अब छोड़ो Raid की बातें! Income Tax डिपार्टमेंट आपके पास आ रहा है, वो भी दबे पाँव- पर कैसे?

पुलिस और इनकम टैक्स अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से लगभग 70,000 करोड़ रुपये के बिरयानी टैक्स घोटाले का पर्दाफाश किया है.

Biryani Tax Scam

(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On : 22 Feb 2026 10:40 AM IST

देशभर में कथित बिरयानी टैक्स घोटाले की जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. पुलिस और इनकम टैक्स अधिकारियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से लगभग 70,000 करोड़ रुपये के टैक्स चोरी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. जांच की शुरुआत हैदराबाद में बिरयानी रेस्टोरेंट की नियमित जांच से हुई थी, लेकिन बाद में यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर फैले बड़े घोटाले में तब्दील हो गया.

अधिकारियों के अनुसार, रेस्तरांओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बिलिंग सॉफ्टवेयर में सुनियोजित हेराफेरी के संकेत मिले. डिजिटल फोरेंसिक जांच में सामने आया कि ग्राहकों के भुगतान के बाद बिलों को या तो डिलीट कर दिया जाता था या उनमें बदलाव कर आय कम दिखाकर टैक्स बचाया जाता था.

कैसे हुआ खुलासा?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने एक विशाल बिलिंग डेटाबेस का विश्लेषण किया, जिसे देशभर के एक लाख से अधिक रेस्तरां इस्तेमाल कर रहे थे. लगभग 1.77 लाख रेस्तरां आईडी से जुड़े 60 टेराबाइट डेटा को खंगाला गया. कंप्यूटर टूल्स और एआई एल्गोरिद्म के जरिए बिलिंग पैटर्न का विश्लेषण किया गया, जिससे असामान्य ट्रांजैक्शन और डिलीट किए गए बिलों का खुलासा हुआ.

रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 से 2025-26 तक के छह वित्तीय वर्षों के लेनदेन रिकॉर्ड की गहन जांच की गई. इस दौरान करीब ₹2.43 लाख करोड़ के कुल बिलों का डेटा परखा गया. बड़े डेटा विश्लेषण और जनरेटिव एआई टूल्स ने छिपाए गए कारोबार का पता लगाने में अहम भूमिका निभाई. जांच में सामने आया कि देशभर में ₹13,000 करोड़ से अधिक मूल्य के बिल भुगतान के बाद हटाए गए थे. वहीं कुल छुपाए गए कारोबार का अनुमान लगभग ₹70,000 करोड़ तक पहुंच गया.

किन 2 राज्यों से हुआ बड़ा घोटाला

अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ही ₹5,100 करोड़ से अधिक की सीक्रेट बिक्री सामने आई. डिजिटल जांच की पुष्टि के लिए 40 रेस्तरां में भौतिक निरीक्षण किया गया. सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड की तुलना वास्तविक बिक्री से की गई, जिसमें लगभग ₹400 करोड़ की छिपी हुई बिक्री उजागर हुई. जांच एजेंसियों ने ओपन-सोर्स और सार्वजनिक ऑनलाइन डेटा का उपयोग कर एआई टूल्स के जरिए जीएसटी नंबरों को संबंधित रेस्तरां से जोड़ा. इससे विसंगतियों की पहचान तेज और सटीक तरीके से संभव हो सकी.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी?

कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात कर चोरी के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आए. इनमें कर्नाटक में सबसे अधिक मूल्य के रद्द किए गए बिल दर्ज किए गए. नमूना विश्लेषण के आधार पर अधिकारियों का अनुमान है कि देशभर में रेस्तरां की कुल बिक्री का 25 से 27 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है.

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