Danish Pandor के लिए खौफनाक था कटे सिर से फुटबॉल का सीन, बताया शूट के पीछे का डरावना सच
'धुरंधर 2' में कटे सिर से फुटबॉल वाले सीन को लेकर दानिश पंडोर ने किया बड़ा खुलासा. जानिए असली घटना, शूटिंग का डर और उनकी तैयारी की पूरी कहानी.
'धुरंधर 2' (Dhurandhar 2) के सभी कलाकार अब दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना चुके हैं. खास तौर पर उजैर बलोच का रोल निभाने वाले दानिश पंडोर पहले ही भाग से ही काफी चर्चा में रहे हैं. लड़कियों में तो उनका अलग ही दीवाना क्रेज है. असल जिंदगी में दानिश बहुत शांत और इंट्रोवर्ट स्वभाव के इंसान हैं, लेकिन फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' में उनके किरदार ने एक बेहद खौफनाक और डरावना सीन दिया है. यह सीन ल्यारी में हुई एक असली घटना से इंस्पायर्ड था, जिसमें दानिश को कटे हुए सिर के साथ फुटबॉल खेलने का सीन करना पड़ा. अब दानिश ने एक इंटरव्यू में खुलकर बताया कि उस खतरनाक सीन को करते समय उनके दिमाग में क्या-क्या चल रहा था.
दानिश पंडोर हाल ही में ENT Live से बात करते हुए उस सीन के बारे में बताते हैं. उन्होंने कहा, 'जब मैंने उस सीन के बारे में पढ़ा तो सच में डर लग गया. वो घटना असल जिंदगी में हो चुकी है. मैं सोच भी नहीं सकता था कि कोई इंसान ऐसा कर सकता है. मैं अपनी तारीफ नहीं करना चाहता, लेकिन एक अच्छा एक्टर होने की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि जब वो किसी किरदार पर काम करता है तो पूरी लगन और दिल से काम करता है. जैसे-जैसे आप स्क्रिप्ट पढ़ते जाते हैं, धीरे-धीरे उस किरदार की सोच, उसका तरीका और उसका व्यवहार आपके दिमाग में बनने लगता है. वो किरदार आपके सामने फिजिकली मौजूद नहीं होता, लेकिन आप क्रिएटिव तरीके से उस किरदार को अपनी कल्पना से जीवंत बना सकते हैं.
सीन करने में लगी थी बहुत मेहनत
दानिश आगे बताते हैं कि जब उन्हें यह सीन पहली बार सुनाया गया तो वे उसे करने के लिए काफी एक्साइटेड हो गए थे. हर एक्टर के जीवन में कुछ ऐसे सीन होते हैं जिन्हें करने की उसे बहुत इच्छा होती है. उन्होंने कहा, 'उस सीन को करने में एक तरफ तो बहुत एक्साइटमेंट थी, दूसरी तरफ थोड़ी नर्वसनेस और झिझक भी थी. लेकिन एक्साइटमेंट भी बहुत ज्यादा थी. मैं लगातार उसी सीन के बारे में सोचता रहता था. आखिरकार जब शूटिंग का समय आया तो मैं पूरी तरह से उस पल में खो गया और सीन कर लिया. हर शॉट खत्म होने के बाद मैं तुरंत डायरेक्टर आदित्य धर की तरफ देखता था कि क्या वे खुश हैं या नहीं. उस एक सीन पर बहुत ज्यादा मेहनत लगी थी. हमने इस पर काफी सोचा-विचारा था और कई बार इम्प्रोवाइजेशन भी किया था, यानी कुछ बातें अपनी तरफ से जोड़ी थीं.'
Instagram: danishpandor
इंट्रोवर्ट दानिश को रोल कैसे मिला?
दानिश पंडोर असल में बहुत सॉफ्ट और शर्मीले स्वभाव के इंसान हैं. लोग अक्सर पूछते हैं कि इतने खतरनाक और खूंखार किरदार को उन्होंने कैसे निभाया? इस पर दानिश ने कहा, 'मैं स्वभाव से बहुत इंट्रोवर्ट हूं. लेकिन जब परफॉर्मेंस की बात आती है तो मैं अपनी सारी शर्म और झिझक को एक तरफ रख देता हूं. सीन मेरे दिमाग में बार-बार चलता रहता है और जैसे ही कैमरा ऑन होता है, मेरे अंदर कोई झिझक नहीं रहती. शायद आदित्य सर को मुझमें कुछ खास बात दिखी होगी, जिसके कारण उन्होंने मुझे यह रोल दिया. मैं उनके इस फैसले के लिए हमेशा आभारी रहूंगा.'
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मुकेश छाबड़ा का योगदान
दानिश ने डायरेक्टर आदित्य धर की तारीफ करते हुए कहा कि फिल्म में हर किरदार इतनी अच्छी तरह से लिखा गया है कि हर एक का अपना अलग आर्क बहुत सुंदर तरीके से उभरकर सामने आया है. उन्होंने आगे कहा, 'मैं मुकेश छाबड़ा सर को भी खास तौर पर क्रेडिट देना चाहूंगा. उन्होंने अलग-अलग जगहों से बहुत अच्छे कलाकारों को चुना और उन्हें एक परफेक्ट फ्रेम में फिट कर दिया. सबसे खूबसूरत किरदार जमील जमाली का था, जिसे राकेश बेदी ने निभाया है. वे 49 साल से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं, लेकिन इस फिल्म में उन्हें बिलकुल नया और अलग अंदाज में दिखाया गया है.' इस तरह दानिश पंडोर ने अपने इंटरव्यू में फिल्म की मेहनत, डायरेक्टर की दूरदृष्टि और अपने किरदार की तैयारी के बारे में खुलकर बात की.