Shahid Kapoor की O' Romeo पर बड़ा कोर्ट फैसला, रिलीज से पहले खत्म हुआ कानूनी विवाद
शाहिद कपूर की अपकमिंग फिल्म 'ओ रोमियो' रिलीज से पहले कानूनी विवाद में फंस गई थी. मुंबई सिविल कोर्ट ने अंतरिम रोक की मांग खारिज करते हुए फिल्म को रिलीज की अनुमति दे दी.;
शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की नई फिल्म 'ओ रोमियो' (O'Romeo) रिलीज से ठीक पहले एक बड़े कानूनी विवाद में फंस गई थी, लेकिन अब अदालत ने फिल्म को हरी झंडी दे दी है. यह फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज ने बनाई है, जो गैंगस्टर वाली दुनिया पर आधारित एक एक्शन ड्रामा है. फिल्म की कहानी हुसैन जैदी की किताब 'माफिया: क्वींस ऑफ मुंबई' से प्रेरित है. इसमें शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में हैं, और तृप्ति डिमरी उनके साथ हैं. फिल्म में और भी कई बड़े नाम हैं जैसे विक्रांत मैसी, तमन्ना भाटिया, दिशा पटानी, नाना पाटेकर और फैरदा जलाल. फिल्म की रिलीज से पहले मुश्किल तब शुरू हुई जब मुंबई के एक मशहूर गैंगस्टर हुसैन उस्तारा (जिनका असली नाम हुसैन शेख था) की बेटी सनोबर शेख ने आपत्ति जताई.
सनोबर ने दावा किया कि यह फिल्म उनके पिता के जीवन पर आधारित एक बायोपिक है. उन्होंने कहा कि फिल्म में उनके पिता को गलत तरीके से दिखाया गया है, जैसे कि वे एक गैंगस्टर थे, और इससे उनकी छवि, परिवार की इज्जत और निजता का हनन हो रहा है. सनोबर ने फिल्म के निर्माता साजिद नाडियाडवाला और निर्देशक विशाल भारद्वाज और किताब के राइटर हुसैन जैदी के खिलाफ मुंबई की सिविल अदालत में केस दायर किया. उन्होंने अंतरिम राहत (अस्थायी रोक) की मांग की थी, यानी फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए, जब तक मुकदमा पूरी तरह सुनवाई न हो जाए. उन्होंने फिल्म की प्री-स्क्रीनिंग (पहले दिखाने) की भी मांग की थी.
क्यों फंसी थी फिल्म ‘ओ रोमियो’
सनोबर ने पहले भी फिल्म मेकर्स को कई कानूनी नोटिस भेजे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना परिवार की अनुमति के उनके पिता के जीवन की कहानी का इस्तेमाल किया गया है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 2 करोड़ से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का मुआवजा (कॉम्पेंसेशन) मांगा था. लेकिन फिल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज ने अदालत में हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करके साफ कहा कि 'ओ रोमियो' कोई बायोपिक नहीं है. यह पूरी तरह से एक काल्पनिक कहानी है, जो सिर्फ किताब की थीम से इंस्पायर्ड है.
फिल्ममेकर्स ने अदालत में क्या दलील दी?
फिल्म में एक बड़ा डिस्क्लेमर भी है, जिसमें लिखा है कि 'किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई समानता सिर्फ संयोगवश है'. विशाल भारद्वाज ने यह भी कहा कि सनोबर का यह केस झूठा, बेबुनियाद और परेशान करने वाला है. उनके मुताबिक, यह केस फिल्म रिलीज से ठीक पहले आखिरी समय में पैसे ऐंठने (फाइनेंशियल सेटलमेंट) की कोशिश है. मुंबई की सिविल अदालत ने 6 फरवरी 2026 को सुनवाई की और सनोबर की अंतरिम याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि सनोबर अपना केस मजबूती से साबित नहीं कर पाईं. जज ने यह भी नोट किया कि पहले सनोबर ने पैसे की मांग की थी, इसलिए रिलीज पर रोक लगाना कानूनी रूप से सही नहीं है.
रिलीज पर अब कोई रोक नहीं
इस फैसले के बाद फिल्म अब 13 फरवरी 2026 को थिएटर्स में रिलीज हो सकेगी, जैसा पहले प्लान था. हालांकि, मुख्य मुकदमा अदालत में अभी भी चल रहा है, लेकिन फिलहाल फिल्म पर कोई रोक नहीं है. यह मामला दिखाता है कि बॉलीवुड में जब कोई फिल्म रियल लाइफ की घटनाओं या किताबों से प्रेरित होती है, तो कभी-कभी परिवार वाले आपत्ति जता देते हैं, लेकिन अगर फिल्म फिक्शन बताई जाती है और डिस्क्लेमर होता है, तो अदालत अक्सर रिलीज की इजाजत दे देती है। अब सबकी नजरें इस फिल्म पर हैं कि बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन करती है!