Bengal Election 2026: सबसे गरीब महिला विधायक चंदना बाउरी ने 2021 में दिखाई थी ताकत, TMC के लिए टेंशन क्यों?

चंदना बाउरी, देश की सबसे गरीब विधायकों में शामिल, 2021 में Saltora से जीती थीं. अब 2026 बंगाल चुनाव में फिर इसी सीट से किस्मत आजमाने की चर्चा तेज.

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 17 April 2026 5:07 PM IST

पश्चिम बंगाल की सियासत में जब भी संघर्ष से उठकर आगे बढ़ने की मिसाल दी जाएगी, तो चंदना बाउरी (Chandana Bauri) का नाम जरूर लिया जाएगा. ऐसा इसलिए कि उनकी कहानी सिर्फ एक चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है, जो एक आम और बेहद गरीब महिला ने अपने सपनों पर किया और जीत गई. 2021 में Saltora विधानसभा सीट टीएमसी प्रत्याशी को हराने के बाद, एक बार फिर वो उसी सीट से चुनावी मैदान में है. बीजेपी को भरोसा है कि चंदना की सादगी, ईमानदारी और पब्लिक कनेक्ट इस बार फिर उन्हें जीत दिलाएगी.

चंदना बाउरी कौन हैं?

Chandana Bauri पश्चिम बंगाल की एक गरीब पृष्ठभूमि से आने वाली महिला नेता हैं, जो BJP से जुड़ी हैं. वह मजदूर परिवार से आती हैं. उनके पति राजमिस्त्री (मजदूर) हैं और खुद भी खेतों में काम कर चुकी हैं. चंदना बाउरी Saltora विधानसभा सीट चुनाव लड़ रही हैं. 2021 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की थी. चंदना बाउरी का सीधा व्यक्तिगत रिश्ता नहीं, लेकिन राजनीतिक कनेक्शन है. वे पीएम मोदी की नीतियों और गरीब कल्याण योजनाओं से प्रभावित बताई जाती हैं. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद भी दिया था. यानी उनका कनेक्शन वैचारिक और पार्टी स्तर का है, न कि पारिवारिक या व्यक्तिगत.

Bankura के एक छोटे से गांव में जन्मी चंदना बाउरी का बचपन अभावों के बीच बीता. घर कच्चा था, बरसात में छत टपकती थी और कई रातें ऐसी होती थीं जब पेट आधा भरा रह जाता था. उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी . मेहनत, और सबसे बड़ी ताकत थी, हार न मानने का जज्बा.

जब राजनीति बनी जरूरत, न कि सपना

चंदना बाउरी ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे राजनीति में आएंगी. लेकिन गांव की समस्याएं, गरीबी, बेरोजगारी और लोगों की परेशानियां उन्हें भीतर तक झकझोरती थीं. इसी दौरान उन्होंने पीएम मोदी की योजनाओं के बारे में सुना, गरीबों के लिए घर, गैस, शौचालय और बैंक खाते जैसी पहलें. इन्हीं बातों ने उनके मन में विश्वास जगाया कि बदलाव संभव है. यही भरोसा उन्हें बीजेपी तक ले गया. बिना किसी बड़े संसाधन के, उन्होंने लोगों के बीच जाना शुरू किया—दरवाजे खटखटाए, दुख-सुख सुना और धीरे-धीरे खुद को जनता की आवाज बना लिया.

2021: जब एक आम महिला ने इतिहास लिखा

साल 2021 में विधानसभा चुनाव उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बना. उन्होंने Saltora सीट से चुनाव मैदान में कदम रखा. सामने मजबूत और अनुभवी उम्मीदवार थे, लेकिन चंदना के पास कुछ अलग था. लोगों का भरोसा और अपनी सादगी. नतीजे आए, तो हर कोई हैरान रह गया. एक मजदूर परिवार की महिला विधायक बन चुकी थी. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को हराकर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में ताकत पैसे से नहीं, जनता के विश्वास से मिलती है. बंगाल चुनाव 2021 में उन्होंने टीएमसी प्रत्याशी संतोष कुमार मंडल को लगभग 4,145 वोट हराया था. उनके लिए यह जीत इसलिए खास मानी गई क्योंकि उन्होंने एक मजबूत और स्थापित उम्मीदवार को हराया.

सबसे गरीब विधायक, सबसे मजबूत इरादे

चंदना बाउरी को देश की सबसे गरीब विधायकों में गिना जाता है. उनकी कुल संपत्ति महज कुछ हजार रुपये के आसपास रही.उनके पास कुल संपत्ति लगभग ₹31,985 रुपये और पति की संपत्ति लगभग ₹30,311 रुपये है. उनके पास 1 छोटा कच्चा घर है. कुछ पशु और गाय-बकरी हैं. इसी वजह से उन्हें भारत की सबसे गरीब विधायकों में गिना जाता है.

विधानसभा पहुंचने के बाद भी उनकी जिंदगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया. आज भी वे उसी सादगी से जीती हैं, लोगों के बीच जाती हैं और उनकी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानती हैं. उनकी कहानी यह सवाल खड़ा करती है. क्या राजनीति सिर्फ अमीरों के लिए है? और जवाब खुद चंदना देती हैं, नहीं.

इस बार कहां से आजमा रहीं तकदीर?

अब जब बंगाल का विधानसभा चुनाव प्रचार चरम पर है, हलचल तेज हो रही है, तो एक बार फिर चंदना बाउरी सालतोरा से चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी ने एक बार फिर उन्हें सालतोरा से मैदान में उतारा है. उनके समर्थकों का मानना है कि जिस तरह उन्होंने पहली बार इतिहास रचा, वह उसे दोहराने का माद्दा भी रखती हैं. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी की घोषणा के बाद ही साफ होगा, लेकिन जमीनी समर्थन उनके साथ खड़ा दिखता है.

एक कहानी, जो उम्मीद बन गई

चंदना बाउरी की जिंदगी सिर्फ व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस भारत की तस्वीर है जहां अब भी लाखों लोग सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं. उन्होंने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ हो और इरादे मजबूत, तो कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत बदल सकता है.

उनका सफर यह सिखाता है कि गरीबी कमजोरी नहीं, बल्कि एक ऐसी जमीन है जहां से सबसे मजबूत कहानियां उगती हैं. मिट्टी के घर से विधानसभा तक पहुंचने वाली यह कहानी हमें याद दिलाती है. आम आदमी जब ठान ले, तो इतिहास बनता है.

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