क्रैश से पहले ‘Oh sh*t oh sh*t’ बोलने वाली कैप्टन शांभवी पाठक कौन? कहानी अजित पवार के साथ प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाली युवा पायलट की
बारामती में हुए अजित पवार के विमान हादसे में जान गंवाने वाली कैप्टन शांभवी पाठक एक होनहार और प्रशिक्षित पायलट थीं. एयर फोर्स स्कूल से लेकर इंटरनेशनल ट्रेनिंग तक उनका सफर प्रेरणादायक रहा.;
कैप्टन शांभवी पाठक - यह नाम बुधवार की सुबह एक भीषण हादसे के साथ पूरे देश में गूंज उठा. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार को ले जा रहा लियरजेट-45 जब बारामती में दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान हादसे का शिकार हुआ, तो आग की लपटों के साथ कई सपने भी राख हो गए. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे से पहले विमान के मुख्य पायलट सुमित कपूर ने कोई ‘मेडे कॉल’ (आपात संदेश) जारी नहीं किया. हालांकि, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज अंतिम शब्द को-पायलट कैप्टन शांभवी पाठक के थे, जिनकी आवाज में घबराहट साफ झलकती है - “ओह शिट, ओह शिट.”
सूत्रों के अनुसार, उड़ान सामान्य रूप से संचालित हो रही थी, लेकिन अचानक तकनीकी गड़बड़ी या नियंत्रण खोने की आशंका जताई जा रही है. विमान तेजी से नीचे आया और बारामती क्षेत्र में क्रैश हो गया. हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक सभी यात्रियों की मौत हो चुकी थी.
शांभवी पाठक की उड़ान स्कूल के दिनों से शुरू हो गई थी. उन्होंने एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से पढ़ाई की, जहां अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा. आगे चलकर उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से एरोनॉटिक्स, एविएशन और एयरोस्पेस साइंस में बीएससी की डिग्री हासिल की. किताबों की समझ और तकनीकी पकड़ ने उन्हें भीड़ से अलग पहचान दी.
न्यूज़ीलैंड में पंखों को मिली धार
पायलट बनने के सपने को हकीकत में बदलने के लिए शांभवी ने न्यूज़ीलैंड इंटरनेशनल कमर्शियल पायलट अकादमी में कठोर प्रशिक्षण लिया. 2018–19 के बीच उन्होंने न्यूज़ीलैंड CAA और भारत के DGCA मानकों के अनुरूप कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) प्राप्त किया. यह वह दौर था जब उन्होंने मौसम, मशीन और मन तीनों से जूझना सीखा.
‘फ्रोजन ATPL’ और प्रोफेशनल पहचान
तकनीकी दक्षता की दिशा में उनका अगला बड़ा कदम ‘फ्रोजन ATPL’ हासिल करना था यानी एयरलाइन ट्रांसपोर्ट पायलट लाइसेंस की उच्चस्तरीय परीक्षाएं पास करना. यह उपलब्धि बताती है कि वह भविष्य में बड़े वाणिज्यिक विमानों की कमान संभालने की काबिलियत रखती थीं. बिज़नेस जेट सेगमेंट में उनकी ट्रेनिंग और प्रोफाइल उन्हें भरोसेमंद पेशेवर बनाती थी.
प्रशिक्षक से चार्टर ऑपरेशंस तक
शांभवी ने सिर्फ खुद उड़ान नहीं भरी, बल्कि दूसरों को उड़ना भी सिखाया. वे मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब में असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रहीं और फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रेटिंग (A) हासिल की. साथियों के मुताबिक, वह अनुशासित, शांत और सटीक निर्णय लेने वाली पायलट थीं जो प्रशिक्षक से चार्टर ऑपरेशंस तक का संक्रमण आत्मविश्वास के साथ करती थीं.
हादसे का दिन और आख़िरी उड़ान
बुधवार सुबह मुंबई से उड़ान भरकर बारामती पहुंचते वक्त लियरजेट-45 (VT-SSK) दूसरी लैंडिंग कोशिश में रनवे से फिसल गया और आग की चपेट में आ गया. विमान दिल्ली-आधारित चार्टर फर्म VSR द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था. कॉकपिट में शांभवी बतौर फर्स्ट ऑफिसर थीं ड्यूटी पर, जिम्मेदारी के साथ जहां कुछ ही पलों में सब कुछ खत्म हो गया.
दूसरे पायलट: कैप्टन सुमित कपूर
उसी कॉकपिट में पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमित कपूर भी थे, जिनके पास 16,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव बताया गया. लंबा अनुभव, विभिन्न परिस्थितियों की समझ और बिज़नेस जेट संचालन में दक्षता वे भारतीय एविएशन के अनुभवी नाम थे. इस हादसे में उनकी भी जान चली गई, जिससे यह त्रासदी और गहरी हो गई.
यादों में जिंदा अंतिम उड़ान
शांभवी पाठक को जानने वाले उन्हें मेधावी छात्रा, स्नेही बेटी-बहन और भरोसेमंद दोस्त बताते हैं. सोशल मीडिया पर आई संवेदनाओं ने दिखाया कि वह सिर्फ एक पायलट नहीं, बल्कि कई जिंदगियों की प्रेरणा थीं. एविएशन समुदाय आज एक ऐसे नाम को याद कर रहा है, जिसने कम उम्र में ऊंची उड़ान भरी और अपने पीछे समर्पण, साहस और सपनों की विरासत छोड़ गई.