एक्टर से पहले LIC एजेंट, रेफ्यूजी नहीं समझौता एक्सप्रेस होती डेब्यू फिल्म; Abhishek Bachchan की अनकही कहानी

डिस्लेक्सिया, पिता का कर्ज, रिजेक्शन और फ्लॉप फिल्मों से जूझते हुए अभिषेक बच्चन कैसे बने स्टार? जानिए उनकी जिंदगी की पूरी कहानी.;

( Image Source:  Instagram: bachchan )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 5 Feb 2026 7:00 AM IST

मुंबई की चमचमाती दुनिया में एक स्टारकिड पैदा हुआ था, जिसके घर में पहले से ही रोशनी की कमी नहीं थी. उसका नाम था अभिषेक. पिता थे महानायक अमिताभ बच्चन, एक्ट्रेस मां जया बच्चन, दादा कवि हरिवंश राय बच्चन. सब कुछ परफेक्ट लगता था, लेकिन जिंदगी ने उसे बहुत जल्दी ही सिखा दिया कि चमक के पीछे छिपे अंधेरे भी होते हैं. 9 साल की छोटी उम्र में ही अभिषेक को पता चला कि उसे डिस्लेक्सिया है. पढ़ाई में बहुत मुश्किल होती थी. अक्षर उलट-पुलट हो जाते, समझ नहीं आता.

लेकिन परिवार ने उसे यूरोप के एक स्कूल में भेजा, जहां उसने धीरे-धीरे खुद को संभाला. अभिषेक जो किताबों बचपन से किताबों से डरते थे, वही बाद में स्क्रीन पर इतने अलग-अलग किरदार निभाएगा. जब वो बड़ा हुआ, तो सपना था बिजनेस मैन बनने का. बॉस्टन यूनिवर्सिटी में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई शुरू की. कॉरपोरेट की दुनिया में नाम कमाना चाहता था. लेकिन तभी घर में तूफान आया पिता अमिताभ बच्चन की कंपनी डूब गई, कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया कि परिवार की हालत खराब हो गई.

एक्टर से पहले LIC का एजेंट

अभिषेक को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी घर लौटकर आए. उस दौर में उसने LIC का एजेंट भी बनकर काम किया, पिता की कंपनी में छोटे-मोटे काम किए. वो दिन थे जब सुपरस्टार का बेटा भी सड़क पर सपनों को तलाश रहा था. फिर फिल्मों की तरफ मुड़ गया. लेकिन यहां भी राह आसान नहीं थी. शुरुआत में उन्हें लगा कि वह एक बड़े स्टार के बेटे है इसलिए काम आसानी से मिल जाएगा लेकिन ऐसा नहीं था. अभिषेक को अपने नाम के पीछे बच्चन बहुत सालों तक भारी पड़ा न सिर्फ काम ढूंढने के मामले में बल्कि एक्टिंग करियर शुरू करने में भी. कई डायरेक्टर, प्रोड्यूसर मिले, स्क्रिप्ट दिखाई, मिन्नतें की पर कोई तैयार नहीं हुआ. 'बिग बी का बेटा है, तुलना होगी, रिस्क है' यही सुनता रहा.  दो साल तक दर-दर भटकता रहा. 

'समझौता एक्सप्रेस' होती पहली फिल्म 

हालांकि अभिषेक के फैंस जानते है कि उनकी पहली फिल्म रिफ्यूजी है लेकिन ऐसा नहीं है. शिव तलवार के यूट्यूब चैनल पर एक बार राकेश महरा ने जिक्र किया था कि उन्होंने कमलेश पांडे के साथ अपनी पहली फिल्म 'समझौता एक्सप्रेस' लिखी थी. यह फिल्म अभिषेक डेब्यू फिल्म होती लेकिन फिल्म बनने से पहले ही विवाद बन चुकी थी क्योंकि अभिषेक को इस फिल्म में एक पाकिस्तानी आतंकवादी का किरदार निभा था. गलाट्टा प्लस के एक पुराने इंटरव्यू में अभिषेक बच्चन ने शेयर किया था कि डेब्यू के समय इंडस्ट्री में उनके लिए रास्ता कितना मुश्किल था, भले ही बाहर से लगता हो कि 'बिग बी का बेटा है' तो सब आसान होगा.

जब सुनाई अमिताभ को पूरी स्क्रिप्ट 

अभिषेक ने कहा, 'लोग मेरे साथ काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे. मुझे लगता है कि मैं उन सभी निर्देशकों से मिला जिनसे मिल सकता था, और उन्होंने बहुत सम्मान के साथ मना कर दिया. सब कहते, 'हम आपको लॉन्च करने की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते' मैं काफी निराश हो रहा था.' स्क्रिप्ट तैयार होते ही अभिषेक और राकेश अमिताभ स्टोरी सुनाने के लिए पहुंचे. अभिषेक ने कहा, 'हमने पापा को पूरी स्क्रिप्ट सुनाई, उसके बाद सन्नाटा छा गया. मेरे पापा ने हमारी तरफ देखा और कहा, 'लड़कों, बकवास स्क्रिप्ट है, निकल जाओ.'आखिरकार उन्होंने जेपी दत्ता की फिल्म 'रिफ्यूजी' से डेब्यू किया और राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ फिल्म ' दिल्ली-6' में काम किया. 

ऐसे शुरू हुआ करियर 

2000 में 'रिफ्यूजी' से डेब्यू हुआ. फिल्म ठीक-ठाक चली, लेकिन अभिषेक को वो सफलता नहीं मिली जो वो चाहते थे. अगले 3-4 साल बहुत मुश्किल थे 'बस इतना सा ख्वाब है', 'रन', जैसी कई फिल्में फ्लॉप हुईं. लोग कहते, 'बिग बी का बेटा है, बस नाम से चल रहा है.' अभिषेक ने खुद कई इंटरव्यू में बताया कि वो निराश हो चुके थे, कई बार लगा कि शायद ये फील्ड उनके लिए नहीं. फिर साल 2004 आया 'धूम' में पुलिस ऑफिसर विक्रम का नेगेटिव रोल निभाया ये फिल्म सुपरहिट हुई. पहली बार लोग अभिषेक को अलग नजर से देखने लगे. उसी साल युवा में मणि रत्नम के साथ काम किया, क्रिटिकल अक्लेम मिला. 'सरकार' (2005) में अमिताभ के साथ नेगेटिव रोल फिर कमाल. 'बंटी और बबली' (2005) में कॉमेडी में दम दिखाया, फिल्म ब्लॉकबस्टर बनी. 2007 में 'गुरु' आईअभिषेक का सबसे बड़ा सोलो हीरो रोल. अभिषेक ने धीरूभाई अंबानी से इंस्पायर्ड किरदार फिल्म हिट हुई, अभिषेक को बेस्ट एक्टर के लिए नॉमिनेशन मिला. अब वो स्टार बन चुके थे. उसके बाद 'धूम 2', 'कभी अलविदा ना कहना' जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल्स में भी कमाल किया. 

एक्टर ही नहीं मजबूत बिजनेसमैन भी हैं

फिर कुछ साल मुश्किल आए कई फिल्में नहीं चली. लेकिन अभिषेक ने कभी रुकना नहीं सीखा. उन्होंने OTT में कदम रखा 'बॉब बिस्वास', 'लुडो', 'मनमर्जियां', 'घूमर', 'आई वांट टू टॉक' जैसी फिल्मों में गहरे, अलग रोल्स किए. 2025 में भी वो 25 साल पूरे करने के बाद कहते हैं कि वो अभी भी सीख रहे हैं, फ्लॉप से डरते नहीं बल्कि उनसे सीखते हैं. साथ ही बिजनेस में हाथ आजमाया 'कबड्डी टीम' (जयपुर पिंक पैंथर्स), प्रोडक्शन, स्पोर्ट्स इन्वेस्टमेंट. आज वो सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि एक मजबूत बिजनेसमैन भी हैं. 

ऐश्वर्या राय जीवन में कैसे आईं?

ये कहानी 1999-2000 से शुरू होती है. अभिषेक और ऐश्वर्या पहली बार मिले 'ढाई अक्षर प्रेम के' (2000) के फोटोशूट पर. अभिषेक ने बताया कि वो सोचते थे ऐश्वर्या कोई डिवा होगी, लेकिन वो बहुत डाउन-टू-अर्थ और वंडरफुल निकलीं. दोनों दोस्त बन गए फिर 'कुछ ना कहो' (2003) में साथ काम किया दोस्ती और गहरी हुई. लेकिन प्यार तब पनपा जब 'उमराव जान' (2006) की शूटिंग हो रही थी. अभिषेक ने कई इंटरव्यू में कबूल किया कि 'उमराव जान' के सेट पर उन्हें ऐश्वर्या से प्यार हो गया. उसी समय 'धूम 2' और 'कजरा रे' (बंटी और बबली का आइटम सॉन्ग) में भी साथ काम किया वो केमिस्ट्री सब देख रहे थे. 2007 में गुरु की प्रमोशन के दौरान न्यूयॉर्क में अभिषेक ने ऐश्वर्या को प्रपोज किया एक बालकनी पर. ऐश्वर्या ने हां कह दी और जनवरी 2007 में एंगेजमेंट अनाउंस हुई, और 20 अप्रैल 2007 को ट्रेडिशनल तरीके से शादी हुई जिसे पूरी दुनिया देख रही थी. ये शादी बॉलीवुड की सबसे ग्रैंड और फेयरिटेल जैसी लगी. शादी के बाद ऐश्वर्या ने कुछ समय ब्रेक लिया, लेकिन वापसी की. 2011 में बेटी आराध्या आई दोनों ने साथ में कई फिल्में कीं, लेकिन पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाए रखा. अभिषेक कहते हैं कि ऐश्वर्या उनके लिए सपोर्ट सिस्टम हैं और वो भी।अभिषेक की जिंदगी ये सिखाती है कि सफलता रातोंरात नहीं आती. 

Similar News