ईरान संकट से देश में गैस की किल्लत, भारत कैसे करता है अपनी जरूरतें पूरी, समझें पूरी सप्लाई चेन

ईरान संकट ने भारत में गैस की आपूर्ति पर असर डाला है. सरकार और कंपनियां घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और वैकल्पिक सोर्स से सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं.

Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 10 March 2026 7:35 PM IST

ईरान यूएस इजरायल युद्ध के चलते भारत को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई में रुकावट आई है. मुंबई, बेंगलुरु और पूणे समेत कई शहरों में आपूर्ति गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है.खासकर होर्मुज स्ट्रेट के जरिए शिपमेंट में रुकावट की वजह से,जहां भारत का लगभग 85-90% LPG और LNG इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा ट्रांजिट होता है. डिमांड पूरी करने के लिए, भारत अपने 7-8 हफ्ते के तेल बफर स्टॉक का फायदा उठा रहा हैत्र घरेलू LPG प्रोडक्शन बढ़ा रहा है. घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू कर रहा है.

1. भारत किस-किस देश से गैस आयात करता है?

भारत ज्यादातर एलएनजी (LNG) के रूप में आयात करता है क्योंकि घरेलू पाइपलाइन उत्पादन छोटा है. आयात स्रोत 2024 डेटा के अनुसार भारत ने कुल LNG आयात 27.8 बिलियन किलोग्राम किया. इनमें कतर से 11.3 बिलियन kg (कीमत 6.4 बिलियन डॉलर), अमेरिका से 5.4 बिलियन kg (कीमत 2.54 बिलियन), यूएई से 3.16 बिलियन kg (कीमत 1.71 बिलियन डॉलर), अंगोला से 1.97 बिलियन kg (कीमत 1.05 बिलियन डॉलर) ओमान, नाइजीरिया, अन्य से कुल 2.4 बिलियन डॉलर के आयात किया था.

भारत सबसे ज्यादा कतर से 40% गैस आयात करता है. उसके बाद अमेरिका और यूएई, जैसे देश का नंबर आता है. वहीं, अमेरिका से LPG (रसोई गैस) आयात भी बढ़ रहा है.

2. भारत कितनी गैस खुद उत्पादन करता है?

भारत में घरेलू गैस उतनी बड़ी मात्रा में नहीं है, जितनी उसकी मांग है. भारत में

2025 में घरेलू उत्पादन 33,125 MMSCM रहा. लगभग समान या थोड़ा गिरा हुआ 2024 के मुकाबले. दिसंबर 2025 में उत्पादन कुछ गिरावट के साथ 293.7 करोड़ SCM रहा. भारत में गैस केा उत्पादन असम, राजस्थान, और ऑफशोर (समुद्री) क्षेत्रों में होता है.

3. भारत में कौन- सी कंपनियों करती हैं गैस का उत्पादन?

भारत की प्रमुख LNG आयात और रिगैसिफिकेशन के काम में शामिल कंपनियों में गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL), ओएनजीसी, ओआईल, IOC, BPCL, HPCL और अडाणी टोटल गैस का नाम शामिल है.

4. बीते दो साल में गैस आयात की मात्रा और खर्च कितनी?

साल 2024 में LNG आयात 27.8 बिलियन kg (36.7 BCM) रिकॉर्ड रहा. FY25 (2024–25): आयात 36,699 MMSCM (15%) बढ़ा. FY26 (2025–26) अप्रैल–नवंबर तक 23,102 MMSCM, आयात बिल $9.2 बिलियन. यह पिछले साल की तुलना में 11% कम रहा, क्योंकि कीमत में गिरावट और मांग घटने की वजह से.

आयात बिल साल 25-6 तक एलएनजी बिल 9.2B (₹75,000 करोड़) तक था. साल 2024–25 में कुल गैस/एलएनजी आयात लगभग $14–15B (₹1.2–₹1.3 लाख करोड़) के आसपास था.

5. यूएस–इजरायल और ईरान कितना पड़ेगा प्रभाव?

साल 2026 के मध्य तक ईरान में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जोखिम के कारण आपूर्ति में बड़ी बाधा आई है. कतर की आपूर्ति में 40% कटौती जैसी खबरें आई हैं, जिससे भारत की LNG की सप्लाई बाधित हुई है. डिजिटल चार्टर्स की कीमतें और टैंकर किराया भी दोगुना से ऊपर चला गया. उद्योगों में गैस की आपूर्ति सीमित हुई (Gujarat समेत), जिससे उर्वरक, स्टील जैसे सेक्टर प्रभावित हुए. कुछ कंपनियों (Petronet LNG) ने सैन्य स्थितियों के हवाले से 'इमरजेंसी' जैसी स्थितियां घोषित की हैं.

IEA और कई ऊर्जा विश्लेषक रिपोर्टों के अनुसार भारत की लगभग 60% गैस आयात पश्चिम एशिया पर निर्भर है. यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो गैस आपूर्ति और कीमतें अनिश्चित रूप से प्रभावित होंगी. स्पॉट मार्केट में कीमतें और रसद शुल्क बढ़ेंगे.

6. युद्ध लंबा खिंचने पर भारत की तैयारी क्या?

  • अमेरिका से गैस आयात बढ़ाना (LPG & LNG): 2026 से अमेरिका से रसोई गैस का करीब 10% आयात कर रहा है. इसी तरह LNG के दीर्घकालिक समझौते पर भी चर्चा जारी.
  • रूस और अफ्रीकी देशों से LNG की बातचीत (प्लान स्तर पर) अनेक कंपनियां और सरकार वैकल्पिक स्रोतों को देख रही हैं.
  • विदेशी परियोजनाओं में हिस्सेदारी ONGC और अन्य कंपनियां विदेशी LNG परियोजनाओं में रणनीतिक हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं.
  • लॉन्ग‑टर्म सप्लाई ऑप्टिमाइजेशन घरेलू LPG/एलएनजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश जारी (Refiners ने उत्पादन बढ़ाने की तैयारी की.
  • अधिक LNG टर्मिनल की क्षमता निर्माण (2030 तक 66.7 मिलियन टन/वर्ष करने की है.
  • ईरान, यूएस इजरायल युद्ध लंबा चलने पर आपूर्ति बाधा होने से कीमत वृद्धि होगी और गैस की आपूर्ति 40% तक प्रभावित होने की संभावना है.

7. क्या है सरकार की स्ट्रेटेजिक और टैक्टिकल तैयारी?

वैकल्पिक व्यवस्था : भारत यूएई, अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे दूसरे सप्लायर्स से LPG ले रहा है. ताकि तुरंत होने वाले संघर्ष वाले इलाके पर निर्भरता कम हो सके.

घरेलू उत्पादन पर जोर : सरकार ने रिफाइनरियों (IOC, BPCL, HPCL) को LPG प्रोडक्शन को ज्यादा से ज्यादा करने और इसे घरों के लिए प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है. जबकि गैर-जरूरी कमर्शियल कंपनियों को सप्लाई कम की है.

लॉजिस्टिक्स री-रूट : भारत के पास 25-30 दिनों का LPG स्टॉक और 7-8 हफ्ते का कुल तेल बफर है, जिससे लॉजिस्टिक्स को री-रूट करने का समय मिलता है.

नेचुरल गैस : नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026 को ट्रांसपोर्ट में कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG), किचन में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और फर्टिलाइजर प्रोडक्शन के लिए नेचुरल गैस को प्रायोरिटी देने के लिए लागू किया था.

एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट पर अमल : एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 का इस्तेमाल जमाखोरी को रोकने और फ्यूल का बराबर डिस्ट्रीब्यूशन पक्का करने के लिए किया जा रहा है.

8. जानें सप्लाई चेन एनालिसिस (LNG और LPG)

इम्पोर्ट सोर्स (अपस्ट्रीम): भारत की 60% से ज़्यादा LPG खपत इम्पोर्ट की जाती है, ज्यादा कतर, UAE, सऊदी अरब और कुवैत से.

लॉजिस्टिकल बॉटलनेक: होर्मुज स्ट्रेट एक जरूरी रास्ता है, जिससे 85-90% LPG इम्पोर्ट होता है.

प्रोसेसिंग और स्टोरेज (मिडस्ट्रीम): भारत में बड़े इम्पोर्ट टर्मिनल और एक बढ़ता हुआ पाइपलाइन नेटवर्क (सितंबर 2024 तक 24,945 km) है, जिसमें पेट्रोनेट LNG जैसी बड़े स्टोरेज की सुविधाएं शामिल हैं.

डिस्ट्रीब्यूशन (डाउनस्ट्रीम): सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) 33 करोड़ कनेक्शनों को LPG बांटती हैं. कमर्शियल यूज़र्स (होटल/रेस्टोरेंट) को अभी घरेलू कुकिंग गैस को प्राथमिकता देने में पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है.

रूस की भूमिका: रूस नवंबर 2025 में 35% हिस्सेदारी के साथ भारत को क्रूड ऑयल का एक बड़ा सप्लायर बना हुआ है.

US इम्पोर्ट: 2024 में भारत में US LNG इम्पोर्ट 53.5% बढ़ा. अल्टरनेटिव शिपिंग टैंकर खाड़ी से बचने के लिए केप ऑफ गुड होप जैसे लंबे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

दरअसल, भारत एक तेजी से बढ़ता ऊर्जा बाज़ार है जहां गैस की मांग बढ़ रही है लेकिन घरेलू उत्पादन सीमित है. आयात पर निर्भरता अधिक बनी हुई है, विशेषकर खाड़ी देशों से. युद्ध और वैश्विक भू‑राजनीतिक तनावों के कारण सप्लाई चेन बाधित हुआ है, जिससे सरकार आपूर्ति विविधता, विकल्प स्रोत और रणनीतिक योजना पर बल दे रही है. भविष्य में यह आवश्यक होगा कि भारत गैस की सुरक्षा, इन्वेंटरी और वैकल्पिक स्रोतों पर और ज़ोर दे ताकि एनेर्जी सिक्योरिटी मजबूत रहे.

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