Bengal SIR: बंगाल में वोट देने से पहले परिवार गिन रहा है चुनाव आयोग, 6 से ज़्यादा भाई-बहन होने पर वोटरों को EC का नोटिस

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं को नोटिस भेजने शुरू किए हैं, जिनके नाम एक ही माता-पिता से जुड़े छह से अधिक भाई-बहन के रूप में दर्ज हैं. आयोग को गलत लिंकिंग की आशंका है और मतदाताओं को दस्तावेज़ों के साथ सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है.;

( Image Source:  ANI )
Edited By :  प्रवीण सिंह
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पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान चुनाव आयोग (ECI) ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने राजनीतिक हलकों से लेकर आम मतदाताओं तक चिंता बढ़ा दी है. चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं को नोटिस भेजना शुरू किया है, जिनके नाम एक ही माता-पिता से जुड़े हुए छह से अधिक “भाई-बहन” के तौर पर दर्ज पाए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह नोटिस चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा पहचाने गए मामलों में जारी किए जा रहे हैं. आयोग को शक है कि कहीं इन मामलों में गलत लिंकिंग या फर्जी जानकारी तो नहीं दी गई है.

कैसे जारी हो रहे हैं ये नोटिस?

सूत्रों के मुताबिक, ये नोटिस केंद्रीय स्तर पर जनरेट किए जा रहे हैं और फिर चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए संबंधित इलाकों के अधिकारियों तक भेजे जा रहे हैं. इसके बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन नोटिसों को सीधे मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं. इन नोटिसों पर असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) के हस्ताक्षर और मुहर होती है. कानून के मुताबिक, किसी मतदाता की पात्रता पर शक होने की स्थिति में AERO या ERO को ही सुनवाई बुलाने का अधिकार है.

नोटिस में क्या लिखा है?

पश्चिम बंगाल में भेजे गए नोटिस बांग्ला भाषा में हैं और पहले से भरे हुए हैं. इनमें मतदाता का नाम, विधानसभा क्षेत्र और नोटिस जारी करने का कारण साफ तौर पर दर्ज है. नोटिस में लिखा गया है कि, “आपने जिस व्यक्ति को अपना पिता/माता बताया है, उसी व्यक्ति को छह अन्य लोगों ने भी अपना माता-पिता बताया है. इससे गलत कनेक्शन की आशंका पैदा होती है.” इसके बाद मतदाता को एक तय तारीख, समय और स्थान पर सुनवाई के लिए बुलाया गया है. साथ ही, चुनाव आयोग द्वारा तय की गई 13 तरह की दस्तावेज़ों की सूची में से जरूरी कागजात लाने को कहा गया है, ताकि मतदाता अपनी पात्रता साबित कर सके.

सिर्फ बंगाल ही नहीं, दूसरे राज्यों में भी होगा लागू

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पश्चिम बंगाल सिर्फ शुरुआत है. आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी ऐसे नोटिस जारी किए जा सकते हैं. यह पहला मौका है जब SIR के दौरान “एक ही माता-पिता से छह से ज्यादा बच्चे” वाले मामलों को आधार बनाकर नोटिस भेजे जा रहे हैं.

पहले SIR में क्या हुआ था?

बिहार में जब SIR शुरू हुआ था, तब नोटिस केवल उन मतदाताओं को भेजे गए थे जिनके दस्तावेज़ अधूरे या गलत पाए गए थे. लेकिन अब मामला आगे बढ़कर पारिवारिक विवरण और लिंकिंग तक पहुंच गया है.

SIR क्या है और क्यों हो रहा है?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को देश में SIR कराने का आदेश दिया था. इसका मकसद चुनावी सूची को शुरुआत से दोबारा तैयार करना है. SIR में हर मतदाता को एक एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होता है, जिसमें अपना नाम, माता-पिता या रिश्तेदारों की जानकारी, पुराने वोटर लिस्ट से लिंक देना जरूरी होता है. पश्चिम बंगाल में आखिरी बार 2002 में इंटेंसिव रिवीजन हुआ था. अगर किसी मतदाता का नाम पुराने रिकॉर्ड से मैच नहीं करता, तो नोटिस जारी किया जाता है.

ड्राफ्ट रोल में 58 लाख नाम हटाए गए

16 दिसंबर 2025 को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की, जिसमें 58 लाख नाम हटाए गए और इसका कारण मृत्यु, स्थानांतरण यानी जगह बदल लेना, अनुपस्थिति या एक से ज्यादा जगह नाम दर्ज होना रहा. इसके बाद राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने बताया कि 1.67 करोड़ मतदाता जांच के दायरे में हैं जिनमें से 23.64 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनके पिता के नाम पर 6 या उससे ज्यादा बच्चे दर्ज हैं.

TMC का आरोप: वोटरों को परेशान किया जा रहा है

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रवक्ता डॉ. शशि पांजा ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, “यह वोटर पर व्यक्तिगत हमला है. किसी से यह पूछना कि उसके छह भाई-बहन क्यों हैं, पूरी तरह असंवैधानिक है. इससे आम लोगों को डराया जा रहा है.” उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों को शक की नजर से देखा जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.

BJP का दावा: फर्जी लिंकिंग और अवैध घुसपैठ

दूसरी ओर, बीजेपी ने 26 नवंबर को चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा था. इसमें आरोप लगाया गया कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए वोटर लिस्ट में शामिल हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं. बीजेपी के अनुसार, “कुछ मामलों में मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को नए आवेदकों का माता-पिता दिखाया जा रहा है, ताकि फर्जी लिंक बनाए जा सकें.”

TMC की चुनौती: आंकड़े सामने लाए EC

बीजेपी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि पांजा ने कहा, “चुनाव आयोग बताए कि अब तक कितने बांग्लादेशी या रोहिंग्या पकड़े गए हैं. अगर कोई ठोस आंकड़ा है तो सामने लाया जाए. पूरे राज्य को शक के घेरे में रखना गलत है.”

सुनवाई और अंतिम सूची की तारीख

चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के मुताबिक 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक नोटिस और सुनवाई का समय तय है और 14 फरवरी 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट जारी होगी. हालांकि चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया बोझिल है और गरीब और अशिक्षित मतदाताओं के लिए मुश्किल है. साथ ही इससे बड़े पैमाने पर नाम कटने का खतरा है

क्यों अहम है यह पूरा मामला?

यह सिर्फ वोटर लिस्ट सुधार का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकता, मताधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सीधा जुड़ा मुद्दा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को कितना पारदर्शी और निष्पक्ष बनाता है, ताकि कोई भी असली मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न हो.

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