चांदी 4 लाख के पार, सोना 1.8 लाख के ऊपर; अचानक ऐसा क्या हुआ कि धड़ाम से नीचे आने लगे दाम?
पिछले दो साल से तेज रफ्तार से बढ़ रही चांदी ने गुरुवार को इतिहास रचते हुए घरेलू बाजार में 4 लाख रुपये प्रति किलो और सोने ने 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर पार किया. लेकिन रिकॉर्ड ऊंचाई के ठीक बाद मुनाफावसूली शुरू हुई और सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व में संभावित बदलाव, डॉलर में मजबूती और ओवरबॉट मार्केट कंडीशन ने बाजार पर दबाव डाला.;
पिछले दो साल से बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भाग रही चांदी ने गुरुवार को इतिहास रच दिया. पहली बार घरेलू बाजार में चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गई. वहीं सोने ने भी नया रिकॉर्ड बनाते हुए MCX पर 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने इन कीमती धातुओं को आसमान तक पहुंचा दिया.
लेकिन रिकॉर्ड ऊंचाई के ठीक बाद बाजार में ऐसा झटका लगा कि निवेशकों की धड़कनें तेज हो गईं. मुनाफावसूली शुरू होते ही सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. सवाल अब यही है. इतनी बड़ी तेजी के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार फिसल गया?
चांदी 4 लाख के पार, सोना 1.8 लाख के ऊपर
MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी गुरुवार को 4.2 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर रहा. वहीं सोने के फरवरी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ने 1.81 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का हाई बनाया, जबकि अप्रैल फ्यूचर 1.93 लाख रुपये तक चला गया.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे-
- चांदी: पहली बार $120 प्रति औंस के पार
- सोना: $5,600 प्रति औंस के ऊपर
क्यों उछली कीमतें? एक्सपर्ट ने बताया असली वजह
मेहता इक्विटीज के वीपी (कमोडिटी) राहुल कलंत्री के मुताबिक, 'भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिससे सोना-चांदी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए.' उन्होंने बताया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने से भी बाजार को सपोर्ट मिला. निवेशक कागजी मुद्रा से दूरी बनाकर सोना-चांदी जैसे ठोस एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं.' इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को परमाणु समझौते को लेकर दी गई चेतावनी ने भी वैश्विक तनाव बढ़ाया.
रिकॉर्ड के बाद रिकॉर्ड गिरावट, क्या हुआ उल्टा?
गुरुवार की ऐतिहासिक तेजी के बाद शुक्रवार को बाजार ने यू-टर्न ले लिया.
सोना: MCX पर अप्रैल फ्यूचर 5% गिरकर 1,75,100 रुपये/10 ग्राम
चांदी: मार्च फ्यूचर 6% टूटकर 3,75,900 रुपये/किलो
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 5% गिरा, जो एक दिन पहले ही रिकॉर्ड हाई पर था.
ETF निवेशकों को बड़ा झटका
सोना-चांदी के ETF में भी भारी बिकवाली देखने को मिली- Gold ETFs
Nippon India Gold BeES: करीब 10% गिरावट
ICICI Prudential Gold ETF: ~10% नीचे
Axis, HDFC, DSP, UTI, Quantum Gold ETF में भी 8–10% तक गिरावट
Silver ETFs
Mirae Asset Silver ETF: 13% गिरा
Motilal Oswal Silver ETF: 12.5% टूटकर ₹330
Nippon, HDFC, Axis, Tata, Kotak Silver ETF में 14% तक गिरावट
आज सोना-चांदी क्यों टूटे? बड़ी वजह क्या है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी फेड को लेकर बदलती अटकलें हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही जेरोम पॉवेल के उत्तराधिकारी का नाम घोषित करेंगे. KCM के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वॉटरर ने कहा कि संभावित तौर पर कम डोविश फेड चेयर, डॉलर में मजबूती और ओवरबॉट कंडीशन ने सोने पर दबाव बनाया है.' वहीं StoneX के मैट सिम्पसन के अनुसार, 'केविन वॉर्श के फेड चेयर बनने की अफवाहों ने एशियाई बाजार में सोने की चमक फीकी कर दी.'
निवेशकों को क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट की राय
आनंद राठी की तन्वी कंचन मानती हैं कि बाजार दो हिस्सों में बंटा है- 'कुछ निवेशक गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं, तो कुछ इसे ओवरहीटेड मार्केट मानकर सतर्क हैं.' उन्होंने चेताया कि 2025 की तेज उछाल के बाद एक साथ निवेश करना खतरनाक हो सकता है. बेहतर है निवेश को किस्तों में फैलाया जाए.' VT मार्केट के अनुसार, लंबी अवधि के लिए सोना-चांदी अब भी मजबूत विकल्प हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में जोखिम बना रहेगा.