35 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी, ट्रैविस केल्सी समेत 64 लोग बने शिकार, कौन है दिल्ली के सिद्धार्थ जवाहर जिसे हुई 11 साल की जेल?
दिल्ली से अमेरिका पहुंचे सिद्धार्थ जवाहर पर निवेशकों से 35 मिलियन डॉलर से ज्यादा जुटाने और उनकी रकम का गलत इस्तेमाल करने का आरोप साबित हुआ. इस मामले में अमेरिकी अदालत ने उन्हें 11 साल की जेल की सजा सुनाई.
अमेरिका में दिल्ली के रहने वाले सिद्धार्थ जवाहर को निवेश के नाम पर करोड़ों डॉलर की धोखाधड़ी करने के मामले में 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई है. सिद्धार्थ पर पोंजी स्कीम चलाकर निवेशकों से 35 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम जुटाने का आरोप साबित हुआ है. इस धोखाधड़ी के शिकार होने वालों में अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी ट्रैविस केल्सी समेत कई लोग शामिल हैं. अदालत ने सिद्धार्थ को पीड़ितों को 31.35 मिलियन डॉलर लौटाने का आदेश भी दिया है.
सिद्धार्थ कभी अमेरिका में एक सफल इंवेस्टर्स और समाजसेवी के तौर पर पहचाना जाता था. उसने अपनी कंपनी के जरिए लोगों से निवेश कराया, लेकिन जांच में सामने आया कि उसने जुटाई गई रकम का बहुत छोटा हिस्सा ही निवेश किया. बाकी पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने और अपनी महंगे लाइफस्टाइल पर खर्च करने में किया गया.
कौन है सिद्धार्थ जवाहर?
सिद्धार्थ जवाहर को लोग सिड के नाम से भी जानते थे. साल 2005 में 21 साल की उम्र में वह दिल्ली से अमेरिका पढ़ाई करने गए थे. वहां उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी, ऑस्टिन में एडमिशन लिया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फाइनेंस की फील्ड में काम किया और फिर निवेश के कारोबार में उतर गए. साल 2010 के आखिर में उन्होंने फ्रैंक क्रासोवेक और जोहर जिव के साथ मिलकर टेक्सास में स्विफ्टआर्क कैपिटल एलएलसी नाम की कंपनी शुरू की. साल 2013 में इस कंपनी ने इंवेस्टमेंट की सलाह देने वाली कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया. शुरुआत में कंपनी अलग-अलग तरह के कारोबार में पैसा लगाती थी.
किस-किस फील्ड में किया काम
सिद्धार्थ सिर्फ कारोबार तक ही सीमित नहीं रहे. वह कई सामाजिक संस्थाओं के साथ भी जुड़े रहे. करीब चार साल तक वह एंडी रॉडिक फाउंडेशन के बोर्ड में भी रहे. यह संस्था बच्चों और युवाओं के लिए काम करती है. समाजसेवा से जुड़ने की वजह से सिद्धार्थ की पहचान एक कारोबारी के साथ-साथ समाजसेवी के रूप में भी बनने लगी. उनकी यही अच्छी इमेज आगे चलकर लोगों के बीच भरोसा बनाने में मददगार साबित हुई.
कैसे शुरू हुआ किया धोखाधड़ी का खेल?
स्विफ्टआर्क कैपिटल ने शुरुआत में खाने-पीने और रिटेल से जुड़ी कंपनियों में पैसा लगाया. कंपनी का नियम था कि किसी एक कंपनी के शेयर में कुल फंड का 12 फीसदी से ज्यादा पैसा नहीं लगाया जाएगा. लेकिन 2015 में सिद्धार्थ ने ग्राहकों का पैसा पाकिस्तान की तंबाकू कंपनी फिलिप मॉरिस पाकिस्तान के शेयरों में लगाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे निवेश का बड़ा हिस्सा इसी कंपनी में चला गया. साल 2019 तक ग्राहकों के करीब 99 फीसदी पैसे इसी शेयर में लगे हुए थे. बाद में जब इस शेयर की कीमत गिरने लगी, तो निवेशकों के पैसे पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा.
शेयर के भाव गिरने पर क्या किया?
टेक्सास के अधिकारियों की जांच में सामने आया कि सितंबर 2019 के बाद कंपनी और सिद्धार्थ ने इस निवेश की कीमत असल से ज्यादा बताई. शेयर की कीमत लगातार गिर रही थी, लेकिन निवेशकों को इसकी सही जानकारी नहीं दी गई. उन्हें यही बताया जाता रहा कि उनके निवेश से मुनाफा हो रहा है, जबकि असल में उनके पैसे की वैल्यू कम होती जा रही थी.
सिद्धार्थ ने कितने मिलियन डॉलर जुटाए
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, सिद्धार्थ ने जुलाई 2016 से दिसंबर 2023 के बीच निवेशकों से 35 मिलियन डॉलर से ज्यादा यानी करीब 3.5 करोड़ डॉलर जुटाए. लेकिन इसमें से सिर्फ लगभग 10 मिलियन डॉलर ही निवेश किया गया. यानी लोगों से जुटाए गए कुल पैसे का करीब 28 फीसदी हिस्सा ही असल में निवेश के लिए इस्तेमाल हुआ.
क्या है पोंजी स्कीम?
जांच में पता चला कि सिद्धार्थ नए लोगों से मिलने वाला पैसा पुराने निवेशकों को देने में लगा रहा था. इस तरह वह कुछ निवेशकों को पैसे वापस करके अपने काम को सही और फायदे वाला दिखाता रहा. इसी तरीके को पोंजी स्कीम कहा जाता है. इसमें लोगों को अच्छा रिटर्न देने का भरोसा दिलाकर पैसा लिया जाता है, लेकिन उस पैसे को सही जगह लगाने के बजाय नए निवेशकों से मिली रकम से पुराने लोगों को भुगतान किया जाता है. जब नए इंवेस्टर्स आना बंद हो जाते हैं और पैसा मिलना रुक जाता है, तो यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आने लगता है.
कहां-कहां खर्च किए पैसे?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, सिद्धार्थ ने निवेशकों से मिले पैसों का इस्तेमाल अपनी आलीशान जिंदगी पर भी किया. वह इसी रकम से प्राइवेट जेट में सफर करता, महंगे होटलों में रुकता और ऑस्टिन व न्यूयॉर्क में अपार्टमेंट पर पैसे खर्च करता था. इसके अलावा उसने महंगे कपड़े, निजी क्लब की सदस्यता और पार्टियों पर भी काफी रकम खर्च की. इस मामले में अब तक 64 लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बताया गया है.
कौन-कौन बने इस स्कैम का शिकार?
सिद्धार्थ की जान-पहचान अमेरिका की कई बड़ी हस्तियों से थी. वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, टीवी होस्ट माइकल स्ट्रहान और अभिनेता केविन हार्ट के साथ तस्वीरें भी शेयर कर चुका था. उसकी कंपनी में निवेश करने वालों में एनएफएल खिलाड़ी ट्रैविस केल्सी का नाम भी शामिल है. इसके अलावा एनबीए के खिलाड़ी गैरी हैरिस, टिम हार्डवे जूनियर और मेसन प्लमली भी इस मामले में पीड़ित बताए गए हैं. सिद्धार्थ का बड़े सेलिब्रिटी से मिलना और सामाजिक संस्थाओं से जुड़ा होना उसकी अच्छी छवि का हिस्सा था. हालांकि, किसी मशहूर व्यक्ति के साथ तस्वीर होना या किसी संस्था से जुड़ना इस बात का सबूत नहीं है कि वह व्यक्ति धोखाधड़ी में शामिल था.
जांच से बचने के लिए क्या-क्या किया?
सिद्धार्थ के खिलाफ मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने उसके कारोबार और निजी मामलों की जांच शुरू कर दी. अभियोजन पक्ष का कहना था कि उस पर आरोप लगने के बाद उसने जांच से बचने और सबूत छिपाने की कोशिश की. अधिकारियों के मुताबिक, सिद्धार्थ ने अपनी बहन से उसका आईफोन दूर से ही रीसेट करने के लिए कहा था, ताकि फोन में मौजूद जानकारी जांचकर्ताओं तक न पहुंच सके. उस पर अपनी आर्थिक स्थिति और अमेरिका में रहने के कानूनी स्टेटस के बारे में भी गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया.
सिद्धार्थ पर क्या आरोप लगे?
इसके अलावा, अभियोजन पक्ष का आरोप था कि सिद्धार्थ ने एक पीड़ित को एफबीआई के सामने बयान देने से पहले यह समझाने की कोशिश की कि उसे क्या कहना है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, वह चाहता था कि पीड़ित का बयान उसके बचाव में जाए. अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अनुसार, सिद्धार्थ 2005 से 2010 के बीच कई बार कानूनी तरीके से अमेरिका गया था. लेकिन वहां रहने की तय अवधि खत्म होने के बाद भी वह अमेरिका में रहा. उसके पुराने रिकॉर्ड में टेक्सास में नशे की हालत में गाड़ी चलाने के मामले में दोषी पाए जाने की बात भी दर्ज है.
क्यों सजा से पहले करवाया प्रचार?
अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार, सजा होने से पहले सिद्धार्थ ने अपनी छवि सुधारने की भी कोशिश की. उसने एक्सियम स्ट्रैटेजीज नाम की प्रचार कंपनी को 10 हजार डॉलर दिए थे. आरोप है कि इसका मकसद अपने पक्ष में अच्छी खबरें और प्रचार करवाना था. इस मामले में सरकार ने सिद्धार्थ और एक्सियम के संस्थापक जेफ रो के बीच जेल में हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी अदालत में पेश की. इसके कुछ दिन बाद मिसौरी के सांसद सैम ग्रेव्स ने जज को एक पत्र भेजकर सिद्धार्थ को 48 महीने की सजा देने की मांग की. ग्रेव्स ने कहा था कि उन्होंने यह पत्र अपनी निजी हैसियत से लिखा है. जेफ रो पहले ग्रेव्स के चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके थे. हालांकि, सार्वजनिक तौर पर ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि ग्रेव्स को सिद्धार्थ की धोखाधड़ी के बारे में पता था या वह इस मामले में शामिल थे.
सिद्धार्थ को कितने साल की हुई जेल?
इस मामले में सिद्धार्थ ने जनवरी में धोखाधड़ी से जुड़े तीन आरोपों को मान लिया था. इसके बाद 15 सितंबर को अमेरिकी जिला अदालत ने उसे 11 साल जेल की सजा सुनाई. कोर्ट ने सिद्धार्थ को उन निवेशकों को 31.35 मिलियन डॉलर यानी करीब 3.1 करोड़ डॉलर वापस करने का आदेश भी दिया, जिनसे ठगी हुई थी. भारतीय रुपये में देखें तो यह रकम कई सौ करोड़ रुपये बैठती है.




