Budget 2026: आर्थिक विकास के 6 सेक्टर जिस पर वित्त मंत्री ने दिया सबसे ज्यादा जोर, इकोनॉमी के लिए क्यों माना 'बूम' फैक्टर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में आर्थिक सेक्टरों मैन्युफैक्चरिंग, MSME, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर जोर दिया है. जानिए इस बजट का कुल आकार, प्लान/नॉन-प्लान आवंटन की भूमिका और क्यों इन क्षेत्रों पर फोकस देश की आर्थिक वृद्धि के लिए अहम है.;

( Image Source:  Sora AI )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 1 Feb 2026 12:18 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Budget 2026-27 भारत की अर्थव्यवस्था को तेज, स्थिर और समग्र रूप से विकसित करने का रोडमैप पेश किया है. इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में लगभग ₹54.1 लाख करोड़ के बजट का प्रस्ताव पेश की है, जो पिछले साल के बजट से लगभग 8% बड़ा है. आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वित्तीय स्थिरता को संतुलित करने का संकेत देता है. बजट में प्लान और नॉन-प्लान खर्चों के अलावा 6 प्रमुख क्षेत्रों पर भारी जोर दिया गया है जो आगे भारत की विकास कथा को परिभाषित करेंगे. ​बजट में जिन छह सेक्टर्स पर जोर दिया गया है, उसके बारे में जानें सब कुछ.

1. मैन्युफैक्चरिंग

Budget 2026 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रमुख ताकत देने का जोर है, खासकर आयात प्रतिस्थापन और उच्च-मूल्य उत्पादन के लिए प्रोत्साहन पैकेज के माध्यम से. यह पहल घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी मजबूत करने और रोजगार सृजन को गति देने में अहम भूमिका निभाती है. वैश्विक व्यापार दबाव के बीच घरेलू उत्पादन को प्रतिस्पर्धी बनाना आर्थिक स्थिरता के लिए प्राथमिकता बना है.

इसके लिए National Manufacturing Mission छोटे से बड़े उद्योगों को शामिल करते हुए घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की पहल, ताकि भारत Make in India एजेंडा को मजबूत करे. Customs duty rationalisation और उत्पादन-लिंकित प्रोत्साहन से मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर. इस पर अमल ने देश में उत्पादन में बढ़ोतरी, रोजगार, निर्यात क्षमता और वैश्विक आपूर्ति-शृंखला में भारत की भागीदारी को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

2. MSME सेक्टर को ‘चैंपियन’ बनाना

Budget में MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि छोटे उद्योगों को वित्त-सहायता, क्रेडिट उपलब्धता और तकनीकी समर्थन मिल सके. MSME देश की अर्थव्यवस्था में रोजगार का बुनियादी आधार हैं, और इनके सशक्तीकरण से उत्पादन क्षमता, नवाचार और निर्यात क्षमता में वृद्धि संभव होगी. इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तीन योजनाएं पेश की है. इससे छोटे उद्योगों के लिए वित्तीय पहुंच आसान होगी. उत्पादन, स्केल-अप और रोजगार के अवसरों का विस्तार हो सकेगा.

क्रेडिट कार्ड स्कीम: माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए ₹5 लाख तक का क्रेडिट कार्ड जारी करने का प्रस्ताव.

महिला उद्यमियों के लिए पहली बार टर्म लोन : महिलाओं, SC/ST उद्यमियों को पांच वर्षों में ₹2 करोड़ तक का टर्म लोन.

क्रेडिट गारंटी कवर : MSMEs और स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी कवरेज बढ़ाया गया.

3. पुरानी औद्योगिक क्षेत्रों का पुनर्जीवन

मोटे उद्योग और पारंपरिक उत्पादन क्लस्टर जैसे फुटवीयर, लेदर, खाद्य प्रसंस्करण आदि में नीतिगत समर्थन और इन्फ्रा-अपग्रेडेशन के जरिए पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं. इससे न केवल क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा बल्कि स्थानीय इकाइयों की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी.

कृषि उत्पादन बढ़ाने और विविधता लाने के लिए अभियान-स्तर के कार्यक्रम हैं, जैसे प्रमुख फसलों के लिए मिशन-तुल्य योजनाएं पर जोर दिया जाएगा. Kisan Credit Card (KCC) के तहत लोन सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाई गई है. ताकि कृषि क्षेत्र मजबूत हो. इससे खुदरा अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा.

4. इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा

Budget 2026 ने पुराना और नया इन्फ्रास्ट्रक्चर दोनों पर भारी निवेश का लक्ष्य रखा है, जिसमें सड़क, रेल, डिजिटल नेटवर्क, ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचा शामिल है. मजबूत इंफ्रा विकास से देश की उत्पादकता बढ़ती है, लागत घटती है और व्यापार-निवेश का पूरा इकोसिस्टम मजबूत होता है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को ध्यान में रखते हुए एक लाख करोड़ का Urban Challenge Fund का बजट में प्रावधान है. इससे शहरी विकास, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और जल-स्वच्छता को बढ़ाना देना संभव हो पाएगा. राज्य-स्तर पर मूलभूत ढांचे के विकास को प्रेरित करने के लिए 50 साल तक लिए ब्याज मुक्त लोन दिया जाएगा. इसके लिए अलग से बजट में 1.5 लाख करोड़ आव​आवंटित किया गया है. इसी तरह 10 लाख करोड़ रुपये कैपिटल परिसंपत्तियों से पूंजी निर्माण के लिए दिया गया है. UDAN एक्सपेंशन और हवाई सुविधा और बेहतर बनाने की योजना है.

5. लंबी अवधि की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना

वित्त मंत्री ने बजट में दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए राजकोषीय अनुशासन, वित्तीय नियमों-मार्गदर्शकों और भविष्य-नियोजित नीतियों का उल्लेख किया है. इससे निवेशक भरोसा बढ़ेगा. अर्थव्यवस्था में वित्तीय स्थिरता आएगीऔर बाह्य आर्थिक संकट के समय अर्थव्यवस्था उसका सामना करने में सक्षम होता है. ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में 100% नल जल कवरेज प्रदान करना जारी रखने का लक्ष्य है. शहरों को विकास हब में बदलने के लिए बड़ी राशि आवंटित की गई है.

6. शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास

Budget 2026 में शहरी विकास को एक मजबूत आर्थिक इंजन के रूप में प्रमुखता दी गई है. नए इन्फ्रा-फंड, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं और शहरी उद्योग संयोजनों के जरिए शहरों में रोजगार, निवेश और तकनीकी नवाचार में वृद्धि होगी, जो आर्थिक विकास के अगले चरण को गति देगा. इसके लिए बजट में वित्तीय स्थिरता और निवेशकों के भरोसे को प्राथमिकता दी है. आय-कर स्लैब में राहत और नए वित्तीय सुधार कदमों से खपत को प्रोत्साहन मिलेगा.

GDP को बढ़ाने में इन सेक्टरों की अहमियत कैसे?

वित मंत्री ​सीतामरण के अनुसार इन छह क्षेत्रों पर फोकस से अर्थव्यवस्था को बहुवर्षीय मजबूती, रोजगार सृजन, प्रतिस्पर्धात्मकता, पंजीकरण बढ़ाने, वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क में शामिल होने जैसे मल्टी-डायमेंशनल लाभ मिलते हैं. इससे न सिर्फ GDP ग्रोथ तेज होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को स्वास्थ्य, स्थिरता और भविष्य-तैयारी का एक नया रूप मिलेगा, जो केवल एक बजट का असर नहीं, बल्कि दशक भर की आर्थिक दिशा तय कर सकता है.

54.1 लाख करोड़ का बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार कुल बजट लगभग ₹54.1 लाख करोड़ का पेश किया है. यह पिछले वित्त वर्ष के लगभग ₹50.65 लाख करोड़ से करीब 7.9 % अधिक माना जा रहा है, जो विकास को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है.

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