Bharat Bandh Today: क्या खुले रहेंगे बैंक और स्कूल? जानिए किन सेवाओं पर पड़ेगा असर

12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिल सकता है. इस बंद को लेकर विभिन्न राज्यों में प्रशासन सतर्क है;

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(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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Bharat Bandh Today: 12 फरवरी को देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिल सकता है. इस बंद को लेकर विभिन्न राज्यों में प्रशासन सतर्क है, क्योंकि बैंकिंग सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन, सरकारी कार्यालयों और औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. यूनियनों का कहना है कि यह हड़ताल सरकार की लेबर और अन्य नीतियों के खिलाफ एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन है.

ट्रेड यूनियन, किसान संगठन और कई सामाजिक समूहों ने दावा किया है कि इस बार का भारत बंद पिछले आंदोलनों से अधिक व्यापक होगा. उनका कहना है कि देशभर में करोड़ों लेबर इस हड़ताल में शामिल हो सकते हैं, जिससे 600 से अधिक जिलों में जनजीवन प्रभावित होने की उम्मीद है. विशेष रूप से केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में बंद का असर अधिक गहरा हो सकता है, जहां यूनियनों की मजबूत पकड़ मानी जाती है.

कितनी लेबर पहुंचने की उम्मीद?

यूनियनों का दावा है कि इस भारत बंद में देशभर से करीब 30 करोड़ मजदूर भाग ले सकते हैं. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर के मुताबिक, इस बार भागीदारी पिछले आंदोलनों से ज्यादा हो सकती है. उन्होंने बताया कि 9 जुलाई 2025 के प्रदर्शन में करीब 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे. यूनियनों के अनुसार, इस बार 600 से अधिक जिलों में बंद का असर पड़ सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह प्रभाव लगभग 550 जिलों तक सीमित था. संगठनों का मानना है कि बढ़ती भागीदारी से सरकार पर दबाव और अधिक मजबूत होगा.

किन संगठनों ने बुलाया भारत बंद?

यह हड़ताल दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाई गई है. इनमें AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, AIUTUC, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, छात्र एवं युवा संगठन भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं. संयुक्त मंच का कहना है कि यह आंदोलन लेबर और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट प्रयास है.

क्यों हो रहा विरोध?

यूनियन नेताओं का कहना है कि भारत बंद का मुख्य उद्देश्य मजबूत सामाजिक सुरक्षा उपायों और मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. वे चार नए लेबर कोड का विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि ये कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं, नौकरी की सुरक्षा घटाते हैं और नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करने और निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं.

अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?

भारत बंद के समर्थन में उतरे संगठनों ने कई अन्य मांगें भी रखी हैं। इनमें ड्राफ्ट सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को वापस लेने की मांग शामिल है. साथ ही शांति एक्ट को खत्म करने, मनरेगा (MGNREGA) को बहाल करने और विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 के तहत दी गई गारंटी को वापस लेने की भी मांग की जा रही है. यूनियनों का कहना है कि इन नीतियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छोटे किसानों पर प्रभाव पड़ सकता है.

बंद के चलते किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?

1. सरकारी बैंक और बीमा कार्यालय

2. राज्य परिवहन सेवाएं.

3. सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक उपक्रम (PSU)

4. औद्योगिक इकाइयां

5. कोयला और इस्पात क्षेत्र

6. विरोध प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के कार्य

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