प्लीज गेम पर बैन लगाओ! Sonu Sood ने गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस पर दिया इमोशनल बयान
गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग की लत से तीन नाबालिग बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी. घटना पर सोनू सूद ने सोशल मीडिया और गेमिंग पर बैन की मांग की.;
ऑनलाइन गेमिंग की लत कितनी खतरनाक और जानलेवा हो सकती है, इसका एक बहुत ही दर्दनाक और दिल दहला देने वाला उदाहरण हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर में सामने आया है. यहां तीन सगी बहनों ने एक बहुमंजिला इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और लोगों के मन में गहरा सदमा पहुंचाया है.
तीनों बहनों के नाम थे - निशिका (16 साल), प्राची (14 साल) और पाखी (12 साल). यह घटना गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र में हुई, जहां वे लोग एक आवासीय सोसाइटी में रहती थीं. रात के करीब 2 बजे के आसपास अचानक तीनों बहनों के नीचे गिरने की तेज आवाज सुनाई दी. आस-पास के लोग दौड़े आए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
सोनू सूद ने की अपील
इस पूरी घटना पर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने बहुत दुख जताया है. उन्होंने अपने एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट करके लिखा कि यह मौतें न हिंसा से हुईं, न गरीबी से, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत के उस अनदेखे दबाव से हुईं जो बच्चों पर पड़ रहा है. सोनू सूद ने कहा, 'बच्चों को मार्गदर्शन और प्यार की जरूरत है, किसी एल्गोरिदम की नहीं. बचपन को देखभाल चाहिए, लगातार स्क्रीन देखने की नहीं.' सोनू सूद ने पहले भी दिसंबर 2025 में ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर पूरी तरह बैन लगाने की मांग की थी. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण दिया था, जहां 10 दिसंबर 2025 से ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर सख्त रोक लगा दी गई है.
बच्चों को स्क्रीन से दूर रखो
सोनू सूद ने भारत सरकार से अपील की थी कि हमारे देश में भी ऐसा ही कदम उठाया जाए, ताकि बच्चे सच्चा बचपन जी सकें, परिवार से मजबूत रिश्ते बना सकें और स्क्रीन की लत से दूर रह सकें. इस घटना के बाद सोनू सूद ने फिर से लिखा, 'यह दोष लगाने की बात नहीं है, बल्कि सुरक्षा की बात है. इससे पहले कि और ज्यादा बच्चे इस जाल में फंसें, अब एक्शन लेने का समय है. इसे एक और ऐसी खबर न बनने दें जिसे हम सब भूल जाएं.'
टास्क-बेस्ड गेम ने छीनी 3 जिंदगियां
पुलिस की शुरुआती जांच और परिवार वालों की बातों से पता चला कि तीनों बहनों को मोबाइल फोन और खास तौर पर एक कोरियन ऑनलाइन गेम की बहुत बुरी लत लग चुकी थी. यह गेम टास्क-बेस्ड था, जिसमें खिलाड़ियों को एक-एक करके अलग-अलग टास्क दिए जाते थे. शुरुआत में छोटे-छोटे काम जैसे किसी से बात न करना, अकेले रहना, फिर धीरे-धीरे घरवालों से दूरी बनाना, रोना-धोना, खाना-पीना छोड़ देना और आखिर में सबसे खतरनाक टास्क - खुद को नुकसान पहुंचाना या सुसाइड जैसा कुछ. पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें बहनों ने 'सॉरी पापा' लिखा था और गेम के बारे में कुछ इशारे किए थे.
फोन इस्तेमाल पर पाबंदी
परिवार वालों ने बताया कि लॉकडाउन के समय से ही तीनों को मोबाइल की आदत पड़ गई थी. वे तीनों हर काम साथ करती थीं- साथ खातीं, साथ नहातीं, साथ सोतीं और साथ ही गेम खेलतीं. माता-पिता को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने कई बार मोबाइल छीनने की कोशिश की, डांट-फटकार लगाई और फोन इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी. लेकिन इसी वजह से तीनों बहुत परेशान और उदास हो गई थीं. रोक लगने के बाद उनका व्यवहार बदल गया था और वे और ज्यादा चिड़चिड़ी हो गई थी. यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों पर पड़ रहे गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है. ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया कई बार बच्चों के दिमाग को इस तरह प्रभावित करते हैं कि वे हकीकत और फैंटसी में फर्क नहीं समझ पाते. खासकर किशोरावस्था में दिमाग अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वे आसानी से गेम के टास्क या चुनौतियों में फंस जाते हैं.