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जो कहा जाता और सुना जाता उससे कितना अलग है अफगानिस्तान, महिलाओं के लिए कितना सेफ, 13 दिन अकेली रही इंडियन व्लॉगर ने सब बताया

हाल ही में इंडियन व्लॉगर अफगानिस्तान गई थी. इंफ्लुएंसर ने इस देश के लिए कहा कि यह मुल्क महिलाओं के लिए सेफ नहीं है. यहां महिलाएं अपनी जिंदगी खुलकर नहीं जी सकती हैं.

Sharanya Iyer
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( Image Source:  instagram- @trulynomadly )

अफगानिस्तान को लेकर दुनिया में कई तरह की बातें कही जाती हैं. कोई इसे खतरनाक देश बताता है, तो कोई वहां की खूबसूरती और संस्कृति की चर्चा करता है. ऐसे में जब एक भारतीय महिला ट्रैवल ब्लॉगर ने अकेले अफगानिस्तान जाकर 13 दिन बिताए, तो उनकी यात्रा ने कई सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने वहां के लोगों, रहन-सहन और असली हालात को करीब से देखा.

शारण्या अय्यर ने अपनी यात्रा के एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि अफगानिस्तान वैसा कितना अलग है, जैसा हम सुनते हैं. उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, वहां के लोगों के व्यवहार और अपनी पूरी यात्रा के बारे में खुलकर बात की. आइए जानते हैं उन्होंने अफगानिस्तान को लेकर क्या-क्या बताया.

क्यों अफगानिस्तान घूमने पहुंची भारतीय ट्रैवल ब्लॉगर ?

instagram- @trulynomadly

भारत की ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर शारण्या अय्यर ने साल 2025 में अकेले अफगानिस्तान घूमने गई . उन्होंने अपनी इस यात्रा के वीडियो और अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद लोगों के बीच बड़ी बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने उनके साहस की तारीफ की, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे देश में घूमना सही है, जहां महिलाओं के अधिकारों पर कई तरह की पाबंदियां हैं.

कैसा था अफगानिस्तान में ब्लॉगर का एक्सपीरियंस ?

ब्लॉगर ने अपनी यात्रा के दौरान सिर्फ फेमस जगहें ही नहीं देखीं, बल्कि वहां के आम लोगों से भी मुलाकात की. उन्होंने बताया कि कई परिवारों ने उनका अपने घर में स्वागत किया, साथ बैठकर खाना खिलाया और उनसे खुलकर बातें कीं. कुछ लोगों ने उनसे दूसरे देशों में काम और वीजा पाने में मदद की उम्मीद भी जताई. उनका कहना है कि वहां के लोग बेहद अच्छे मिले, लेकिन महिलाओं की स्थिति आज भी बहुत कठिन है.

13 दिन की अफगानिस्तान यात्रा में कितना खर्च हुआ ?

instagram- @trulynomadly

शारण्या नवंबर 2025 में दिल्ली से काबुल पहुंचीं. उन्होंने करीब 12 से 13 दिन अफगानिस्तान में बिताए. इस दौरान उन्होंने बामियान घाटी, पंजशीर, गजनी और कंधार जैसी जगहों का दौरा किया. विदेशी यात्रियों के लिए स्थानीय गाइड रखना जरूरी होता है, इसलिए पूरी यात्रा गाइड और ड्राइवर के साथ हुई. इस ट्रिप पर उनका करीब 2.1 लाख रुपये खर्च हुआ, जिसमें फ्लाइट, होटल, खाना, गाइड और अन्य खर्च शामिल थे.

क्यों उठाया सवाल ?

भारत लौटने के बाद शारण्या ने कहा कि उनकी यात्रा का मकसद तालिबान सरकार का समर्थन करना नहीं था. उन्होंने साफ कहा कि अफगानिस्तान में महिलाओं को आज भी शिक्षा और नौकरी जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है, जो बेहद दुखद है. लेकिन साथ ही उन्होंने एक सवाल भी उठाया कि अगर किसी देश की सरकार गलत है, तो क्या वहां रहने वाले आम लोगों को भी पूरी दुनिया से अलग कर देना चाहिए. उनके इस सवाल पर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है.

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