आगरा की नवाब बानो जो कहलाई Unkissed Girl of India, निम्मी की कहानी जिसने हॉलीवुड को भी ठुकराया
आगरा की नवाब बानो से बॉलीवुड स्टार निम्मी बनीं, जिन्होंने राज कपूर, दिलीप कुमार संग हिट फिल्में दीं। 'Unkissed Girl' कहलायीं, हॉलीवुड ठुकराया.;
Nimmi: 18 फरवरी 1933 को आगरा की एक साधारण-सी गली में एक प्यारी सी लड़की पैदा हुई नाम रखा गया नवाब बानो. उनके पिता अब्दुल हकीम एक मिलिट्री कॉन्ट्रैक्टर थे, और मां वहीदान बाई एक मशहूर गायिका, डांसर और एक्ट्रेस थीं. लेकिन किस्मत ने बहुत जल्दी ही नवाब का साथ छोड़ दिया. जब वो सिर्फ 11 साल की थीं, तभी उनकी मां का अचानक देहांत हो गया. पिता दूर थे, परिवार बिखर गया. नवाब अपनी नानी के साथ ऐब्टाबाद (अब पाकिस्तान में) चली गईं. वहां की शांत जिंदगी में वो बड़ी हुईं, लेकिन दिल में कहीं न कहीं फिल्मों का सपना छिपा था क्योंकि मां भी तो इसी दुनिया की थीं फिर मुंबई आईं.
एक दिन मौसी या मां की दोस्त ने उन्हें महबूब खान के स्टूडियो में अंदाज़ की शूटिंग देखने ले गईं. वहां राज कपूर ने उन्हें देखा बड़ी-बड़ी आंखें, मासूम चेहरा, देसी सादगी. राज कपूर को लगा, यही लड़की मेरी नई फिल्म बरसात के लिए परफेक्ट है. उन्होंने नवाब को स्क्रीन टेस्ट दिया और नाम रख दिया निम्मी कहा जाता है कि राज कपूर ने ही ये प्यारा नाम दिया था. 1949 में बरसात रिलीज़ हुई निम्मी नई-नई एक्ट्रेस थीं, लेकिन उनकी आंखों में जो भाव थे, वो सीधे दिल तक पहुंच गए.
आज भी हिट है उनका यह गाना
लता मंगेशकर की आवाज़ में उनके गाने 'बरसात में हमसे मिले तुम', 'पतली कमर है तेरी' हर तरफ गूंजने लगे. फिल्म सुपरहिट हुई, और निम्मी रातोंरात स्टार बन गईं. राज कपूर ने उन्हें सहज बनाने के लिए एक प्यारा रिश्ता भी बनाया राखी का. हर रक्षाबंधन पर निम्मी राज कपूर को राखी बांधती रहीं, और ये सिलसिला 1988 में राज कपूर के जाने तक चलता रहा. निम्मी का भूषण के साथ 'बरसात की एक रात' फिल्म से बड़ा मशहूर गाना है 'ना तो कारवां की तलाश है' जिसे हालिया फिल्म 'धुरंधर' में न्यू वर्जन में सूना गया.
सिल्वर स्क्रीन की त्यागी रानी
फिर आईं फिल्में एक के बाद एक 'दीदार', 'दाग', 'आन', 'उड़न खटोला', 'बसंत बहार', 'भाई भाई'. निम्मी ने दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद जैसे दिग्गजों के साथ काम किया. उनकी जोड़ी दिलीप कुमार के साथ खासतौर पर मशहूर हुई. लोग उन्हें 'सिल्वर स्क्रीन की त्यागी रानी' कहने लगे, क्योंकि उनके किरदारों में त्याग, भावुकता और गांव की मासूम लड़की का जादू था. निम्मी बहुत सोच-समझकर फिल्म चुनती थीं. वो पहले पूरी कहानी और अपना किरदार अच्छे से समझतीं, फिर हां कहतीं. इसलिए प्रोड्यूसर उनकी मंजूरी के लिए हफ्तों इंतजार करते थे. लेकिन एक बार जब वो हां कह देतीं, तो उनकी एंक्टिग इतनी शानदार होता कि फिल्म हिट हो जाती.
क्यों कहलाईं 'Unkissed Girl of India'?
लंदन में वो यादगार किस्सा 'Unkissed Girl of India'1952 में आई आन भारत की पहली पूरी टेक्नीकलर फिल्म. इसमें निम्मी ने दिलीप कुमार के साथ लीड रोल निभाया. फिल्म का प्रीमियर लंदन के रियाल्टो थिएटर में हुआ. महबूब खान, उनकी पत्नी और निम्मी वहां गए. पार्टी में हॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे आए, जिनमें शामिल थे रोमांटिक हीरो एरॉल फ्लिन. पार्टी में एरॉल फ्लिन ने अपनी वेस्टर्न परंपरा के मुताबिक निम्मी का हाथ चूमने की कोशिश की. लेकिन निम्मी ने फटाक से हाथ खींच लिया और साफ-साफ कहा- I am an Indian girl, you cannot do that! मैं एक भारतीय लड़की हूं, आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते!. अगले दिन अखबारों में खबर छाई 'The Unkissed Girl of India' दुनिया भर में सुर्खियां बनीं. हॉलीवुड के बड़े डायरेक्टर जैसे सेसिल बी. डी मिल ने उन्हें कई फिल्मों के ऑफर दिए, लेकिन निम्मी ने सब ठुकरा दिया. उन्होंने कहा, 'मैं बहुत हिंदुस्तानी हूं. अपनी संस्कृति, परिवार और जड़ों से दूर नहीं जा सकती.'
गायिका निम्मी और शांत जिंदगी
निम्मी सिर्फ एक्ट्रेस ही नहीं, एक अच्छी सिंगर भी थीं. उनकी कई फिल्मों में उनके गाने लोगों को बहुत पसंद आए 'उड़न खटोला', 'भाई भाई', 'बसंत बहार', 'कुंदन' जैसी फिल्मों में।1960 के दशक में निम्मी ने फिल्मों से अलविदा कहा. 1965 में उन्होंने स्क्रिप्टराइटर लेखक एस. अली रजा से शादी की. अली रजा 'आन' की स्क्रिप्ट लिख चुके थे. शादी के बाद निम्मी ने पूरी तरह घर-परिवार को चुना. कोई बच्चे नहीं हुए, लेकिन उन्होंने एक गोद लिया हुआ बेटा पाला. रिटायरमेंट के बाद वो मुंबई में शांत, सादगी भरा जीवन जीती रहीं. कभी-कभी पुरानी फिल्मों के इवेंट में नजर आतीं, लेकिन हमेशा स्कैंडल से दूर.
आखिरी पन्ना और अमर यादें
25 मार्च 2020 को 87 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निम्मी ने आखिरी सांस ली. लेकिन उनकी कहानी आज भी जिंदा है. एक लड़की जो आगरा से निकलकर बॉलीवुड की चमकदार दुनिया में स्टार बनी, हॉलीवुड को ठुकराया, अपनी संस्कृति का मान रखा, राखी का रिश्ता निभाया, और आखिर में सादगी से विदा हुई.