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अमेरिका को मिलेगी एक और हार! क्या है ईरान का 2 साल का प्लान... US की आर्थिक घेराबंदी से कैसे निकलेगा ईरान-10 पॉइंट्स

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है, जहां एक तरफ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक घेराबंदी करने का फैसला किया है तो वहीं ईरान ने भी 2 साल का प्लान तैयार करने का दावा किया है.

US Sanctions on Iran
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US Sanctions on Iran

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर आर्थिक मोर्चे पर तेज हो गया है. अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है, जिसके जवाब में ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनिजादेह ने दावा किया कि उनका देश इस दबाव से निपटने के लिए पहले से तैयार है. उन्होंने कहा कि ईरानी सरकार के पास अमेरिकी प्रतिबंधों से मुकाबले के लिए दो साल की योजना है.

अमेरिका की ओर से आर्थिक दबाव बढ़ाए जाने के बाद ईरान ने इसे वाशिंगटन की रणनीति की विफलता से जोड़कर देखा है. वहीं अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने की चेतावनी देते हुए कहा है कि तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश की जाएगी.

10 पॉइंट्स में जाने सब

1. ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनिजादेह ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए वाशिंगटन के लिए एक और हार की भविष्यवाणी की. उन्होंने कहा "उन्होंने ईरानी जनता और देश के अधिकारियों के दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन वे हर बार असफल रहे. ऐसा लगता है कि वे एक और हार का सामना करना चाहते थे."

2. मदनिजादेह ने दावा किया कि ईरानी सरकार अमेरिकी दबाव की आशंका को लेकर लंबे समय से तैयारी कर रही थी. उन्होंने कहा "हम इन योजनाओं का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, और सरकार तैयार थी और उसके पास इन आयोजनों के प्रबंधन के लिए दो साल की योजना है."

3. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव अभियान को बड़े स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है. बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था पर ऐसा दबाव बनाएगा जिससे तेहरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मदद और कारोबार के रास्ते सीमित हों.

4. अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान से संबंधित प्रतिबंधों का दायरा पांच प्रमुख क्षेत्रों तक बढ़ाया है. जिसमें डिजिटल संपत्ति, टेक्नॉलॉजी, सोना, विमानन और जहाजरानी शामिल हैं. इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है.

5. अमेरिका ने अलग से 60 व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों को भी प्रतिबंधों के निशाने पर लिया है. अमेरिका का आरोप है कि ये नेटवर्क ईरान को तेल से राजस्व हासिल करने, हथियार खरीदने और साइबर अभियानों में मदद करते हैं. नई कार्रवाई के जरिए इन गतिविधियों से जुड़े वित्तीय और कारोबारी नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश की गई है.

6. अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव केवल ईरानी संस्थाओं तक सीमित नहीं है. संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग, चीन, सिंगापुर और यूरोप के कुछ हिस्सों में मौजूद संस्थाएं भी इन उपायों से प्रभावित हो सकती हैं. इसका मतलब है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है.

7. स्कॉट बेसेंट ने ईरान से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करने वाली किसी भी संस्था को अमेरिकी डॉलर प्रणाली से बाहर किया जा सकता है. बेसेंट ने साफ शब्दों में कहा, "समय शुरू हो गया है."

8. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने अमेरिकी वित्तीय अभियान को लेकर वाशिंगटन पर पलटवार किया. उन्होंने पूछा "अगर वाशिंगटन ने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, तो 'इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय आक्रमण' की क्या आवश्यकता है?"

9. अमेरिका और ईरान के बीच ताजा आर्थिक टकराव उस युद्ध के करीब छह महीने बाद सामने आया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया. शांति प्रयासों के ठप होने और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.

10. अब एक तरफ अमेरिका ईरान की आर्थिक ‘जीवनरेखाओं’ को निशाना बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान दो साल की योजना के जरिए अमेरिकी दबाव का सामना करने का दावा कर रहा है. ऐसे में आने वाले महीनों में आर्थिक प्रतिबंध दोनों देशों के बीच टकराव का सबसे अहम मोर्चा बन सकते हैं.

ईरान इजरायल युद्ध
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