Vijay की आखिरी फिल्म Jana Nayagan पर क्यों कर रहा है कोर्ट इतनी सख्ती, क्या है वो आरोप जिसके चलते रिलीज नहीं हो पा रही फिल्म?

मद्रास हाई कोर्ट ने थलपति विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ से जुड़े सेंसर विवाद में अहम फैसला सुनाया है. डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें CBFC को फिल्म को तुरंत यू/ए सर्टिफिकेट देने को कहा गया था. कोर्ट ने कहा कि सेंसर बोर्ड को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला, जो प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है.;

( Image Source:  IMDB )
By :  रूपाली राय
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मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में मंगलवार को थलपति विजय (Vijay) की फिल्म 'जना नायकन' (Jana Nayagan) से जुड़े एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है.  कोर्ट ने पहले एक सिंगल जज द्वारा दिए गए उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) को फिल्म को तुरंत यू/ए सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था.  अब यह पूरा मामला फिर से नए सिरे से सुनवाई के लिए सिंगल जज के पास वापस भेज दिया गया है.

फिल्म 'जना नायकन' तमिल सुपरस्टार विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है, क्योंकि वे अब पूरी तरह से राजनीति में आ चुके हैं और अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) के साथ 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने वाले हैं. यह फिल्म राजनीतिक एक्शन ड्रामा है, जिसे एच. विनोथ ने डायरेक्ट किया है. इसमें पूजा हेगड़े, बॉबी देओल जैसे कलाकार भी हैं.  फिल्म को दिसंबर 2025 में सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था. जांच समिति (एग्जामिनिंग कमिटी) ने फिल्म देखी और कुछ छोटे-मोटे कट्स/संशोधन (जैसे कुछ दृश्य हटाना या डायलॉग म्यूट करना) के बाद यू/ए 16+ सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की. 

क्या हुआ मेकर्स के साथ हेर-फेर 

निर्माताओं (केवीएन प्रोडक्शंस) को बताया गया कि सर्टिफिकेट मिल जाएगा. लेकिन अचानक 5 जनवरी 2026 को सीबीएफसी ने फिल्म को रिवाइजिंग कमिटी के पास भेज दिया. वजह बताई गई कि जांच समिति के एक सदस्य ने शिकायत की थी कि उनकी आपत्तियां ठीक से सुनी नहीं गईं. निर्माताओं ने कहा कि उन्होंने पहले ही सारे सुझाव मान लिए थे, फिर भी सर्टिफिकेट नहीं मिल रहा. इससे फिल्म की रिलीज (जो 9 जनवरी 2026 को पोंगल के लिए प्लान थी लेकिन रुक गई. जिससे मेकर को 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. 

याचिका में दोबारा संशोधन हो 

फिर मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा 9 जनवरी को एक सिंगल जज ने निर्माताओं के पक्ष में फैसला दिया और सीबीएफसी को तुरंत सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया. लेकिन उसी दिन सीबीएफसी ने अपील की और डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस की बेंच) ने उस आदेश पर रोक लगा दी. 20 जनवरी को लंबी सुनवाई हुई, फैसला सुरक्षित रखा गया. अब मंगलवार 27 जनवरी 2026 को डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (natural justice) का पालन नहीं हुआ था यानी सीबीएफसी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया था. कोर्ट ने मामले को वापस सिंगल जज के पास भेज दिया, जहां अब दोबारा सुनवाई होगी. निर्माताओं को याचिका में संशोधन करने को कहा गया है. 

आखिर क्यों मचा इतना बवाल इस फिल्म पर?

इस फिल्म पर बवाल मुख्य रूप से इन वजहों से मचा है:

.धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले दृश्य- शिकायत में कहा गया कि फिल्म के कुछ सीन या डायलॉग किसी धर्म की भावनाओं को आहत कर सकते हैं. हालांकि ठीक-ठीक डिटेल्स सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन यह आमतौर पर सेंसरशिप के बड़े मुद्दों में से एक होता है. 

.आर्म्ड फोर्सेस को गलत तरह से दिखाया- फिल्म में आर्मी या सैनिकों से जुड़े कुछ सीन ऐसे थे, जिन्हें गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगा.  शिकायत में यह भी कहा गया कि कुछ लोगो या चिन्हों का इस्तेमाल बिना सही अनुमति के किया गया. 

.राजनीतिक कनेक्शन और समय- विजय अब एक राजनीतिक नेता हैं. उनकी पार्टी 2026 के चुनाव लड़ रही है. कई लोग मानते हैं कि फिल्म में राजनीतिक मैसेज हैं, जो सत्ताधारी या विरोधी पार्टियों को पसंद नहीं आ रहे. फिल्म को विजय का 'पॉलिटिकल लॉन्चिंग पैड' भी कहा जा रहा है. इसलिए कुछ लोग इसे राजनीतिक दबाव या साजिश मान रहे हैं. 

.सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया पर सवाल- निर्माताओं का कहना है कि जांच समिति ने पहले ही ओके दे दिया था, फिर एक सदस्य की शिकायत पर दोबारा रिव्यू क्यों? यह प्रक्रिया में गड़बड़ी दिखाता है. वहीं सीबीएफसी कहता है कि शिकायत आई थी, तो प्रक्रिया के तहत रिव्यू जरूरी था।

.रिलीज डेट का दबाव- फिल्म की रिलीज पोंगल पर थी, जो तमिलनाडु में बहुत बड़ा त्योहार है. रिलीज डेट पहले ही घोषित कर दी गई थी, लेकिन सर्टिफिकेट नहीं मिला. कोर्ट ने भी निर्माताओं से पूछा कि बिना सर्टिफिकेट के रिलीज डेट क्यों घोषित की?. 

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