाद अपने और पराए सब यह तोहमत भारत पर लगाते नहीं शर्माते कि भारत भगवा आतंकवाद का कट्टर समर्थिक है. इसलिए उसके एक हिंदुस्तानी पायलट स्मित मच्छार ने जान-बूझकर षडयंत्र के तहत 'फ्लाईदुबई' को क्रैश करवा कर 175 लोगों की जान ले ली. उन हालातों में हमारे बीच चूंकि विमान के मुख्य पायलट स्मित मच्छार नहीं होते... तो यह कौन विश्वास करता कि उन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी होगी विमान को बचाने के लिए. कौन कैसे समझता जमाने में कि भारत के बहादुर पायलट स्मित मच्छार के ऊपर ओमानी मूल के को-पायलट ने हमला करके प्लेन को क्रैश करवा डाला होगा? भले ही दुनिया भर की जांच और खुफिया एजेंसियां जांच-पड़ताल के नाम पर आकाश-पाताल एक ही क्यों न कर डालतीं.”

3 खुफिया एजेंसियां फेल...

स्टेट मिरर हिंदी के एक सवाल के जवाब में पूर्व रॉ अधिकारी ने कहा, “नहीं ऐसा कतई नहीं है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और भारत की खुफिया एजेंसी रॉ. तीन की तीनों फेल हो गईं. इसलिए 30 सितंबर 2026 को यह विमान या आसमान में यही खूनी संकट पैदा हो गया. दरअसल, इस तरह के आतंकवादी ऑपरेशन की तैयारियां-षडयंत्र बेहद गोपनीय तरीके से प्लान होते हैं. उस हद तक के गोपनीय की जिन्हें वक्त रहते पकड़ पाने में दुनिया की हर तकनीक फेल हो जाती है. जिन तीन तीन बड़ी नामी खुफिया एजेंसियों का आप जिक्र कर रहे हैं, वे कोई गली-कूंचे की एजेंसियां नहीं है. इन्हीं खुफिया एजेंसियों में से कई के नाम पर दुनिया के तमाम बड़े खुफिया ऑपरेशन की सफलताएं दर्ज हैं. इन्हीं सफलताओं में एक है दुनिया में आतंकवादी की यूनिवर्सिटी यानी पाकिस्तान के एबटावाद में अमेरिका सहित दुनिया भर के मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी ओसामा-बिन-लादेन को घर मे घुसकर उसे चंद कदम की दूरी पर गोलियों से भूनकर उसका खात्मा करके उसकी लाश को समुद्र में बहा दिया जाना.”

भारत को समझने-सतर्क रहने की जरूरत

नरेश कुमार सूद ने कहा, "हां. इतना जरूर है कि फ्लाईदुबई कांड को भारतीय पायलट स्मित मच्छार द्वारा सफलतापूर्वक नाकाम करने पर भी जिस तरह से बेतुका और नकारात्मक रुख पश्चिमी देशों के मीडिया का रहा है. वह भारत को सतर्क करने वाला है कि किसी भी खुशी या आपदा में पश्चिम देश और उनका मीडिया भारत के साथ तो कतई नहीं होगा. इस भयंकर डरावने कांड में भारत और भारतीय पायलट की खुलकर तारीफ करने के बजाए पश्चिमी देशों के मीडिया, अमेरिका सहित दुनिया के तमाम भारत के दुश्मन मुस्लिम देश खामोश हैं, वह भी भारत को इन सबसे दूर और सतर्क रहने का आगाह करने के लिए काफी है."

राहुल गांधी की खामोशी के पीछे...

बात बात पर मोदी और भारतीय जनता पार्टी का खाल खींचने पर आमादा रहने वाले और आजकल आए-दिन धरना प्रदर्शन करने में महारत हासिल कर चुके लोकसभा में विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी की फ्लाईदुबई कांड में भारत की सफलता और विमान के मुख्य पायलट स्मित की बहादुरी पर खामोशी की असल वजह क्या है? सवाल पूछने पर पूर्व रॉ अधिकारी ने कहा, “ऐसे मौकों पर भारत के साथ राहुल गांधी का खुलकर खुशी खुशी खड़े न होने और खामोश रहने पर हिंदुस्तान को गंभीरता से सोचना होगा. मुझे तो इस अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर जहां भारत के माथे पर कलंक का टीका लगने से बच गया हो, राहुल गांधी की चुप्पी से उनमें अमेरिका, पाकिस्तान और चीन की भारत को लेकर एक ही सोच साफ साफ झलकती है. जैसा पीठ पीछे भारत को लेकर चीन पाकिस्तान अमेरिका सोचते हैं वैसे ही मुझे तो इस मामले में राहुल गांधी लगे.”