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आटा, साबुन, दाल के लिए लोन, इस दावे पर ईरान ने कर दिया क्लीयर; पांच Point में समझिए Iran में कितनी बढ़ गई महंगाई?

ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव 100 दिन पार कर चुका है, जिससे मिडिल ईस्ट की स्थिति और बिगड़ गई है. महंगाई, दवाओं की कमी और “EMI में रोटी” जैसे दावों पर ईरान दूतावास ने स्थिति स्पष्ट की है.

आटा, साबुन, दाल के लिए लोन, इस दावे पर ईरान ने कर दिया क्लीयर; पांच Point में समझिए Iran में कितनी बढ़ गई महंगाई?
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अमेरिका- इजराइल और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब 100 दिन पार कर चुका है. अप्रैल 2026 के अस्थायी सीजफायर ने कुछ देर के लिए उम्मीद की किरण जरूर दिखाई थी, लेकिन जून 2026 में हालात फिर से डरावने मोड़ पर पहुंच गए. सबसे दर्दनाक तस्वीर अब जंग नहीं, बल्कि महंगाई बन चुकी है…जहां लोग पूछ रहे हैं कि 'क्या सच में ईरानी EMI पर रोटी खा रहे हैं? आइए इस 5 बड़े Point में समझते हैं कि ईरान में महंगाई को लेकर क्या हालात हैं और जंग को लेकर नए अपडेट में क्या-क्या है?

1. 100 दिन का तनाव, लेकिन शांति अब भी दूर

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष लगातार जारी है. कभी हमले रुकते हैं, तो कभी अचानक तनाव फिर बढ़ जाता है. हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं. वही ट्रंप ने फिर ईरान को धमकी दी है यानी ऐसे में साफ होता है कि हालात और बिगड़ने वाले है सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है.

2.'EMI में रोटी' वाले दावे ने मचाई हलचल

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान में लोग जरूरत की चीजें तक किश्तों (EMI) पर खरीद रहे हैं. इस खबर ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी. हालांकि इस पर ईरान के दूतावास ने इन रिपोर्ट्स को गलत बताते हुए कहा कि देश में किसी भी जरूरी सामान की कमी नहीं है और सप्लाई सिस्टम सामान्य रूप से चल रहा है. ईरान ने मीडिया से अपील की कि खबरें सिर्फ आधिकारिक और भरोसेमंद स्रोतों पर आधारित हों. साथ ही कुछ मीडिया संस्थानों को 'पक्षपाती' बताते हुए उनकी रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए.

3. ज़मीनी महंगाई की तस्वीर भी गंभीर

रिपोर्ट्स के अनुसार युद्ध और प्रतिबंधों के बीच कई जरूरी चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं-

  • खाने का तेल कई गुना महंगा
  • अंडों की कीमतों में भारी उछाल
  • चावल और दूध की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
  • हालांकि आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में बदलते रहते हैं.

4. दवाओं की कमी और इलाज पर असर

कई शहरों में दवाओं की सप्लाई प्रभावित हुई है. कुछ जगहों पर मरीजों को सीमित मात्रा में दवाएं दी जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. कच्चे माल की कमी और हमलों के असर से कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन रुक गया है. पेट्रोकेमिकल सेक्टर भी प्रभावित बताया जा रहा है.

5. पहले से ही महंगाई से जूझ रहा था ईरान

2025 के अंत में ही देश में महंगाई और मुद्रा संकट को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे. कई शहरों में विरोध और आर्थिक असंतोष खुलकर सामने आया था. अब ईरान में एक बड़ा वर्ग यह मानने लगा है कि समाधान युद्ध नहीं, बातचीत है. लगातार बढ़ती अनिश्चितता लोगों की जिंदगी और उम्मीद-दोनों को कमजोर कर रही है.

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