Ajit Pawar Plane Crash: कैप्‍टन सुमित कपूर पर उंगली उठाने से पहले उन्‍हें अच्‍छे से जान तो लेते नेता जी

महाराष्ट्र में अजित पवार की मौत को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है. एनसीपी के वरिष्ठ नेता अमोल मिटकरी ने अकोला में शिव जयंती कार्यक्रम में इस हादसे को सिर्फ दुर्घटना मानने से इनकार किया और इसके पीछे साजिश की संभावना जताई. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विमान उड़ा रहे पायलट सुमित कपूर किसी तरह के आत्मघाती हमलावर थे?

Edited By :  समी सिद्दीकी
Updated On : 24 Feb 2026 4:27 PM IST

महाराष्ट्र में अजित पवार की मौत का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. अब उन्हीं की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एक सीनियर नेता ने ऐसा बयान दिया है जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि प्लेन उड़ा रहे कैप्‍टन सुमित कपूर क्या एक आत्मघाती हमलावर थे. यह बयान एनसीपी के एमएलसी अमोल मिटकरी ने अकोला जिले में आयोजित शिव जयंती कार्यक्रम के दौरान दिया. उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से पूछा, "क्या यह सिर्फ एक हादसा था, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी?"

हालांकि, नेता जी को समझना चाहिए कि राजीव गांधी को LTTE के एक सुसाइड बॉम्बर ने मारा था और यहां जो हुआ वह तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ था और जो पायलट सुमित कपूर इस प्लेन को उड़ा रहे थे, वह कोई नौसिखये नहीं काफी एक्सपीरियंस पायलट थे. एक रेप्यूटेड पायलट क्या ऐसा कर सकता है. बता दें, सुमित कपूर को 16,500 घंटे का अनुभव था, वह एक फैमिली मैन थे और हादसे से पहले उन्होंने 'मेडे अलर्ट' जारी किया था. क्या कोई आत्मघाती हमलावर मेडे अलर्ट जारी करने के बाद प्लेन को क्रैश कराएगा? सवाल यह भी उठता है कि दुनिया भर में इतने प्लेन हादसे होते हैं क्या सभी में यही आत्मघाती हमलावर वाला एंगल को डाल देना चाहिए. नेता जी को कुछ भी बोलने से पहले कैप्‍टन सुमित कपूर के बारे में अच्‍छे से जान लेना चाहिए था.

20,000 घंटे की उड़ान का अनुभव

कैप्टन सुमित कपूर एक साधारण पायलट नहीं थे. उनके पास करीब 20,000 घंटे की उड़ान का अनुभव था, जो नागरिक उड्डयन में असाधारण माना जाता है. उन्होंने दिल्ली के स्प्रिंगडेल्स स्कूल और एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से पढ़ाई की और फिर उच्च स्तरीय फ्लाइट ट्रेनिंग के लिए कनाडा गए. 1990 के दशक की शुरुआत में वह सहारा एयरलाइंस से जुड़े, जहां उन्हें चेयरमैन का “राइट हैंड” माना जाता था. बाद में उन्होंने जेट एयरवेज़ में भी काम किया. उनकी तकनीकी दक्षता और अनुशासन की वजह से उन्हें बोइंग 737 का एग्ज़ामिनर बनाया गया - यानी दूसरे पायलटों की ट्रेनिंग और मूल्यांकन की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी. उनके चाहने वाले उन्‍हें बनी कह कर पुकारते थे.

एक रियल फैमिली मैन

हालांकि उनका करियर ऊंचाइयों पर था, लेकिन ‘बनी’ जमीन से जुड़े इंसान थे. उनका परिवार मूल रूप से रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) से आया था, फिर मुरादाबाद और अंत में दिल्ली में बस गया. पंचकुइयां रोड से लेकर राजौरी गार्डन के एम-ब्लॉक तक, उनके परिवार की कहानी खुद दिल्ली के इतिहास जैसी है. पड़ोसियों ने उन्हें 40 साल तक एक चंचल लड़के से अनुभवी कमांडर बनते देखा. जिस घर में वह अस्थायी तौर पर किराए पर रह रहे थे, उसका केयरटेकर बताता है कि हादसे से सिर्फ दो दिन पहले उसने उन्हें देखा था. परिवार जल्द ही अपने नए बने घर में शिफ्ट होने वाला था.

पायलटों का पूरा परिवार

कैप्टन कपूर के परिवार में उड़ान केवल पेशा नहीं, विरासत थी. उनकी पत्नी, बुजुर्ग पिता, बेटा शिव - जो खुद वीएसआर एविएशन में पायलट है - और बेटी सान्या, जिनकी शादी भी एक पायलट से हुई है, सभी उनके पीछे रह गए. वह अक्सर लियरजेट विमान उड़ाते थे, जिसमें उनके साथ को-पायलट शांभवी रहती थीं, जिनकी भी हादसे में मौत हो गई. दुख की बात यह है कि शांभवी महज़ एक हफ्ते बाद कमांडर बनने वाली थीं.

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